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Lok Sabha Election 2019: सट्टा बाजार ने माना- नहीं है ‘मोदी लहर’, लेकिन सरकार तो BJP की ही बनेगी

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): हापुड़ के सट्टा बाजार का मानना है कि इस बार 'मोदी लहर' नहीं है। हालांकि, सट्टा बाजार में इस बात को माना जा रहा है कि बार भी भाजपा की ही सरकार बनेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव के लेकर चुनावी पंडित भले ही भाजपा के जबरदस्त जीत की भविष्यवाणी कर रहे हों लेकिन सट्टा बाजार की राय कुछ जुदा है। हापुड़ के सट्टा बाजार का मानना है कि इस बार ‘मोदी लहर’ नहीं है। हालांकि, सट्टा बाजार ने लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की सरकार बनने का ही अनुमान व्यक्त किया है।

सट्टा लगाने वालों को यह लगता है कि इस बार मुकाबला करीबी होगा लेकिन मोदी सत्ता में वापसी करेंगे। बाजार में 2014 की तरह मोदी लहर को महसूस नहीं किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के इस चुनाव में 2014 के 283 सीटों के मुकाबले कम सीटें मिलने की बात कही जा रही है। सट्टा बाजार के एक ऑपरेटर ने कहा, ‘हम भाजपा को 240 सीट मिलने का अनुमान व्यक्त कर रहे हैं या ज्यादा से ज्यादा 245 सीट तक मिल सकती है। इससे अधिक नहीं मिलेंगी।’

सट्टा बाजार से जुड़े कई लोगों ने आईएएनएस को बताया कि भले ही मोदी सरकार सत्ता में वापसी करने में कामयाब रहेगी लेकिन पिछले कार्यकाल के विपरीत इस बार सहयोगी दलों पर उसकी निर्भरता बढ़ जाएगी। इनके अनुसार यूपी में पार्टी पिछली बार की तुलना में आधी सीटें गंवा रही है। बुकी इस महत्वपूर्ण राज्य में पार्टी को पिछले बार की 71 सीटों के मुकाबले 41 सीटें मिलती देख रहे हैं। इसका मतलब है कि पार्टी अपने महत्वपूर्ण गढ़ में भारी नुकसान उठाने जा रही है।

माना जाता है कि बड़े शहरों के बुकीज की तुलना में हापुड़ के बुकीज का अनुमान अधिक सटीक होता है। सट्टा बाजार का यह अनुमान 300 से अधिक सीटों का है। सरकार पर मोदी की पकड़ कम होने का नतीजा हिंदू पार्टी के एजेंडा पीछे चला जाएगा। इसके पीछे कारण है कि एनडीए के जनता दल यूनाइटेड जैसे घटक इस मुद्दे पर भाजपा से बिल्कुल अलग राय रखते हैं। इस प्रकार की स्थिति में सरकार के बड़े नीतिगत निर्णय प्रभावित होंगे।

आर्थिक मुद्दों जिनमें विशेष रूप से सुधार शामिल है, पर आम राय बनाना एक जटिल काम हो जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार मोदी के व्यक्तित्व को देखते हुए यह कहना मुश्किल होगा कि वे ऐसी स्थिति में किस तरह से काम करेंगे लेकिन शिवसेना, जदयू जैसे मजबूत सहयोगी भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी करेंगे।

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