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न एनडीए, न यूपीए: किसी के पाले में नहीं हैं ये तीन क्षत्रप, चुनाव बाद साबित हो सकते हैं किंगमेकर

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): चुनावों में रेड्डी, राव और पटनायक का प्रदर्शन आगामी सरकार को तय कर सकता है। वजह ये है कि ये तीनों क्षेत्रप 63 लोकसभा सीटों पर विरोधियों को कड़ी चुनौती दे सकते हैं, जैसा कि पिछले चुनाव में दिया।

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Lok Sabha Election 2019: भारत में 17वीं लोकसभा के गठन के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। एक तरफ एनडीए है तो दूसरी ओर यूपीए। इन सब के बीच तीन ऐसे क्षेत्रीय क्षत्रप हैं जिनकी पकड़ अपने क्षेत्र में काफी मजबूत है।  ये क्षेत्रीय क्षत्रप चुनाव बाद किंगमेकर साबित हो सकते हैं। इनके बारे में फिलहाल ये नहीं कहा जा सकता कि ये यूपीए के साथ जाएंगे या एनडीए के। ये है वाईएस जगमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, दूसरी के चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति और तीसरी नवीन पटनायक की बीजू जनता दल। लोकसभा चुनाव 2014 की बात करें तो जगमोहन रेड्डी की पार्टी ने आंध्रप्रदेश की 25 में से 8 और तेलंगाना की 17 में से 1 सीट पर जीत हासिल की थी। नवीन पटनायक की पार्टी बीजद ने ओडिशा की 21 में से 20 सीटें अपने नाम की थी और के चंद्रशेखर राव की पार्टी टीआरएस ने तेलंगाना की 17 में से 11 सीटें जीती थी।

इस बार पूरे देश में 11 अप्रैल से लेकर 19 मई तक सात चरणों में चुनाव हो रहे हैं। हालांकि, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 11 अप्रैल को वोटिंग है। वहीं, ओडिशा में चार चरणों में मतदान की प्रक्रिया पूरी होगी। चुनावों में रेड्डी, राव और पटनायक का प्रदर्शन आगामी सरकार को तय कर सकता है। वजह ये है कि ये तीनों क्षेत्रप 63 लोकसभा सीटों पर विरोधियों को कड़ी चुनौती दे सकते हैं, जैसा कि पिछले चुनाव में दिया। साथ ही त्रिशंकु सदन भी बना सकते हैं। ये तीनों लीक से हटकर भी चलते हैं, ऐसे में एनडीए या यूपीए किसी को समर्थन भी कर सकते हैं।

वर्ष 2009 में जगमोहन रेड्डी के पिता राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद उनके रिश्ते कांग्रेस से खराब हो गए थे। उनके उपर भ्रष्टाचार के कई केस हुए और 16 महीने जेल में भी रहना पड़ा। उस समय केंद्र में यूपीए 2 की सरकार थी। जब केंद्र में एनडीए की सरकार बनी तो जांच प्रक्रिया धीमी हो गई। हालांकि, वे समय-समय पर भाजपा और कांग्रेस दोनों की आलोचना करते रहते हैं।

ओडिशा की बात करें तो नवीन पटनायक बीते 19 साल से राज्य के मुख्यमंत्री हैं। 2009 तक भाजपा के साथ अच्छी साझेदारी थी लेकिन बाद में सीट बंटवारे को लेकर दोनों के राह अलग हो गए। 2017 में भाजपा ने जब रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया था, उस समय बीजद ने कोविंद का समर्थन किया था। हालांकि, उपराष्ट्रपति के चुनाव के समय बीजद ने कांग्रेस उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी का समर्थन किया। बीजद ने नोटबंदी का भी विरोध किया था।

के चंद्रशेखर राव की बात करें तो तेलंगाना में कार्यकाल पूरा होने के 6 महीने पहले उन्होंने राज्य में विधानसभा चुनाव करवाने की घोषणा कर दी और चुनाव में बहुमत भी मिला। चंद्रशेखर राव की भी पकड़ अपने क्षेत्र में काफी मजबूत है और ये भी किसका समर्थन करेंगे, तय नहीं है।

बता दें कि फिलहाल एनडीए में भाजपा, शिव सेना, अकाली दल, एआईएडीएमके, जनता दल यू, लोजपा, पीएमके सहित अन्य पार्टियां शामिल है। यूपीए में कांग्रेस, डीएमके, टीडीपी, जेडीएस, राजद, झारखंड मुक्ति मोर्चा, एनसीपी, नेशनल कांफ्रेंस, आईयूएमएल सहित अन्य पार्टियां शामिल है। वहीं, कुछ पार्टियां ऐसी है जो न एनडीए के साथ है और न हीं यूपीए के साथ। इनमें समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, तेलंगाना राष्ट्र समिति, बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, लेफ्ट, पीडीपी, एआईयूडीएफ, एआईएमआईएम, आईएनएलडी, आम आदमी पार्टी, जेवीएम (पी), तमिलनाडु की एममके शामिल है।

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