ताज़ा खबर
 

गैर आरक्षित मतदाता तय करेंगे दिल्ली की एकमात्र आरक्षित सीट का भविष्य

आरक्षित मतदाताओं की सबसे अधिक संख्या नरेला, सुल्तानपुरी व मंगोलपुरी विधानसभा क्षेत्रों में है। इस सीट को लेकर भाजपा में शुरुआत से ही घमासान चल रहा है। इस घमासान की पहली वजह सीट पर वर्तमान सांसद का टिकट काटना रहा है।

प्रतीकात्मक फोटो (फोटो सोर्स : इंडियन एक्सप्रेस)

पंकज रोहिला 

आरक्षित सीट के भाग्य का फैसला जाट-मुसलिम व ओबीसी मतदाता करेंगे। ये समीकरण उत्तर पश्चिम दिल्ली की संसदीय सीट पर सामने आ रहे हैं। जातिगत समीकरणों पर इस सीट पर जाट, मुसलिम व ओबीसी मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। इस आरक्षित सीट पर त्रिकोणीय लड़ाई है। भाजपा ने इस सीट से स्टार व सूफी गायक हंसराज हंस को मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने इस सीट पर राजेश लिलोठिया व आम आदमी पार्टी (आप) ने गूगन सिंह रंगा को मैदान में उतारा है। इन जातिगत समीकरणों को साधना ही इन दलों के लिए कड़ी चुनौती होगी।

आरक्षित मतदाताओं की सबसे अधिक संख्या नरेला, सुल्तानपुरी व मंगोलपुरी विधानसभा क्षेत्रों में है। इस सीट को लेकर भाजपा में शुरुआत से ही घमासान चल रहा है। इस घमासान की पहली वजह सीट पर वर्तमान सांसद का टिकट काटना रहा है। पार्टी ने इस सीट पर सांसद उदित राज का टिकट काटा और उसकी जगह पर सूफी गायक हंसराज हंस को टिकट दिया है। इनके लिए यह नई सीट है। इसलिए यहां पर केवल पार्टी कैडर ही चुनाव लड़ रहे हैं और पूरा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर हो रहा है। हालांकि इनकी स्टार भूमिका की वजह से इनकी सभाओं में भीड़ भी खूब आ रही है। इस सीट पर परिवर्तन की वजह से जाटों की नाराजगी बताई जा रही है।

जानकार बताते हैं कि यह ग्रामीण क्षेत्र बहुल सीट है और ग्रामीण इलाकों के मतदान का असर भी इस चुनाव में साफ देखने को मिलेगा। वहीं इस सीट पर कांगे्रस से प्रत्याशी राजेश लिलोठिया को बनाया गया है। वे बतौर विधायक अपनी भूमिका अदा चुके हैं और पार्टी में बतौर कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष हैं। वे कांग्रेस के 15 सालों के कामकाज और भाजपा सरकार के विफलताओं के आधार पर वोट मांग रहे हैं। इस सीट से ‘आप’ ने गूगन सिंह को मैदान में उतारा है। गूगन सिंह ने इस अपने प्रचार के दौरान ‘आप’ की ओर से दिल्ली में किए गए कामों के आधार पर वोट मांगा जा रहा है। इससे पूर्व सीट के लिए पार्टी ने विधायक व विधानसभा उपाध्यक्ष राखी बिडलान को अपना टिकट दिया था। चेहरा बदलने के बाद समर्थकों को वोट में बदलना ही सीट पर प्रत्याशियों के लिए बड़ी चुनौती है।

‘आप’ का वोट बैंक भी कम नहीं
2009 में इस सीट से सांसद कृष्णा तीरथ बनी थीं। वर्तमान में इस सीट से सांसद उदित राज हैं। इस सीट पर भाजपा ने 2014 के चुनाव में 46.45 फीसद मत प्राप्त किए थे और जीत दर्ज थी, जबकि दूसरे नंबर पर ‘आप’ प्रत्याशी राखी बिड़लान थीं, उन्हें 38.57 फीसद वोट मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णा तीरथ को 11.61 मत मिले। इस सीट पर 0.65 फीसद मत नोटा को भी प्राप्त हुए थे।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 Lok Sabha Elections 2019: मतदान आज, यहां कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
2 कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट: बाहरी उम्मीदवारों का रणक्षेत्र
3 Lok Sabha Election: राहुल गांधी के नाम पर कांग्रेसी से भिड़े जेडीयू प्रवक्ता- नीतीश कुमार कुर्मी हैं और रहेंगे, पर मुसलमान ब्राह्मण कैसे बन गया?
ये पढ़ा क्या?
X