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Lok Sabha Election 2019: बहुत कठिन है बिहार की लड़ाई, अभी तो मैदान के लिए मारामारी

Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। लेकिन अभी तक बिहार में किसी भी पार्टी के तरफ से उम्मीदवारों का ऐलान नहीं किया गया है। इस बार बिहार में एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला होने की बात कही जा रही है।

Lok Sabha Election 2019: पीएम नरेंद्र और बिहार के सीएम नीतीश कुमार फोटो सोर्स- फाइनेंसियल एक्सप्रेस

Lok Sabha Election 2019: देश के कई हिस्सों की तरह बिहार में भी पिछला लोकसभा चुनाव एक तरफा था। मोदी लहर के चलते बीजेपी ने बड़ी छलांग लगाई थी। बिहार में उस लहर के कुछ झोंके आज भी चल रहे, लेकिन अब मुकाबला एकतरफा नहीं। शायद यही कारण है कि किसी भी राजनीतिक दल द्वारा अभी तक उम्म्मीदवारों की घोषणा नहीं हुई, जबकि राज्य में पहले चरण से ही चुनाव होना है।

राजग बनाम महागठबंधन: इस बार तय है कि चुनाव दो बड़े गठबंधनों के बीच होगा। दो प्रमुख गठबंधनों (राजग और महागठबंधन) में मुकाबला होना है। वामपंथी संगठन और पप्पू-मांझी सरीखे लोग नहीं माने तो दो-तीन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की गुंंजाइश बन जाएगी। बहरहाल उन्हें साधने की कोशिश हो रही। खबरें हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पर तो भाजपा भी डोरे डाल रही है। सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का राजनीतिक रुख-रवैया भाजपा के अनुकूल नहीं, लिहाजा वे या तो महागठबंधन के साथ रहेंगे या फिर एकला।

 2014 का आंकड़ा

पार्टी सीट वोट प्रतिशत
भाजपा 22 29.40%
लोजपा 06 06.40%
राजद 04 20.10%
रालोसपा 03 03.00%
जदयू 02 15.80%
कांग्रेस 02 08.40%
राकांपा 01 01.20%

गठबंधनों की मुश्किल कम नहीं: इस बार मांझी और पप्पू के अलावा दूसरे दल या नेता भी गठबंधनों का सिरदर्द बढ़ाए हुए हैं। सलीका-सहूलियत वाली मानी जा रही भाजपा भी अभी तक अपने कोटे की सीटों की घोषणा नहीं कर पाई है। ऐसा तब जबकि दो माह पहले तय हो गया था कि वह बिहार में अपने सहयोगी जदयू के साथ एक बराबर सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। भाजपा और जदयू को 17-17 सीटें मिली हैं। बाकी छह सीटें केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को।

केंद्रीय मंत्रियों का भी कट सकता है पत्ता: बहरहाल भाजपा का कोई नेता यह नहीं बता पा रहा कि पार्टी अपनी कौन-सी सीटें जदयू को देने जा रही हैं। नवादा, खगडिय़ा, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर और दरभंगा जैसी आधा दर्जन सीटों पर पेच फंस रहा है। इनमें से चार सीटें केंद्रीय मंत्रियों की हैं। नवादा में गिरिराज सिंह, पाटलिपुत्र में रामकृपाल यादव, आरा में आरके सिंह और बक्सर में अश्विनी चौबे। हो सकता है कि इन मंत्रियों को अपनी सीट बदलनी या गंवानी पड़े।

आजकल में चिह्नित हो जाएगा दंगल का मैदान: जानकारों का कहना है कि बहुत संभव है कि मंगलवार को भाजपा के कोटे वाली सीटें चिह्नित हो जाएं। पार्टी को अपनी जीती हुई पांच सीटें जदयू के लिए छोड़नी हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक हर प्रमंडल से एक-एक सीट छोड़ी जा सकती है, ताकि पार्टी के भीतर असंतोष होने पर बीच-बचाव के तर्क गढ़े जा सकें। बिहार में कुल नौ प्रमंडल हैं और कयास है कि भाजपा तिरहुत, मगध, सारण, दरभंगा प्रमंडल से एक या दो सीट जदयू को देगी।

दिल्ली में भाजपा चुनाव संकल्प की बैठक हो रही है। उसमें शिरकत करने के लिए सुशील कुमार मोदी सोमवार शाम ही पटना से रवाना हो गए। सुशील मोदी बिहार भाजपा के दिग्गज तो हैं ही, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रिय भी। यह प्रेम-स्नेह ही है, जिसके कारण राजग सरकार में वे लगातार उप मुख्यमंत्री बने हुए हैं।

सहयोगी के लिए छोडऩी हैं जीती हुई पांच सीटें: सीटों से संबंधित दांव-पेच की हकीकत सुशील मोदी की बातों से उजागर हो जा रही। दिल्ली रवाना होने से पहले वे बताए कि इस बार भाजपा का स्थिति वैसी ही है जैसे 2010 के विधानसभा चुनाव के समय जदयू की थी। तब जदयू को भाजपा के लिए अपनी आठ सिटिंग सीटें छोडऩी थी। इस बार भाजपा को लोकसभा की पांच सीटें छोडऩी हैं। पिछले चुनाव में भाजपा को बिहार में 22 सीटों पर विजय मिली थी। इस बार उसे महज 17 सीटों पर चुनाव लडऩा है। अगर मांझी साथ आ जाते हैं तो इन्हीं सीटों में से उनके लिए भी गुंजाइश निकालनी होगी।

कभी जदयू के समक्ष थी भाजपा जैसी स्थिति: बकौल सुशील मोदी, भाजपा को अपनी पांच सिटिंग सीट छोडऩी हैं। यह अत्यंत कठिन काम है। केंद्रीय नेतृत्व ही इस पर फैसला करेगा। राजग के सहयोगी दलों के बीच तीन-चार दिनों में सीटें तय हो जानी चाहिए। 2010 में जदयू के समक्ष भी कुछ वैसी ही स्थिति थी, जिससे आज भाजपा दो-चार है। तब जदयू की ओर से विजय कुमार चौधरी, वशिष्ठ नारायण सिंह और विजेंद्र यादव मध्यस्थता कर रहे थे। भाजपा की ओर नंदकिशोर यादव और मंगल पांडेय के साथ मैं (सुशील कुमार मोदी)। सीट बंटवारे से संबंधित बैठक में जदयू ने अपनी एक दर्जन सीटों में से कोई आठ सीटें चुन लेने का विकल्प दिया था।

इस बार यह पेशकश भाजपा की ओर से होने वाली है। इस पेशकश के बाबत भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं। वे कहते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व को फीडबैक दे दिया है। उसे ही तय करना है। जो भी होगा, वह सौहार्दपूर्ण तरीके से। आखिर कब? इस सवाल पर वे कहते हैं कि इंतजार करिए, बहुत जल्द।

पहले चरण की सीटों से देनी होगी कुर्बानी: गौरतलब है कि राज्य में पहले चरण के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो चुकी है। इस दौर में जिन चार सीटों पर चुनाव होना है, उनमें से तीन मगध प्रमंडल की सीटें (गया, नवादा, औरंगाबाद) हैं। उनमें से तीनों पर भाजपा काबिज है। चौथी सीट जमुई की है, जहां से अभी चिराग पासवान सांसद हैं। चिराग लोजपा के कार्यकारी अध्यक्ष हैं और रामविलास पासवान के पुत्र व उत्तराधिकारी। जाहिर तौर पर जमुई में उनकी उम्मीदवारी पर कोई नानुकुर नहीं। उसके बाद बची तीन सीटों में से भाजपा के लिए किसी एक की कुर्बानी देने की नौबत बन रही। (पटना से राजन की रिपोर्ट)

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