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Lok Sabha Elections 2019: क्यों टिकट कटने पर भी बीजेपी में रहने के लिए मजबूर हुए उदित राज, ये है अंदर की कहानी

Lok Sabha Elections 2019: बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने भले ही कुछ वक्त पहले ही उदित को टिकट न देने का फैसला लिया हो, लेकिन यह सावधानी पूर्वक सुनिश्चित किया गया कि दलित नेता नामांकन प्रक्रिया से पहले खेमा न बदल सकें।

वरिष्ठ भाजपा नेता उदित राज। (इंडियन एक्सप्रेस फोटो)

Lok Sabha Elections 2019: बीजेपी ने नॉर्थ वेस्ट दिल्ली सीट से अपने वर्तमान सांसद उदित राज का टिकट काटते हुए हंसराज हंस को उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी के दलित चेहरे माने जाने वाले उदित राज ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल उन्होंने कोई फैसला नहीं लिया है। इंडियन जस्टिस पार्टी के संस्थापक उदित राज ने 2014 में बीजेपी जॉइन की थी। बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने भले ही कुछ वक्त पहले ही उदित को टिकट न देने का फैसला लिया हो, लेकिन यह सावधानी पूर्वक सुनिश्चित किया गया कि दलित नेता नामांकन प्रक्रिया से पहले खेमा न बदल सकें। अगर कोई दूसरी पार्टी उन्हें मैदान में उतारती तो 12 मई को होने वाले मतदान में बीजेपी की संभावनाओं पर बुरा असर पड़ सकता था।

इसी वजह से मंगलवार दोपहर तक बीजेपी की ओर से इस बात का ऐलान नहीं किया गया कि इस सीट से कौन उतारा जा रहा है। पार्टी ने दिल्ली की बाकी सभी सीटों का ऐलान एक दिन पहले तक कर दिया था। उम्मीदवार का ऐलान न होने की वजह से उदित भी बेचैन दिखे। उन्होंने टि्वटर पर धमकी भी दी कि अगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो वह पार्टी छोड़ देंगे। टिकट कटने पर उदित राज भी शायद यह समझ गए कि उनके साथ खेल हो चुका है। ऐसे में उन्होंने कहा, ‘मैं इतना लालची नहीं हूं कि मैं इतनी जल्दी खेमा बदल देता। मैं एक अनुशासित सिपाही हूं। हालांकि, मुझे यह लगता है कि टिकट के ऐलान में देरी इसलिए की गई ताकि मैं कोई दूसरी पार्टी न जॉइन कर सकूं।’

उदित राज के खेमे के सूत्रों ने बताया कि दलित नेता ने सोमवार से ही विद्रोही रवैया अपना लिया था। उन्हें पार्टी के तीन शीर्ष नेताओं की ओर से कॉल आए कि आखिरी निर्णय तक वह ‘धैर्य’ बनाएं रखें। हालांकि, बीजेपी के अंदरखाने के लोगों का कहना है कि पार्टी ने यह फैसले हफ्तों पहले ले लिया था। ऐसा इसलिए क्योंकि आरएसएस उदित के कुछ बयानों को लेकर खुश नहीं था। संगठन को लगता था कि ये बयान पार्टी या संघ की लाइन के मुताबिक नहीं हैं। उदित कई मौके पर पार्टी के स्टैंड के खिलाफ अपने विचार रखते रहे हैं। सबरीमाला मुद्दा और दलित संगठनों की ओर से भारत बंद के आह्वान के मामले में भी वे ऐसा कर चुके थे। पार्टी के सूत्रों का कहना है, ‘उन्होंने पार्टी जॉइन की, लेकिन वह कभी हमारे नहीं रहे। वह बीजेपी से टिकट की उम्मीद कर रहे थे ताकि उन्हें मोदी के नाम पर वोट मिले सके…वहीं दूसरी ओर वह पार्टी की आधिकारिक लाइन के खिलाफ बयान दिए जा रहे थे।’

सूत्रों का कहना है कि उदित राज कांग्रेस और आम आदमी पार्टी, दोनों के संपर्क में थे। हालांकि, उन्होंने पाला नहीं बदला क्योंकि दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने उन्हें टिकट का आश्वासन दिया था। उदित राज ने जब एक केंद्र के नेता को कॉल किया तो बताया गया कि उनकी सीट की सर्वे रिपोर्ट उनके खिलाफ है। उदित राज ने कहा, ‘बीजेपी के इंटरनल सर्वे के मुताबिक, मैं बेस्ट परफॉर्मर हूं। किसी ने टिकट न दिए जाने के बारे में नहीं बताया। अगर मोदी और शाह के प्रति मेरा विश्वास था तो उन्हें मुझे बताना चाहिए था कि मुझे टिकट नहीं मिलेगा। मैंने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है। मोदी में भरोसा दिखाते हुए मैंने अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया था। मुझे क्यों सजा दी जा रही है?’

उदित राज ने अन्य बीजेपी नेताओं की तरह ही अपने टि्वटर हैंडल में ‘चौकीदार’ शब्द जोड़ा था। हालांकि, मंगलवार को उन्होंने पहले इसे हटा दिया जो बाद में वापस आ गया। इस बारे में एक सूत्र ने बताया, ‘नाम से चौकीदार हटाना एक रुख जाहिर करने का तरीका था। हालांकि, जब यह साफ हो गया कि टिकट नहीं मिल रहा तो ऐसा लगता है कि उन्हें लगा कि लंबा गेम खेलने में ही भलाई है। खास तौर पर तब जब अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।’

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