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Lok Sabha Election 2019: ‘पहले इतिहास पढ़कर आया कीजिए फिर बहस कीजिए’, टीवी डिबेट में वरिष्ठ पत्रकार से भिड़ गए इतिहासकार

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): डिबेट के दौरान इतिहासकार प्रो. कपिल कुमार वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष से भिड़ गए। पत्रकार को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि पहले इतिहास पढ़कर आया कीजिए और तब डिबेट कीजिए।

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Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव के सातवें चरण से पहले मध्य प्रदेश के भोपाल सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा नाथूराम गोडसे को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक सरगर्मी फिर से बढ़ गई है। हालांकि, साध्वी प्रज्ञा ने माफी मांग ली, इसके बावजूद टीवी चैनलों में डिबेट जारी है। इसी क्रम में टीवी9 पर डिबेट के दौरान इतिहासकार प्रो. कपिल कुमार वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष से भिड़ गए। पत्रकार को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि पहले इतिहास पढ़कर आया कीजिए और तब डिबेट कीजिए।

डिबेट के दौरान एंकर ने कहा, “क्या देश निर्माण में गोडसे ने इतना बड़ा योगदान दिया? हिंदू राष्ट्र अखबार निकालना या गांधी अनशन पर थे, पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये दिया जाना था, उससे नाराजगी, और उसके बाद इस हद तक की गांधी को मारे बिना कुछ नहीं हो सकता, किताबों में इतिहास में दर्ज है।”

इस पर वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष ने कहा, “क्या अमेरिका के अंदर कैनेडी के हत्यारे की चर्चा होती है? ये जो गोडसे के बारे में बार-बार महिमामंडन करने की कोशिश की जाती है और गांधी जी की हत्या को जायज ठहराने की कोशिश की जाती है, इसको ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में देखना पड़ेगा। क्या ये तथ्य नहीं है कि जब 11 सितंबर 1948 को जब सरदार पटेल ने गोलवलकर को चिट्ठी लिख कहा था ‘जिस तरीके से आप जहर भरे भाषण देते हैं और उससे जो माहौल बनता है, उस माहौल ने गांधी जी की हत्या की।’ क्या उन्होंने चिट्ठी में ये नहीं लिखा था कि आरएसएस के लोगों ने मिठाईयां बांटी थी और खुशियां मनाई थी?”

वरिष्ठ पत्रकार ने आगे कहा, “क्या ये सच्चाई नहीं है कि गांधी जी की हत्या के समय सरदार पटेल देश के उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे, और उनके रहते गुरु गोलवलकर को गिरफ्तार किया गया था। गोलवलकर 6 महीने जेल में थे और उसके बाद फिर से वे जेल के अंदर जाते हैं। क्या ये सच्चाई नहीं है कि सावरकर टेक्निकल ग्राउंड पर छूटे थे? जीवन लाल कमेटी ने यह माना था कि आरएसएस का इस हत्या में कोई हाथ नहीं है। हालांकि, उन्होंने ये कहा था कि इस हत्या में सावरकर का हाथ था। इस समय तक सावरकर की मौत हो चुकी थी।”

इस दौरान एंकर ने कहा, “मैं उस सोच की बात कर रहा, जो कत्ल करती है। चाहे वह सोच राजस्थान के शंभू रैगर की हो या दिल्ली में सिखों की हत्या की हो।” इस पर आशुतोष ने कहा, “जिनकी वो सोच है, वो श्यामा प्रसाद मुखर्जी 1942 में चिट्ठी लिखते हैं, भारत छोड़ो आंदोलन को कुचल दिया जाए।” इस पर इतिहासकार कपिल कुमार कहते हैं, “इनको (आशुतोष) ये बता दीजिए कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी नहीं होते तो आज का बंगाल नहीं होता। जिन्ना ने जब कलकत्ता मांगा तो कांग्रेसियों ने क्या किया? पूरा इतिहास पढ़ कर आया कीजिए और तब डिबेट कीजिए। आप हमें गूगल का इतिहास न पढ़ाएं।”

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