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Loksabha election 2019: दूसरे चरण के चुनाव में इन सीटों के नतीजें बदल देंगे पूरी तस्वीर, दांव पर दिग्गजों की किस्मत

Loksabha election 2019: दूसरे चरण के उम्मीदवारों में पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा, चार केंद्रीय मंत्रियों और पहली बार चुनाव लड़ रहे कई हाई-प्रोफाइल नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

लोकसभा चुनाव: राज बब्बर, हेमा मालिनी और कनिमोझी। (फोटो: इंडियन एक्सप्रेस)

Loksabha election 2019: लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए गुरुवार (18 अप्रैल 2019) को वोटिंग जारी है। 1600 से ज्यादा उम्मीदवारों की किस्मत की चाबी जनता के हाथ में है क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होती है। दूसरे चरण के उम्मीदवारों में पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा, चार केंद्रीय मंत्री और पहली बार चुनाव लड़ रहे कई हाई-प्रोफाइल नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।इसबार लोकसभा चुनाव सात चरणों में हो रहे हैं और 23 मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे। 11 राज्यों और केंद्र शासित पुडुचेरी के करीब 16 करोड़ मतदाता 95 संसदीय सीटों पर मतदान करेंगे।  ऐसे में हम आपको उन 10 हाई प्रोफाइल सीटों के बारे में बता रहे हैं जहां मुकाबला बेहद ही रोमांचक है:-

1. राज बब्बर बनाम राजकुमार चहर बनाम श्रीभगवान शर्मा

फतेहपुर सीकरी का चुनाव इसबार इसलिए बेहद खास है क्योंकि कांग्रेस ने यहां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर जो कि 5 बार (3 लोकसभा और 2 राज्यसभा) के सांसद रह चुके हैं उन्हें टिकट दिया है, जबकि भाजपा ने राजकुमार चाहर, बहुजन समाज पार्टी ने श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित को टिकट दिया है। कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं जिसमें 6 प्रत्याशी निर्दलीय हैं। बता दें कि फतेहपुर सीकरी सीट 2009 में अस्तित्व में आई थी। तब कांग्रेस से राजबब्बर कैंडिडेट थे। मगर बीएसपी कैंडिडेट पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय ने राजबब्बर को हरा दिया था। चौधरी बाबूलाल यहां तीसरे नंबर पर रहे थे। इसके बाद 2014 में मोदी लहर में यहां भाजपा ने जीत हासिल की। भाजपा के चौधरी बाबूलाल ने 4.26 लाख वोटों के साथ जीत हासिल की थी। इस सीट पर कांग्रेस ने 2014 में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। क्योंकि गठबंधन के तहत यह सीट आरएलडी के पास थी। कांग्रेस-आरएलडी गठबंधन से ठाकुर अमर सिंह चुनाव मैदान में कूदे थे, लेकिन वह मुख्य मुकाबले से बाहर होकर चौथे स्थान पर खिसक गए थे। बता दें कि 2014 में राज बब्बर ने गाजियाबाद से वीके सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था और वह हार गए थे।

2. हेमा मालिनी बनाम कुंवर नरेंद्र सिहं बनाम महेश पाठक

मथुरा की पावन धरती से से 2014 में शानदार जीत दर्ज करने वाली बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ को भाजपा ने एकबार फिर टिकट दिया है। 2014 में उन्होंने आरएलडी के सांसद जयंत चौधरी को 330743 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। इसबार उनका मुकाबला आरएलडी के कुंवर नरेंद्र सिहं और कांग्रेस के महेश पाठक से है। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आरएलडी के ‘महागठबंधन’ के तहत इस सीट पर आरएलडी के कुंवर सिहं अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। हालांकि महागठबंधन इसे ‘बाहरी बनाम बृजवासी’ की चुनावी लड़ाई कह रहा है क्योंकि हेमा मालिनी मुंबई की निवासी हैं। बता दें कि यहां पांच बार कांग्रेस और इतनी ही बार भाजपा ने जीत दर्ज की है। राम मंदिर आंदोलन के बाद मथूरा सीट पर भाजपा चार बार लगातार जीत भी दर्ज कर चुकी है।

3. कनिमोझी बनाम तमिलसाई सौंदरराजन

थुथुकुडी लोकसभा सीट पर तमिलनाडु की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तमिलसाई सौंदरराजन और डीएमके की तरफ से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि की बेटी मुथुवेल करुणानिधि कनिमोझी के बीच टक्कर है। तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों में से एक थुथुकुडी को बेहद अहम सीट माना जाता है। एआईएडीएमके-भाजपा के गठबंधन के तहत ये सीट भाजपा के खाते में आई है। वहीं बसपा ने यहां से शिवा. वी को उम्मीदवार बनाया है। बात करें 2014 के लोकसभा चुनाव की तो एआईएडीएमके के जयसिंह त्यागराज नटरजी को  इस सीट पर 366052 वोटों के साथ जीत मिली थी। जबकि 242050 वोटों के साथ डीएमके के पी. जगन दूसरे स्थान पर थे।

4. पोन राधाकृष्णन बनाम एच वसंतकुमार

तमिलनाडु की कन्याकुमारी सीट पर केंद्रीय जहाजरानी राज्य मंत्री पोन राधाकृष्णन भाजपा के प्रत्याशी हैं। जबकि उनके निकटतम प्रत्याशी कांग्रेस के एच वसंतकुमार हैं। बता दें कि कन्याकुमारी तमिलनाडु की एकमात्र ऐसी सीट है जहां पर भाजपा ने 2014 में जीत दर्ज की थी। उन्हें 3.72 लाख वोट हासिल हुए थे जबकि 2.44 वोट के साथ वसंतकुमार दूसरे स्थान पर रहे थे। रोजगार की कमी, पानी की कमी और विवादित एनायम टर्मिनल प्रोजेक्ट यहां के मुख्य मुद्दे हैं।

5. कार्ति चिदंबरम बनाम एच राजा
इसबार तमिलनाडु की शिवगंगा सीट पर भी कड़े मुकाबले की उम्मीद है। क्योंकि यहां से कांग्रेस के अंदरखाने विरोध के बावजूद कार्ति चिंदबरम उम्मीदवार हैं जबकि भाजपा की तरफ से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एच राजा उम्मीदवार हैं। आईएनएक्स मीडिया मनी लांड्रिग केस में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे कार्ति 2014 में भी इस सीट से चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें एआईएडीएमके के उम्मीदवार ने करारी शिकस्त दी थी। बता दें कि इस सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम सात बार चुनाव जीत चुके हैं।

6. सदानंद गौड़ा बनाम कृष्णा बैरे गौड़ा

कर्नाटक की बेंगलुरु नॉर्थ से भाजपा ने इस बार फिर से केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा को टिकट दिया है। मोदी सरकार में सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे सदानंद गौड़ा की छवि एक साफ-सुथरे नेता के तौर पर रही है। वह साल 2014 में कांग्रेस के सी नारायण स्वामी को हराकर 2.29 लाख वोटों से जीते थे। लेकिन इस बार मुकाबला बेहद कड़ा होने की उम्मीद है। दरअसल पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और जेडीएस का गठबंधन बनने के बाद इस सीट का समीकरण बदल गया है। इस लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली दो विधानसभा सीटें हेब्बाल और दसाराहल्ली बीजेपी के हाथ से छिन चुकी हैं। भाजपा के पास सिर्फ मल्लेश्वरम विधानसभा सीट बची है। इसलिए इस बार गौड़ा को कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन उम्मीदवार कृष्णा बैरे गौड़ा से कड़ी टक्कर मिल सकती है।

7. निखिल कुमारस्वामी बनाम सुमलता अंबरीश

कर्नाटक की मांड्या लोकसभा सीट इस बार राज्य की सबसे चर्चित सीट है। वजह है राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के बेटे निखिल कुमारस्वामी इस सीट पर जेडीएस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला अभिनेत्री सुमलता अंबरीश से है जो निर्दलीय उम्मीदवार हैं जिन्हें भाजपा का समर्थन हासिल है। वह दिवंगत नेता एमएच अंबरीश की पत्नी हैं। बता दें कि भाजपा ने यहां अपना कोई भी उम्मीदवार नहीं उतारा है। 2014 में यहां से जेडीएस के सी. एस. पुट्टाराजू ने चुनाव जीता था।
8. तेजस्वी सूर्या बनाम बी के हरिप्रसाद

लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर भाजपा ने दक्षिण बेंगलुरु से 28 वर्षीय तेजस्वी सूर्या को अपना उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने यहां से सांसद रहे दिवंगत अनंत कुमार की पत्नी को टिकट नहीं दिया। अनंत कुमार 1996 के बाद से यहां रिकॉर्ड छह बार सांसद चुने गए थे। फिलहाल यहां सूर्या का मुकाबला कांग्रेस महासचिव बीके हरिप्रसाद से होगा। तेजस्वी सूर्या कर्नाटक हाईकोर्ट में वकील हैं। सूर्या ने बेंगलुरु के इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज से पढ़ाई की है।
9. मोहम्मद सलीम बनाम कन्हैयालाल अग्रवाल  बनाम देबाश्री चौधरी बनाम दीपा दासमुंशी

पश्चिम बंगाल की रायगंज लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। इस सीट पर इस बार चार उम्मीदवारों के बीच मुख्य मुकाबला है। ऐसा इसलिए क्योंकि चारों ही उम्मीदवार बेहद हाई प्रोफाइल हैं। सीपीएम उम्मीदवार मोहम्मद सलीम ने यहां 2014 में 317515 वोटों हासिल किए थे जबकि दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के उम्मीदवार ने 315881 वोट हासिल किए थे। उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे प्रियरंजन दास मुंशी की पत्नी दीपादास मुंशी को शिकस्त दी थी। बता दें कि कांग्रेस 1952 से अबतक इस सीट पर 13 बार जीत हासिल कर चुकी है। तृणमूल कांग्रेस ने यहां से कन्हैयालाल अग्रवाल को टिकट दिया है। वह पहले इस्लामपुर से कांग्रेस के विधायक थे। भाजपा ने यहां देबाश्री चौधरी को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस से दीपा दासमुंशी चुनावी मैदान में हैं।

10. सुशील कुमार शिंदे बनाम प्रकाश अम्बेडकर बनाम जयसिद्धेश्वर स्वामी

महाराष्ट्र की सोलापुर लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे हैं। उन्होंने कहा है कि यह उनका आखिरी चुनाव है। उनके मुख्य प्रतद्वंदी ‘वंचित बहुजन आघाड़ी’ के प्रकाश आंबेडकर और भाजपा की तरफ से लिंगायत समुदाय से चुने गए जयसिद्धेश्वर स्वामी हैं।

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