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नरेंद्र मोदी के पुराने दोस्त प्रवीण तोगड़िया बनारस से लड़ सकते हैं चुनाव, बाकी 79 सीटों पर भी उतारेंगे उम्‍मीदवार

प्रवीण तोगड़िया और नरेंद्र मोदी के बीच 1980 के दशक में गहरी दोस्ती थी। दोनों ने गुजरात में भाजपा की सरकार बनाने में कड़ी मेहनत की थी। इनकी मेहनत और पार्टी के अन्य नेताओं की कोशिश की बदौलत गुजरात में 1990, 1995 और 1998 में सत्ता मिली ।

Author February 22, 2019 9:41 AM
विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व नेता प्रवीण तोगड़िया। (फोटो- PTI)

विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व नेता प्रवीण तोगड़िया ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी हिन्दुस्तान निर्माण दल उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और वह खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से मैदान में उतर सकते हैं। तोगड़िया ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि आने वाले लोकसभा चुनाव में उनका ”हिन्दुस्थान निर्माण दल” प्रदेश की अस्सी सीटों सहित पूरे देश में चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें वाराणसी, मथुरा और अयोध्या से चुनाव लड़ने का आमंत्रण मिला है। यह भी हो सकता है कि वह प्रधानमंत्री के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से चुनाव मैदान में उतरें।

तोगड़िया ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव के बाद अगर उनकी पार्टी सत्ता में आयी तो एक हफ्ते के अंदर अध्यादेश लाकर अयोध्या में राम मंदिर बनाया जाएगा और पांच साल तक सीमा पर एक भी सैनिक को शहीद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा और कहा कि उनके लगभग पांच साल के कार्यकाल में सीमा पर कई सैनिक शहीद हुए। उन्होंने कहा कि हम सत्ता में आये तो पत्थरबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश देंगे। तोगड़िया ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान और अलगाववादियों के प्रति मोदी सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण ही सीमा पर सैनिक शहीद हो रहे हैं।

बता दें कि प्रवीण तोगड़िया और नरेंद्र मोदी के बीच 1980 के दशक में गहरी दोस्ती थी। दोनों ने गुजरात में भाजपा की सरकार बनाने में कड़ी मेहनत की थी। इनकी मेहनत और पार्टी के अन्य नेताओं की कोशिश की बदौलत गुजरात में 1990, 1995 और 1998 में सत्ता मिली । इस दौरान सरकार में भी दोनों नेताओं की खूब चली लेकिन जब 2002 में मोदी मुख्यमंत्री बने तब तोगड़िया हाशिए पर चले गए। करीब दो दशक से लंबी दोस्ती में दरार आ गई। अब तोगड़िया मोदी को हराने का एक भी मौका नहीं छोड़ना चाह रहे। कहा जाता है कि दोनों दोस्तों का लक्ष्य प्रधानमंत्री बनना था। इस लक्ष्य में मोदी तो सफल हो गए पर तोगड़िया पीछे रह गए।

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