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पौड़ी गढ़वाल का हाल: बीजेपी सांसद का बेटा हो सकता है कांग्रेस उम्मीदवार, पिता ने किया लड़ने से इनकार, अजीत डोवाल का बेटा दावेदार

मनीष खंडूरी के पार्टी में शामिल होने की चर्चा शनिवार (16 मार्च, 2019) को देहरादून में कांग्रेस की रैली के दौरान हुई, जहां पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनका स्वागत किया।

देहरादून में एक रैली के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और मनीष खंडूरी (बीच में)

उत्तराखंड की पांच लोकसभा सीटों के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम का ऐलान होना अभी बाकी है, मगर राज्य की पौड़ी गढ़वाल सीट से मनीष खंडूरी कांग्रेस उम्मीदवार हो सकते हैं। खंडूरी वरिष्ठ भाजपा नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रिटायर्ड) बीसी खंडूरी के बेटे हैं। वर्तमान में उनके पिता ही भाजपा सांसद के रूप में पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र का नेतृत्व कर रहे हैं, जो खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पहले ही आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर चुके हैं।

दरअसल मनीष खंडूरी के पार्टी में शामिल होने की चर्चा शनिवार (16 मार्च, 2019) को देहरादून में कांग्रेस की रैली के दौरान हुई, जहां पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनका स्वागत किया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस में शामिल होने वाले मनीष केवल तभी गेम चेंजर साबित हो सकते हैं, जब उनके पिता सीनियर खंडूरी लोकसभा चुनाव में खुद अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार करें। वर्तमान में कांग्रेस उत्तखंड में बहुत मजबूत स्थिति में नहीं है और मनीष खंडूरी का भी उत्तराखंड में बहुत कम राजनीतिक जन आधार है।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, ‘यह निश्चित रूप से हमारे (कांग्रेस) लिए मनोबल बढ़ाने वाला है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता का बेटा पार्टी में शामिल हो गया। मगर मतदान के लिए एक महीने (11 अप्रैल) से भी कम समय बचा है। अगर मनीष पौड़ी से चुनावी मैदान में उतारे जाते हैं तो उनके पास चुनाव प्रचार के लिए बहुत कम समय होगा।

बता दें कि पौढ़ी लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ रही है। यहां पूर्व सैनिकों और सशस्त्र बलों के जवानों की बड़ी आबादी भाजपा का वोट बैंक है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल सभी पौढ़ी गढ़वाल के ही हैं।

सीनियर खंडूरी ने 2004 और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए यह सीट जीती थी। 2003-04 के बीच वह केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री रहे। इसके अलावा 2007 और 2012 में भाजपा विधायक भी रहे और मार्च 2017 से जून 2009 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। सितंबर 2011 से मार्च 2012 तक भी राज्य की कमान उन्हीं के हाथों में रही।

उत्तराखंड के भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट और राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शुक्रवार को दिल्ली में खंडूरी के आवास पर मुलाकात की। दोनों नेताओं ने इस बार भी उनसे पौढ़ी गढ़वाल से लोकसभा चुनाव लड़ने की अनुरोध किया मगर उन्होंने इनकार कर दिया।

हालांकि सीनियर खंडूरी को लेकर ही भाजपा चुनावी मैदान में नहीं है। पौढ़ी सीट के लिए डोवाल का बेटे शौर्य डोवाल का नाम भी चर्चा में है। शौर्य एक साल से भी अधिक समय से बेमिसाल गढ़वाल अभियान चला रहे हैं। इसके अलावा कर्नल (रिटायर्ड) अजय कोठियाल, जिन्हें केदारनाथ के पुनर्निर्माण का श्रेय दिया जाता है। उत्तराखंड के पूर्व भाजपा अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत और रियर एडमिरल (रिटायर्ड) ओपीएस राणा भी सीट के दावेदारों में से एक हैं।

भाजपा के सूत्रों से पता चला है कि हालांकि इनमें कोई भी पौढ़ी गढ़वाल में खंडूरी की लोकप्रियता के बराबर नहीं बैठता। यही वजह है कि मनीष खंडूरी के भाजपा में जाने के फैसले ने भाजपा को मुश्किल में डाल दिया है। इसके अलावा कई पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया में अपनी असहमति तक दर्ज कराई है।

मगर एक भाजपा नेता ने बताया कि सीनियर खंडूरी ने आश्वस्त किया है कि वो चुनाव में अपने बेटे के लिए प्रचार नहीं करेंगे और भाजपा के साथ खड़े रहेंगे। एक अन्य भाजपा नेता बताया कि अगर खूंडरी पौढ़ी में बेटे के लिए प्रचार करते हैं तो यह भाजपा के लिए नुकसानदेह हो सकता है। दूसरी तरफ भाजपा के लिए चिंता की बात यह भी है कि देहरादून में एक रैली को संबोधित करते हुए मनीष खंडूरी ने कहा था कि कांग्रेस में शामिल होने के लिए उनके निर्णय पर पिता का आशीर्वाद मिला था।

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