ताज़ा खबर
 

आसान नहीं है प्रणब के बेटे अभिजित की राह

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के मिलने वाले वोटों में 20 फीसद से ज्यादा की गिरावट आई थी और अभिजित लगभग आठ हजार वोटों से चुनाव जीते। वर्ष 2009 और 2012 में यहां कोई उम्मीदवार नहीं देने वाली तृणमूल कांग्रेस 2014 में तीसरे स्थान पर रही।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

प्रभाकर मणि तिवारी

मुर्शिदाबाद जिले की जंगीपुर संसदीय सीट पर जीत की तिकड़ी बनाने के लिए मैदान में उतरे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पुत्र अभिजित मुखर्जी की राह अबकी पथरीली है। वर्ष 2009 में 1.28 लाख वोटों के अंतर से यह सीट चुनाव जीतने वाले प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति बनने की वजह से वर्ष 2012 में इस सीट से इस्तीफा दे दिया था। उस साल हुए उपचुनावों में प्रणब के पुत्र अभिजित कांग्रेस के टिकट पर जीत तो गए, अंतर ढाई हजार वोटों का रहा। महज तीन साल में कांग्रेस के वोटों का आंकड़ा भी 15 फीसदी घट गया। पारंपरिक रूप से यह सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। लेकिन यहां उसकी हालत लगातार कमजोर हो रही है।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के मिलने वाले वोटों में 20 फीसद से ज्यादा की गिरावट आई थी और अभिजित लगभग आठ हजार वोटों से चुनाव जीते। वर्ष 2009 और 2012 में यहां कोई उम्मीदवार नहीं देने वाली तृणमूल कांग्रेस 2014 में तीसरे स्थान पर रही। उसे 18.54 फीसद वोट मिले थे। यहां माकपा के वोटों में भी लगभग 7.45 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2009 के चुनावों में यहां 2.33 फीसदी वोट पाने वाली भाजपा के वोट बढ़ कर 8.65 फीसद तक पहुंच गए। अबकी अभिजित यहां तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के साथ तिकोनी लड़ाई में फंसे हैं।

भगीरथी नदी के तट पर इस शहर को मुगल सम्राट जहांगीर ने बसाया था। ब्रिटिश शासनकाल के शुरुआती दौर में यह जंगीपुर सिल्क के कारोबार और ईस्ट इंडिया कंपनी के वाणिज्यिक आवास का केंद्र था। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का चुनाव क्षेत्र होने से किसी दौर में मुर्शिदाबाद जिले की जंगीपुर सीट ने सुर्खियां बटोरी थीं। बंगाल में लोकसभा की 23 सीटों पर जीत के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरी भाजपा ने मुर्शिदाबाद जिले की जंगीपुर सीट पर माफूजा खातून को उम्मीदवार बनाया है। वे पार्टी की पहली अल्पसंख्यक महिला उम्मीदवार हैं।

माफूजा दो बार भाकपा विधायक रही हैं। बंगाल में भाजपा की पहली और अकेली मुसलिम महिला उम्मीदवार माफूजा अबकी अपनी जीत का दावा कर रही हैं। जंगीपुर में भाजपा का असर बीते कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। 79 फीसद साक्षरता दर वाले जंगीपुर में खेती ही लोगों की रोजी-रोटी का मुख्य जरिया है। बीड़ी, चावल, आम, जूट जैसी वस्तुओं का कारोबार होता है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, जंगीपुर की आबादी में 67 फीसद अल्पसंख्यक हैं। इसको ध्यान में रखते हुए ही कांग्रेस के अलावा बाकी दलों के उम्मीदवार अल्पसंख्यक तबके से हैं। तृणमूल ने यहां खलीलुर रहमान को मैदान में उतारा है और माकपा ने जुल्फिकार अली को।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 सीधी टक्कर से और दिलचस्प होगा दिल्ली का दंगल
2 दिल्ली मेरी दिल्ली: समर्थन की दरकार और गठबंधन का डर
3 राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के गृह जनपद के लोग चुनते हैं चार-चार सांसद, जानिए- ऐसा क्यों?
कोरोना टीकाकरण
X