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2019 चुनाव: हालिया सर्वे जैसे आए नतीजे तो नरेंद्र मोदी के ल‍िए हो सकते हैं ये व‍िकल्‍प

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सर्वे में भाजपा और एनडीए का आंकड़ा घटता जा रहा है, जबकि यूपीए और गैर कांग्रेसी, गैर भाजपाई दलों का भी आंकड़ा बढ़ता दिख रहा है।

Author January 10, 2019 4:24 PM
अगर 2019 में एनडीए को बहुमत नहीं मिला तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या करेंगे और उनकी पार्टी में क्या भूमिका होगी? (फोटो-PTI)

2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर हाल के दिनों में कई सर्वे हुए हैं। लगभग सभी सर्वे में केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा को निराश करने वाले परिणाम दिखाए गए हैं। खासकर तीन हिन्दी पट्टी राज्यों में भाजपा की हार के बाद से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा अब 2014 जैसा ऐतिहासिक प्रदर्शन नहीं कर पाएगी। इंडिया टीवी-सीएनएएक्स ओपिनियन पोल के अनुसार, भाजपा लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाएगी। एनडीए का कुल आंकड़ा 257 तक पहुंच सकता है, जो बहुमत (272) के आंकड़े से 15 कम है। ये सर्वे 15 से 20 दिसंबर के बीच किए गए थे। हालांकि, नवंबर में किए गए सर्वे में एनडीए को 281 सीटों के साथ बहुमत मिलते हुए दिखाया गया था। यानी जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे भाजपा और एनडीए का आंकड़ा घटता जा रहा है, जबकि यूपीए और गैर कांग्रेसी, गैर भाजपाई दलों का भी आंकड़ा बढ़ता दिख रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर 2019 में एनडीए को बहुमत नहीं मिला तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या करेंगे और उनकी पार्टी में क्या भूमिका होगी?

फिर हो सकते हैं गठबंधन के सरदार: जैसा कि हालिया सर्वे में दिखाया गया है कि एनडीए बहुमत के आंकड़े (272) से 15 सीटों से दूर है तो ऐसी स्थिति में पीएम मोदी के चहेते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बड़े दल और गठबंधन का नेता होने के नाते उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। तब नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी 15 सांसदों का जुगाड़ बड़ी आसानी से कर सकते हैं। इसमें ओडिशा की सत्ताधारी बीजू जनता दल (बीजेडी) के मुखिया नवीन पटनायक और तेलंगाना की सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के मुखिया केसीआर यानी के चंद्रशेखर राव मोदी के लिए संकटमोचक साबित हो सकते हैं। बता दें कि अमित शाह कई राज्यों में जोड़-तोड़ कर भाजपा या गठबंधन की सरकार बनवा चुके हैं और वो मौजूदा राजनीति के चाणक्य कहलाते हैं।

नितिन गडकरी या राजनाथ को विरासत: दूसरी स्थिति यह हो सकती है कि अगर भाजपा सबसे बड़ा दल (150-200 सीट) हो और एनडीए बहुमत के आंकड़े से करीब 50 सीटों से दूर हो तब संभवत: नरेंद्र मोदी पर पीएम पद छोड़ने का दबाव बढ़ जाय। यह दबाव आरएसएस और सहयोगी दलों की तरफ से हो सकता है। या कुछ नए दल जो गठबंधन में शामिल होकर सरकार बनाना चाहते हैं, वो इसकी मांग कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में राजनाथ सिंह या नितिन गडकरी पीएम बन सकते हैं। हाल के दिनों में नितिन गडकरी को लेकर कई तरह की खबरें आई हैं। गडकरी संघ की पसंद भी बताए जाते हैं। इस सूरत में नरेंद्र मोदी और अमित शाह रिमोट कंट्रोल से सरकार चला सकते हैं।

नेता विपक्ष की भूमिका: चूंकि सर्वे में किसी भी गठबंधन को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है, तब संभावना ऐसी भी बनती है कि 1996 जैसे हालात बनें और एचडी देवगौड़ा की तरह ममता बनर्जी या चंद्रबाबू नायडू या फिर शरद पवार प्रधानमंत्री बन जाएं और कांग्रेस उनकी सरकार को बाहर से समर्थन करे। हालांकि, ऐसी सरकारों के दिन लंबे नहीं रहे हैं और देवगौड़ा, गुजराल, वीपी सिंह, चंद्रशेखर, चौधरी चरण सिंह, मोरराजी देसाई की सरकारें कम समय में ही गिर चुकी हैं। खासकर कांग्रेस का रिकॉर्ड ऐसी गठबंधन सरकारों के प्रति खराब रहा है। तब मध्यावधि चुनाव होने पर फिर से कांग्रेस और भाजपा के बीच लड़ाई हो सकती है और तब तक नरेंद्र मोदी बतौर नेता विपक्ष की भूमिका में रहते हुए संगठन को और मजबूत बना सकते हैं।

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