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मुंगेर: जीत तो भूमिहार उम्मीदवार की ही होगी, पर रोल पिछड़े, अतिपिछड़े और यादव-मुसलमान निभाएंगे

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): मुंगेर ने पिछले चुनाव में पहली दफा महिला उम्मीदवार को सांसद बना इतिहास रचा था। इसी उम्मीद में कांग्रेस ने नीलम देवी को उम्मीदवार बनाया है।

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Lok Sabha Election 2019: बिहार का मुंगेर अंग्रेज जमाने से जमालपुर रेल कारखाने और सिगरेट बनाने वाली आईटीसी कंपनी के लिए जाना जाता है। इसके बाद स्वामी सत्यानंद सरस्वती द्वारा स्थापित विश्व योग विद्यालय की वजह से इसकी पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनी। पर हाल में यह प्रतिबंधित एके-47 रायफल की तस्करी और 22 एके-47 राइफल की बरामदगी की वजह से भी सुर्खियों में रहा। यहां चौथे चरण में 29 अप्रैल को चुनाव होने हैं, जहां 18 लाख 70 हजार 993 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। आज (शनिवार, 27 अप्रैल को) शाम पांच बजे चुनाव प्रचार का शोर बंद हो गया।

मुंगेर लोकसभा के तहत छह विधानसभा इलाके हैं। मुंगेर, जमालपुर, सूर्यगढ़ा, लखीसराय, मोकामा और बाढ़ है। यहां अबतक हुए चुनाव में पांच बार कांग्रेस जीती है। 1957 में नयन तारा दास, 1962 में बनारसी प्रसाद सिन्हा और 1971 में समाजवादी नेता मधु लिमये को हराकर देवेंद्र प्रसाद यादव जीते हैं। 1991, 1996 और 1999 में तीन बार ब्रह्मानंद मंडल अलग-अलग पार्टियों से जीते। 1991 में सीपीआई से तो 1996 में समता पार्टी से और 1999 में मंडल जदयू से जीते।

1998 में विजय कुमार विजय और 2004 में जयप्रकाश नारायण यादव ने राजद की लालटेन जलाई। 1977 में भारत लोकदल के श्रीकृष्णा सिंह जीते। 2009 में जदयू के राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह जीते। 2014 में ये लोजपा की वीणा देवी से पराजित हो गए। वीणा देवी बाहुबली पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी हैं। इस बार लोजपा ने मुंगेर सीट छोड़ नवादा ले ली है।

2014 का चुनाव राजीव रंजन एक लाख से ज्यादा मतों से हारे थे। राजद के प्रतीक मेहता 1 लाख 82 हजार 971 मत लाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। मुंगेर ने पिछले चुनाव में पहली दफा महिला उम्मीदवार को सांसद बना इतिहास रचा था। इसी उम्मीद में कांग्रेस ने नीलम देवी को उम्मीदवार बनाया है। ये मोकामा के निर्दलीय बाहुबली विधायक अनंत सिंह की पत्नी हैं। इन्हें बिहार में छोटे सरकार के नाम से लोग पुकारते हैं। इनकी पत्नी राजनीति में नई हैं मगर महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव, जीतनराम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा ने इनके लिए सारी ताकत झोंक दी है।

इस बार समीकरण भी बदले हैं। जदयू-लोजपा-भाजपा एक साथ है और इनके उम्मीदवार राजीव रंजन पुराने हैं। ये फिलहाल राज्य के काबीना मंत्री हैं। इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए यह सीट अहम है। सीएम कई बार आकर सभाएं कर चुके हैं। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी सभाओं के साथ-साथ रोड शो कर चुके हैं। राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के नाम पर वोट मांग रहे हैं। भागलपुर से जदयू नेता विभूति गोस्वामी और राजदीप यादव उर्फ राजा यादव अपनी टोली के साथ मुंगेर में जमे हैं ताकि यादव और मुस्लिम वोट उन्हें मिल सके।

यहां चुनावी जंग में 19 उम्मीदवार अपनी तकदीर आजमा रहे हैं। मगर मुकाबला दो भूमिहार जाति के प्रत्याशियों के बीच है। राजीव रंजन और नीलम देवी आमने-सामने है। यहां भूमिहार मतों की तादाद करीब सवा दो लाख बताई जा रही है। यादव पौने दो लाख, मुस्लिम मतों की संख्या डेढ़ लाख, तीन लाख पिछड़ी और छह लाख अतिपिछड़ी जाति के मतदाताओं के हाथ में जीत हार की कुंजी है। विकास को न तो राजनैतिक दलों ने मुद्दा बनाया और न बनने दिया। बेरोजगारी से जूझते नौजवानों, बाढ़-सुखाड़ की मार झेलते किसानों, मोकामा टाल क्षेत्र से परेशान लोगों की आवाज वोटों के शोर में दबा दी गई है।

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