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केवल यूपी में चुनावी ड्यूटी पर थे बीजेपी के 40 लाख लोग, दिल्‍ली के बूथ पर आप, कांग्रेस के पोलिंग एजेंट तक नदारद

पत्रकार ने बताया कि दिल्ली में जिस बूथ पर उन्होंने वोट डाला, वहां पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का एक भी कार्यकर्ता मौजूद नहीं था और सिर्फ भाजपा के ही कार्यकर्ता बूथ पर मिले।

पीएम मोदी एवं अमित शाह। (REUTERS)

17वीं लोकसभा के लिए सात चरणों में मतदान संपन्न हो चुका है और अब 23 मई को नतीजों का इंतजार है। लेकिन नतीजों से पहले जो एक्टिज पोल के नतीजे सामने आए हैं, उन्हें देखकर लगता है कि एनडीए सरकार फिर से सत्ता में वापसी करने जा रही है और प्रधानमंत्री मोदी अगले 5 साल के लिए फिर देश की बागडोर संभालने वाले हैं। हालांकि भाजपा की इस संभावित जीत के पीछे जहां मोदी फैक्टर को बड़ी वजह माना जा रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी की धनबल की ताकत और मेहनत को भी काफी अहम माना जा रहा है। टीवी चैनल एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में एक्जिट पोल और उनके नतीजों को लेकर कार्यक्रम का प्रसारण हुआ है।

इस कार्यक्रम के दौरान पैनलिस्ट रेवती लाल ने दावा किया कि अकेले उत्तर प्रदेश में भाजपा के 40 लाख लोग काम कर रहे थे। रेवती लाल ने बताया कि खुद भाजपा के लोगों ने उन्हें यह जानकारी दी है कि राज्य के हर बूथ पर भाजपा के 21 लोग काम कर रहे थे। वहीं एनडीटीवी के पत्रकार ओनिंदयो चक्रवती ने भी रेवती लाल की उपरोक्त बात का समर्थन किया और बताया कि दिल्ली में जिस बूथ पर उन्होंने वोट डाला, वहां पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का एक भी कार्यकर्ता मौजूद नहीं था और सिर्फ भाजपा के ही कार्यकर्ता बूथ पर मिले।

धनबल और कार्यकर्ताओं की बात करें तो भाजपा ने मौजूदा लोकसभा चुनावों में इस मामले में अन्य राजनैतिक पार्टियों को काफी पीछे छोड़ दिया। इलेक्शन थिंक टैंक संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017-18 में देश की 7 बड़ी राजनैतिक पार्टियों ने अपनी कुल आय 1,397 करोड़ रुपए बतायी थी। इसमें से भाजपा पार्टी को ही अकेले 1027 करोड़ रुपए की फंडिंग हुई थी। इसमें से 989 करोड़ रुपए भाजपा को सिर्फ डोनेशन के रुप में मिले थे। बिजनेस टुडे की एक खबर के अनुसार, चुनावी खर्च के मामले में भाजपा ने अकेले फेसबुक, गूगल पर विज्ञापन में ही 25 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए। ऐसे में चुनाव प्रचार पर कुल खर्च के बारे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर 5 करोड़ रुपए से भी कम खर्च किए। कार्यकर्ताओं के मामले में भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी है। भाजपा के 10 करोड़ से भी ज्यादा सदस्य हैं। बता दें कि लोकसभा चुनाव के नतीजे 23 मई को घोषित किए जाएंगे।

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