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Loksabha Election 2019: बीजेपी के लिए ‘इलेक्‍ट्रॉनिक विक्‍ट्री मशीन’ बनी ईवीएम, चुनाव आयोग पर भी कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस ने कहा है कि 'मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट' सिर्फ 'मोदी प्रचार संहिता' बनकर रही गई है जबकि 'चुनाव आचार संहिता' मोदी प्रचार संहिता बन गई है। आयोग को ईवीएम की विश्वसनीयता को बरकरार रखने के लिए कुछ करना चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी। (फोटो: Video grab image)

Loksabha Election 2019: चुनाव परिणाम से पहले ईवीएम और वीवीपैट को लेकर विपक्ष ने असंतोष जाहिर किया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस ने ईवीएम को बीजेपी के लिए ‘इलेक्‍ट्रॉनिक विक्‍ट्री मशीन’ करार दिया है।

कांग्रेस का यह बयान चुनाव आयोग की 22 विपक्षी दलों की उस मांग को खारिज करने के बाद आया है जिसमें उन्होंने मांग की थी कि मतगणना से पहले वीवीपीपैट की पर्चियों के ईवीएम से मिलान की बात कही थी। विपक्ष ने मांग की थी कि अगर वीवीपैट और ईवीएम का मिलान एक जैसा नहीं पाया जाता तो पूरी विधानसभा की वीवीपैट की पर्चियों को गिना जाए।

चुनाव आयोग के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि विपक्ष की मांग को किस आधार पर खारिज किया गया है आयोग ने इसपर कुछ नहीं कहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि ईवीएम अब बीजेपी के लिए ‘इलेक्‍ट्रॉनिक विक्‍ट्री मशीन’ बना दी गई है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने चुनाव आयोग की लगातार घट रही विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए चुनाव आयोग (EC) को ‘इरेडिकेटेड क्रेडिबिलीटी’ (Eradicated Credibility) करार दिया। उन्होंने कहा कि ’23 दल 75 प्रतिशत मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारी मांगों को लेकर आयोग ने सकारात्मक रुख नहीं अपनाया गया।

सिंघवी ने कहा ‘मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट’ सिर्फ ‘मोदी प्रचार संहिता’ बनकर रही गई है जबकि ‘चुनाव आचार संहिता’ मोदी प्रचार संहिता बन गई है। आयोग को ईवीएम की विश्वसनीयता को बरकरार रखने के लिए कुछ करना चाहिए।

उन्होंने कहा ‘मंगलवार को आयोग से बातचीत में यह सामने आया कि किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में नियम 56 डी का इस्तेमाल किया जाएगा। यह एक बड़ी त्रूटि है क्योंकि यह नियम ऑटो सैंपल चेक पर लागू नहीं होता। 56 डी के तहत होने वाला चेक और सैंपल चेक दोनों अलग-अलग चीजें हैं। अनिवार्य सैंपल चेक जिसकी वजह से चुनाव आयोग उच्चतम न्यायलय के अन्तर्गत बाध्य है वह 56 डी निमय पर लागू ही नहीं होता।’

बता दें कि 19 मई को लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के बाद ईवीएम से जुड़ी कई खबरें सामने आई हैं। ईवीएम स्ट्रॉन्गरूम से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हुआ था। जिसके बाद सभी दल इस मुद्दे पर एकजुट हुए। हालांकि चुनाव आयोग ईवीएम छेड़छाड़ के सभी आरोपों को नकार चुका है। आयोग ने कहा है कि ईवीएम कड़ी सुरक्षा के बीच रखी गई हैं ऐसे में किसी तरह की कोई गुंजाइश नहीं। तमाम प्रमुख एग्जिट पोल में बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए को 300 से ज्यादा सीटें मिलने की आशंका जताई जा रही है।

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