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Lok Sabha Election 2019: अमित शाह के रोड शो में हिंसा पर बोलीं मुनमुन सेन- थोड़ी सी हिंसा हो गई थी

पश्चिम बंगाल में टीएमसी प्रत्याशी मुनमुन सेन ने पहले भी हिंसक गतिविधियों पर विवादित बात कह डाली थी। आसनसोल में मतदान के दौरान हुई हिंसक घटना पर सेन ने कहा था, "छोटी-मोटी हिंसक घटनाएं तो होती रहती हैं।"

पश्चिम बंगाल के आसनसोल से तृणमूल प्रत्याशी मुनमुन सेन। (Photo: ANI)

अभिनेत्री से राजनेता बनी पश्चिम बंगाल के आसनसोल से टीएमसी प्रत्याशी मुनमुन सेन ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में अमित शाह के रोड शो में हुई हिंसा को ‘मामूली’ करार दिया। रविवार को मुनमुन सेन से जब रोड शो के दौरान हिंसा और 19वीं सदी के समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ने पर सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा कि यह एक “छोटी सी हिंसक” घटना थी। मुनमन सेन ने मतदान के बाद एनडीटीवी से बातचीत में कहा, “बंगाल में पिछले 6 सालों से ध्रुवीकरण की कोशिश हो रही है और यह बंगालियों द्वारा नहीं किया जा रहा। यहां अन्य राज्यों की तरह छोटी-मोटी हिंसक वारदाते हो जाती हैं, लेकिन किसी ने भी बीते पांच सालों में उत्तर प्रदेश में हुए हिंसक घटनाओं का उल्लेख नहीं किया… यह बहुत मामूली हिंसक झड़प है।”

मुनमुन सेन ने कहा, “विद्यासागर की प्रतिमा को कोई भी बंगाली तोड़ नहीं सकता, जब तक वह टीएमसी छोड़कर पार्टी नहीं बदल लेता। हम कोलकाता में धर्म-निरपेक्ष लोग हैं। गैर-बंगालियों में सिख, यहूदी, गुजराती, मुसलमान सभी शामिल हैं। यहां कई सारी टैगोर की प्रतिमाएं हैं, लेकिन किसी ने उन्हें नहीं तोड़ा।”

ऐसा नहीं है कि मुनमुन सेन ने पहली बार कोई विवादित बयान दिए हों। इससे पहले भी उनके बयान सुर्खियों में रह चुके हैं। 2019 लोकसभ चुनाव में जब आसनसोल के लिए मतदान हो रहे थे, तब वहां से बीजेपी प्रत्याशी बाबुल सुप्रियो के साथ टीएमसी की झड़प हुई थी। इस पर मुनमुन सेन ने कहा था कि “छोटी-मोटी हिंसक घटनाएं तो हो ही जाती हैं।” उस दौरान भी सेन ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वह घटना से इसलिए अपरिचित रह गई थीं, क्योंकि उन्हें समय पर ‘बेड-टी’ नहीं मिली और वह देर तक सोती रह गईं।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान बढ़ते हिंसक वारदातों को देखते हुए इलेक्शन कमिशनने प्रत्याशियों के प्रचार पर तय समय से पहले ही प्रतिबंध लगा दिया। हालांकि, आयोग के इस कदम की टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुरजोर ढंग से मुखालफत की थी। उन्होंने प्रतिबंध की समय-सीमा और पीएम नरेंद्र मोदी की पश्चिम बंगाल में चुनावी सभाओं को लेकर आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए थे।

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