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विखे पाटिल: राजीव गांधी ने हरवा दिया था चुनाव, 66 साल में शिवसेना के टिकट पर पहुंचे संसद, अटलजी ने बनाया था मंत्री

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि उनके दिवंगत पिता पर शरद पवार का बयान ‘‘अनुचित’’ है।

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Lok Sabha Election 2019: महाराष्ट्र कांग्रेस के बड़े नेता और विधान सभा में नेता विपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटील के बेटे सुजय पाटील ने दो दिन पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। इस वजह से राधाकृष्ण विखे पाटील पर इस्तीफे का दबाव उनके विरोधियों ने बढ़ा दिया है। इस बीच एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने एक बयान देकर पाटील की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पवार के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1991 के लोक सभा चुनाव में राधाकृष्ण विखे पाटील के पिता बालासाहेब विखे पाटिल को चुनाव में हराने को कहा था। बता दें कि राधाकृष्ण विखे पाटील के पिता बालासाहेब विखे पाटील जीवन भर कांग्रेसी रहे मगर 1998 में शिव सेना के टिकट पर चुनाव लड़ा था और संसद पहुंचे थे।

1999 में उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त राज्य मंत्री बनाया गया था। 2004 में जब केंद्र में यूपीए की सरकार बनी, तब पाटील फिर से कांग्रेस में लौट आए। तब मनमोहन सिंह की सरकार में उन्हें भारी उद्योग मंत्री बनाया गया। 2016 में 84 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। बालासाहेब कॉपरेटिव मूवमेंट के बड़े किसान नेता थे। पाटील पाचवीं, छठी, सातवीं, आठवीं, नौवीं, 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा के सदस्य रहे हैं। उन्होंने अहमदनगर से प्रतिनिधित्व किया है।

बालासाहेब विखे पाटिल 1971 में पहली बार बतौर कांग्रेस सांसद संसद पहुंचे थे लेकिन लगातार चुनाव जीतने वाले पाटील 1991 में चुनाव नहीं जीत सके। शरद पवार ने बताया कि किस तरह से उन्होंने बालासाहेब विखे पाटिल की हार सुनिश्चित की थी। उन्हें यह भी याद है कि दिवंगत कांग्रेस नेता ने इसे लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया था। कहा जाता है कि विखे पाटिल ने तब कांग्रेस के खिलाफ बगावत छेड़ दी थी और 1991 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था।

इस बीच महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि उनके दिवंगत पिता पर शरद पवार का बयान ‘‘अनुचित’’ है। इधर, एनसीपी प्रदेश इकाई के प्रमुख जयंत पाटिल ने कहा, ‘‘बालासाहेब विखे-पाटिल के अपमान का कोई सवाल नहीं है। उस वक्त के लोकसभा चुनाव के दौरान वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में खड़े हुए थे। उस वक्त राजीव गांधी जी ने उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार यशवंतराव गडाख की जीत सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी थी, जो उन्होंने की। 30 साल पहले जो हुआ था, अभी पवार साहब ने सिर्फ वही कहा।’’

माना जा रहा है कि अहमदनगर सीट कांग्रेस-एनसीपी के बीच सीट बंटवारे में एनसीपी के खाते में गई है, जबकि सुजय विखे पाटील यहां से चुनाव लड़ना चाहते थे। ऐसे में सुजय विखे पाटील ने भाजपा का दामन थाम कर अपने इरादे जता दिए हैं। वो अपने दादा की कर्मभूमि के अपना चुनावी अखाड़ा बनाना चाहते हैं।

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