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Loksabha Election 2019 Result: उत्तर प्रदेश में मुस्लिम परिवारों की तैयारी- यदि भाजपा जीती लोकसभा चुनाव तो छोड़ देंगे गांव

Loksabha Election 2019 Result: वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनी और यह राज्य पूरी तरह भगवा पार्टी के कब्जे में आ गया।

तस्वीर का उपयोग प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

Loksabha Election 2019 Result: उत्तर प्रदेश के एक साधारण गांव नयाबांस में रहने वाले मुस्लिम परिवारों ने योजना बनाई है कि यदि भाजपा इस लोकसभा चुनाव में जीत जाती है तो वे गांव छोड़ देंगे। इस गांव में रहने वाले मुस्लिम कहते हैं, “उन्हें याद है कि एक समय था जब उनके बच्चे हिंदू युवकों के साथ खेलते थे। जब किसी दुकान पर दोनों धर्म के लोग मिलते थे तो खूब सारी बातें होती थी। एक दूसरे के त्योहारों में आना जाना होता था। अब ऐसी बातें नहीं रही।” गांव के कई लोगों का कहना है कि जिस तरह से पिछले 2 साल में ध्रुवीकरण हुआ है, उस वजह से कुछ लोग डरे हुए है और सक्षम लोग यहां से दूर जाने की सोंच रहे हैं।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, गांव के मुसलमानों का कहना है कि जैसा कि एग्जिट पोल में दिखाया गया है कि नरेंद्र मोदी की सत्ता में दोबारा वापसी हो रही है, ऐसी स्थिति में उन्हें लगता है कि हालात और बिगड़ेंगे। हालांकि, मतों की गणना गुरुवार को होगी और इसके बाद ही पूरा परिदृश्य साफ हो पाएगा। गांव में एक छोटी सी गुमटी पर बैठकर तंबाकू और ब्रेड बेचने वाले गुलाम अली कहते हैं, “पहले चीजें काफी अच्छी थी। अच्छे और बुरे वक्त दोनों समय हिंदू तथा मुस्लिम साथ होते थे, चाहे वह किसी की शादी हो या मौत। अब समय इस तरह से बदल गया है कि एक गांव में होने के बावजूद हम अलग-अलग रह रहे हैं।”

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनी और यह राज्य पूरी तरह भगवा पार्टी के कब्जे में आ गया। एक हिंदू पुजारी और भाजपा नेता योगी आदित्यनाथ राज्य के मुख्यमंत्री बनें। अली कहते हैं, “मोदी और योगी ने पूरे माहौल को गंदा कर दिया है। उनका मुख्य और एक मात्र एजेंडा ही हिंदू और मुस्लिम के बीच दरार पैदा करना है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हम इस जगह को छोड़ना चाहते हैं, लेकिन ऐसा कर नहीं सकते हैं। पिछले 2 साल में उनके चाचा सहित करीब एक दर्जन परिवार गांव छोड़ कर जा चुके हैं।”

गौ-हत्या: नयाबांस एक खेती प्रधान गांव है, जहां संकुचित पक्की गलियां, बैलगाड़ियां और गाय पालने वाले लोग हैं। पिछले साल के अंत में देश का विभाजन करने वाला प्रतीक बन गया था क्योंकि हिंदू समुदाय के केुछ लोगों ने शिकायत की थी कि उन्होंने देखा कि मुसलमानों का एक समूह गौ-हत्या कर रहे हैं। गुस्साए हिंदुओं ने पुलिस पर अवैध कार्यों को रोकने में असफल होने का आरोप लगाया। हिंदुओं की भीड़ ने हाईवे को जाम कर दिया, पत्थर फेंके और गाड़ियों में आग लगा दी। एक पुलिस ऑफिसर सहित दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस गांव की जनसंख्या करीब 4000 है। इसमें से 400 मुसलमान हैं। पांच महीनों के बाद भी मुसलमानों ने कहा कि ये घाव पूरी तरह नहीं भरे।

भाजपा प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल कहते हैं, “इस (मोदी) सरकार में देश में किसी तरह के दंगे नहीं हुए हैं। अपराधिक घटनाओं को हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर रंग देना गलत है। विपक्षी सांप्रदायिक राजनीति कर रहा है लेकिन हमें सरकार की निष्पक्षता में विश्वास है। हमारी सरकार की नीति है, न किसी का तुष्टिकरण, न किसी की निंदा। इस वजह से कुछ लोग खुश नहीं हैं।”

नमाज को लेकर विवाद: ग्रामीणों का कहना है कि नयाबांस के इतिहास में पहले भी भारी विवाद हुए हैं। वर्ष 1977 में एक मस्जिद बनाने को लेकर दो पक्षों के बीच दंगा हुआ था। दो लोग मारे गए थे। लेकिन पिछले 40 साल से यहां के लोग सौहार्दपूर्ण वातावरण में रह रहे थे। कुछ मस्लिम निवासी कहते हैं कि मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद कुछ हिंदुओं ने धाक जमाना शुरू कर दिया। वर्ष 2017 के रमजान के महीने में माहौल खराब होने लगा। हिंदू कार्यकर्ताओं ने उनके एक मदरसा पर लगे लाउडस्पीकर के प्रयोग पर रोक लगाने की मांग की। इस मदरसे का इस्तेमाल नमाज पढ़ने के लिए भी किया जाता है। इसके बाद हुए विवाद ने पूरे समुदाय को परेशान कर दिया। मुसलमानों ने न चाहते हुए भी शांत बनाए रखने के लिए माइक और स्पीकर का उपयोग बंद करने पर सहमति व्यक्त की। हालांकि वे कहते हैं कि यह कई वर्षों से संचालित हो रहा था, लेकिन इस कदम ने गहरी नाराजगी पैदा की।

गांव में रहने वाले 63 वर्षीय हिंदू बुजुर्ग ओम प्रकाश ने कहा, “उपरवाले जानते हैं कि वे किस वजह से आहें भर रहे हैं। यहां शांति है लेकिन हम किसी तरह के माइक को बर्दास्त नहीं कर सकते हैं। वह एक मदरसा है, मस्जिद नहीं।” इस्लाम में पांच वक्त की नमाज अदा की जाती है। गांव के कुछ मुस्लिम कहते हैं कि उनके नमाज छूटने का डर रहता है। गांव की रहने वाली 21 वर्षीय लॉ स्टूडेंट आयशा कहती है, “हम किसी भी तरीके से यहां अपने धर्म को प्रकट नहीं कर सकते हैं लेकिन वे कुछ भी करने को स्वतंत्र हैं। गांव के हिंदू समुदाय के लोग किसी त्योहर जुलूस के समय अक्सर मुस्लिम विरोधी नारे लगाते हैं।” हालांकि, करीब 1 दर्जन से ज्यादा हिंदू ग्रामीणों ने इस आरोप को गलत बताया।

आयशा पुराने दिनों को याद करते हुए कहती हैं, “पहले वे हमसे अच्छे से बात करते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। यदि कभी किसी तरह की कोई समस्या होती थी, परिवार को कोई सदस्य बीमार पड़ता था, सभी पड़ोसी मदद करने पहुंच जाते थे चाहे वे हिंदू हो या मुस्लिम। अब ऐसा नहीं होता है।”

गांव में रहने वाले शारफुद्दीन सैफी, जिनकी पास के बाजार में एक कपड़े की दुकान है, पिछले साल गाय के मामले को लेकर स्थानीय हिंदुओं ने पुलिस शिकायत में उनका नाम दे दिया था। जब पुलिस को उनके खिलाफ कुछ नहीं मिला तो 16 दिन बाद वे जेल से रिहा हुए। अब सैफी को लगता है कि काफी कुछ बदल गया है। जेल जाने के बाद छूटने के लिए वकीलों को पैसे दिए। इस वजह से वे दिल्ली जाकर अपने दुकान के लिए माल नहीं ला पाए। पैसे न होने की वजह से 13 साल के बच्चे का नाम प्राइवेट स्कूल से कटवा दिया। वे कहते हैं, “जिसने कभी पुलिस स्टेशन के अंदर का नजारा नहीं देखा और सपने में भी कभी अपराध करने के लिए नहीं सोचा, उसके लिए यह एक बड़ी बात है।” सैफी अक्सर सोचते हैं कि वे गांव छोड़कर कहीं और चले जाएं, लेकिन खुद से कहते हैं, “मैंने कुछ भी गलत नहीं किया, फिर मैं यहां से क्यों जाऊं।”

55 वर्षीय कारपेंटर जब्बर अली दिल्ली के समीप मसूरी में एक मुस्लिम बहुल इलाके में शिफ्ट हो गए। सऊदी अरब में रहकर उन्होंने जो पैसे कमाए थे, उससे एक घर खरीद लिया। अली दिसंबर की घटना को याद करते हुए कहते हैं, “यदि हिंदू एक पुलिस आउटपोस्ट के सामने हिंदू पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या कर सकते हैं, जिनके साथ हथियारबंद सुरक्षाकर्मी थे, ऐसे में हम मुस्लिम कौन होते हैं?” अली ने नयाबांस स्थित अपना घर बेचा नहीं है। वे कभी-कभी यहां आते रहते हैं लेकिन अपने नए घर में खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं क्योंकि वहां सभी पड़ोसी मुस्लिम हैं। वे कहते हैं, “मैं यहां डरा हुआ महसूस करता हूं। यदि मोदी को दूसरा मौका मिलता है और योगी यहां बने रहते हैं, मुस्लिम यहां अपने घर खाली कर सकते हैं।”

22 वर्षीय जुनैद इस गांव के संपन्न मुस्लिम परिवारों में से एक के सदस्य हैं। उनके पिता की सोने की दुकान है। वे पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं, “गांव के सभी मुस्लिम और हिंदू एक साथ खेलते थे, खासकर क्रिकेट। मैंने काफी खेला है। अब कम से कम पिछले एक साल से हमने साथ में नहीं खेला है। अब यहां माहौल ठीक नहीं है।” जुनैद पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली की एक यूनिवर्सिटी में दाखिला लेकर वहीं शिफ्ट होना चाहते हैं। हालांकि, कुछ मुस्लिम गांव में रहना चाहते हैं।

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