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इंतजार करती रह गई पोलिंग पार्टी, ‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ कह आधा दर्जन बूथों पर मतदान का बहिष्कार

Lok Sabha Election 2019: बांका लोकसभा क्षेत्र के अमरपुर विधानसभा के रामचुआ गांव के दो बूथों पर दो उम्मीदवार समर्थक आपस में ही भिड़ गए और मामला हिंसक हो गया। झड़प के दौरान बीच बचाव करने गई पुलिस पर भी लोगों ने पथराव कर दिया।

बिहार के भागलपुर संसदीय सीट के साधोपुर गांव में मतदान का बहिष्कार करते ग्रामीण। (फोटो- गिरधारी लाल जोशी)

Lok Sabha Election 2019: दूसरे चरण के मतदान में भागलपुर और बांका संसदीय क्षेत्र में चुनाव तो शांतिपूर्ण निपट गया मगर ग्रामीण मतदाताओं ने कई बूथों पर “रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा लगाते हुए मतदान का बहिष्कार कर दिया। जनसत्ता संवावदाता भागलपुर संसदीय सीट के साधोपुर गांव में दोपहर तीन बजे तक मौजूद थे, तब तक वहां एक भी वोट नहीं डाला गया था। बूथ पर मतदान अधिकारी मतदाताओं की बाट जोहते रह गए। साधोपुर गांव इस संसदीय क्षेत्र के गोपालपुर विधानसभा के तहत पड़ता है जो नौगछिया अनुमंडल से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर है। इस गांव तक जाने के लिए एनएच 31 से सटे नौगछिया जाने का रास्ता पकड़ना पड़ता है। गांव में प्रवेश करते ही नाके पर हवा में लहराता बैनर रस्सी के सहारे टंगा था, जिसमें लिखा था, ‘रोड नहीं तो वोट नहीं।’

गांव के कस्तूरी मंगल टोला के प्राथमिक विद्यालय में बने मतदान केंद्र संख्या 110 के पीठासीन अधिकारी शशिकांत मंडल ने बताया कि यहां कुल 960 वोटर हैं जिनमें 500 पुरुष और 460 महिलाएं हैं। मगर वोट डालने एक भी मतदाता नहीं आया। यही हाल बूथ संख्या 111 और 112 का भी था। ये दोनों बूथ इसी गांव के नयाटोला स्कूल में बना है। गांव का कोई नौजवान पोलिंग एजेंट भी नहीं बना था। पड़ोसी गांव बनिया में भी लोगों ने बूथ संख्या 132, 133, 134 पर रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ मतदान का बहिष्कार किया। इन तीनों बूथों पर साढ़े तीन हजार वोट हैं। गांव के अमरेंद्र मंडल बताते हैं कि गांव पूरी तरह सियासी और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। एनएच 31 तक जाने के लिए कच्ची सड़क है। गांव में पीने का पानी भी मयस्सर नहीं है। बिजली के तार इस कदर सड़क पर लटके पड़े हैं कि हादसे का खतरा मंडराता रहता है।

यह गांव यादव और गंगोता जाति बाहुल्य है मगर यहां मुखिया रह चुके डा. सलीम हुसैन बताते हैं कि यह सड़क 2007 में ही प्रधानमंत्री योजना में स्वीकृत हुई थी। मगर बारह साल बाद भी नहीं बनी। आलाधिकारियों ने भी कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई। गांव के लोग विधायक और सांसद से नाराज हैं। यहां से विधायक जदयू के गोपाल मंडल हैं और सांसद राजद के शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल हैं। ग्रामीणों के मुताबिक जीतने के बाद ये कभी दोबारा नहीं आए। विरोध की वजह से इस बार तो वोट मांगने भी नहीं आए। बांका संसदीय इलाके के अमरपुर विधानसभा के धिमडा गांव का भी यही हाल है। बूथ संख्या 149 पर मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया। यहां भी मुद्दा रोड नहीं तो वोट नहीं ही है। यहां कुल 1293 मतदाता हैं। किसी ने भी सड़क बनवाने की मांग को लेकर मतदान नहीं किया।

इनसे इतर बांका लोकसभा क्षेत्र के अमरपुर विधानसभा के रामचुआ गांव के दो बूथों पर दो उम्मीदवार समर्थक आपस में ही भिड़ गए और मामला हिंसक हो गया। झड़प के दौरान बीच बचाव करने गई पुलिस पर भी लोगों ने पथराव कर दिया। इसके बाद पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। जानकारी के अनुसार झड़प निर्दलीय प्रत्याशी पुतुल सिंह और गिरधारी यादव के समर्थकों के बीच हुई। हालांकि, पुलिस ने स्थिति को फौरन काबू में कर लिया।

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