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1952 में हुआ था पहला आम चुनाव, 53 दलों ने लिया था भाग, 55% लोगों ने कांग्रेस को नहीं दिया था वोट

Lok Sabha Election Chunav: 1952 के चुनाव में कुल 45.7 प्रतिशत मतदान हुआ था। कांग्रेस ने 364 सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन पार्टी को 55 प्रतिशत लोगों ने वोट नहीं दिया था।

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Lok Sabha Election Chunav: 2019 का लोकसभा चुनाव आजाद भारत के इतिहास में सबसे बड़ा चुनाव होने जा रहा है क्योंकि पहली बार 90 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव आयोग ने 17वें आम चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। 11 अप्रैल से लेकर 19 मई तक सात चरण में चुनाव होंगे। 23 मई को नतीजों की घोषणा की जाएगी। आज हम आपको देश के पहले आम चुनाव की कुछ खास बातें बता रहे हैं। देश 1947 में आजाद हुआ और इसके पांच साल बाद देश में पहला आम चुनाव 1952 में हुआ। उस समय देश की साक्षरता दर 20 प्रतिशत ही थी। हालांकि, उस वक्त के लिए यह एक बड़ी बात थी कि इतनी ज्यादा संख्या में निरक्षरों ने अपना नेता चुनने के लिए वोट किया था। उस चुनाव में 53 राजनीतिक पार्टियों ने हिस्सा लिया था।

हालांकि, यह भारत का पहला चुनाव नहीं था क्योंकि वर्ष 1919 के मोंटेंग्यू -चेम्सफोर्ड रिफॉर्म के बाद सेंट्रल और प्रोविंसियल लेजिस्लेटिव बॉडी (प्रांतीय विधायी निकाय) के लिए कई चुनाव हो चुके थे। वर्ष 1920 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव बॉडी (केंद्रीय विधायी निकाय) के लिए पहला ‘आम चुनाव’ हुआ था। इसके बाद 1923, 1926, 1930, 1934 और 1945 में कई बड़े प्रांतीय चुनाव हुए, विशेष रूप से 1936-37 और 1946 में लेकिन यह चुनाव काफी कम लोगों तक ही सीमित रहा। वहीं, 1952 में ऐसा पहला चुनाव हुआ, जिसमें पूरे भारतीय समाज को शामिल किया गया।

1952 के चुनाव में कुल 45.7 प्रतिशत मतदान हुआ था। कांग्रेस ने 364 सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन पार्टी को 55 प्रतिशत लोगों ने वोट नहीं दिया था। सिर्फ 45 प्रतिशत ही कांग्रेस के पक्ष में मतदान हुआ था। इस चुनाव की अन्य बातों पर चर्चा करें तो इसमें कुल 53 पार्टियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें 22 पार्टी कम से कम एक सीट जीतने में कामयाब रही। इसमें सोशलिस्ट पार्टी को कुल 10.6 प्रतिशत वोट मिले और 12 सीटों पर जीत मिली। कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) ने मात्र 3.3 प्रतिशत वोट पाया और 16 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की। किसान मजदूर प्रजा पार्टी को 5.79 प्रतिशत वोट मिले और 9 सीटों पर जीत हासिल हुई। पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) 1.3 प्रतिशत वोट प्राप्त कर 7 सीट जीतने में कामयाब रही थी।

चुनाव में गणतंत्र परिषद ने 1 प्रतिशत से भी कम 0.91 फीसदी वोट प्राप्त किए और 6 सीटों पर जीत हासिल की थी। हिंदू महासभा को भी 0.95 प्रतिशत वोट मिले और 4 सीटों पर जीत मिली। इसी तरह शिरोमणि अकाली दल को 0.99 प्रतिशत वोट के साथ 4 सीटों पर जीत मिली। तमिलनाडु टॉयलर्स पार्टी ने 0.84 प्रतिशत वोट के साथ 4 सीटें प्राप्त की। अखिल भारतीय राम राज्य परिषद को 1.97 प्रतिशत वोट मिले, लेकिन जीत सिर्फ 3 सीटों पर ही हुई। भारतीय जनसंघ को 3.06 प्रतिशत वोट के साथ 3 सीटों पर जीत मिली। कॉमनवेल पार्टी को 0.31 प्रतिशत वोट मिले लेकिन जीत 3 सीटों पर हुई। झारखंड पार्टी को 0.71 प्रतिशत वोट के साथ 3 सीटों पर जीत मिली।

चुनाव में रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी को 3, लोक सेवक संघ को 2, पीजेंट एंड वर्क्स पार्टी ऑफ इंडिया को 2, शिड्यूल कास्ट फेडरेशन को 2, टीटीएनसीपी को 1, मद्रास स्टेट मुस्लिम लीग पार्टी को 1, छोटा नागपुर संथाल परगना जनता पार्टी को 1, कृषिकर लोक पार्टी को 1 और फॉरवर्ड ब्लॉक (मॉर्कसिस्ट) को 1 सीट पर जीत मिली थी। 37 सीटें निर्दलीय के खाते में गई थी।

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