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Lok Sabha Election 2019: रामपुर में बड़े पैमाने पर ध्रुवीकरण, जया प्रदा को उम्मीद- आजम खान को सीखा देंगी सबक

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): लोकसभा चुनाव में यूपी की रामपुर सीट काफी चर्चा में हैं। यहां सपा के आजम खान का मुकाबला भाजपा में शामिल हुईं जया प्रदा से है।

Author April 19, 2019 8:27 AM
जया प्रदा रामपुर से दो बार सांसद रह चुकी हैं। (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव में यूपी की रामपुर सीट काफी चर्चा में है। यहां सपा नेता आजम खान और भाजपा की उम्मीदवार जया प्रदा के बीच मुकाबला है। जयाप्रदा हाल ही में भाजपा में शामिल हुई हैं।

पार्टी ने अपने मौजूदा सांसद नेपाल सिंह का टिकट काटकर उन्हें यहां से मैदान में उतारा है। रामपुर सीट पर बड़ पैमाने पर धुव्रीकरण की उम्मीद है। रामपुर में 50 फीसदी से अधिक मतदाता मुसलमान हैं।

चुनाव आयोग आजम खान के विवादित बयान के बाद कार्रवाई कर दोनों दलों को संकेत दे दिया है। वहीं, जया प्रदा इसे आजम खान को ‘सबक सिखाने की लड़ाई’ बता रही हैं। जया का कहना है कि आजम को जरूर सिखाया जाना चाहिए कि महिलाओं का सम्मान कैसे किया जाता है। मुझे पूरा यकीन है कि रामपुर उन्हें यह सिखा देगा।

आजम खान के समर्थकों और उनके विरोधियों दोनों को लगता है कि यहां जातिगत समीकरण जो भी हों, आजम खान का नाम, उनकी इमेज ही सबकुछ है। आजम ने इसे अपनी आक्रामक राजनीति से हासिल किया है। ऐसा पहली बार नहीं है कि आजम ने जया के खिलाफ विवादित बयान दिया है। यहां तक कि जया प्रदा जब सपा में थी तब भी आजम खान उनके बारे में व्यक्तिगत टिप्पणियां कर चुके हैं।

भाजपा नेता और जिला प्रभारी चंद्रमोहन का कहना है कि रामपुर में चुनाव का मतलब आजम खान है। यहां आजम खान जीताओ या आजम खान हराओ। आजम खान के बेटे व विधायक अब्दुल्ला आजम से चुनाव आयोग की कार्रवाई क्या उनके मुस्लिम होने के कारण की गई है, के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि इसमें उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है।

कांग्रेस उम्मीदवार काटेगा वोटः कांग्रेस ने यहां से विधायक संजय कपूर को उतारा है। माना जा रहा है कि संजय के चुनाव में उतरने से हिंदू मतों का बंटवारा हो जाएगा। इससे जया प्रदा की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। कांग्रेस नेता बेगम नूर बानो का कहना है आजम जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं उसे रामपुर की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।

कांग्रेस का गढ़ रही है सीटः 1952 से यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। 1991 में पहली बार भाजपा ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस 1196 में इसे दुबारा जीतने में सफल रही लेकिन 1996 में उसे भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी के हाथों इस सीट को फिर गंवाना पड़ा। 1999 में नूर बानो के जरिये कांग्रेस ने फिर इस सीट पर जीत हासिल की। साल 2004 और 2009 में जया प्रदा ने समाजवादी पार्टी की टिकट पर यहां से चुनाव जीता था। साल 2014 में मोदी लहर में भाजपा के नेपाल सिंह ने यहां से जीत हासिल की।

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