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Lok Sabha Election 2019: राजस्थान सीएम गहलोत के बेटे के लोकसभा टिकट पर पायलट का लगेगा ‘ब्रेक’!

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत अपने बेटे को लोकसभा टिकट दिलाने में जुट गए हैं। बताया जा रहा है कि सीएम की इस योजना में सबसे बड़ी बाधा उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट बन सकते हैं। मुख्यमंत्री के बेटे वैभव गहलोत के सवाई माधोपुर, जोधपुर के साथ ही जालौर से भी चुनाव लड़ने की चर्चा है।

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Lok Sabha Election 2019:लोकसभा चुनाव के लिए राजस्थान में कांग्रेस टिकट देने वाले उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप में देने में जुटी है। ऐसे में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने बेटे को टिकट दिलवाने की कोशिशों में जुट गए हैं। बताया जा रहा है सीएम के बेटे वैभव गहलोत के टिकट पाने में सबसे पहली और बड़ी बाधा कोई और नहीं बल्कि खुद उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट बन सकते हैं। पिछले कुछ महीनों में वैभव गहलोत की उम्मीदवारी को लेकर गहलोत और पायलट में दो मौकों पर बहस हो चुकी है। वैभव वर्तमान में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के महासचिव हैं।
वैभव की उम्मीदवारी को लेकर कई सीटों पर चर्चा चल रही है। इनमें सवाई माधोपुर भी शामिल हैं जहां गुज्जर और माली अच्छी खासी संख्या में हैं। जोधपुर गहलोत का अपना गढ़ है। वह खुद सरदारपुरा से विधायक हैं। तीसरा नाम जालौर से चल रहा है। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा, ‘मैं जानता हूं कि वैभव के नाम पर चर्चा चल रही है। पांच साल पहले जब हम चुनाव हार गए थे, मेरी यह इच्छा थी कि वह जालौर-सिरोही से चुनाव लड़े, लेकिन कुछ कारणों से उसे टिकट नहीं मिल पाया… हमने प्रचार किया था और मैं खुद भी जालौर आया था।’ उन्होंने यह साफ किया कि इस बारे में अंतिम निर्णय पार्टी हाई कमान को करना है। उन्होंने कहा, ‘हम कांग्रेस के सिपाही हैं।’ उन्होंने कहा कि राहुल गांधी यदि किसी दूसरे उम्मीदवार को चुनते हैं तो तब आपको उसमें वैभव गहलोत को देखना होगा।

 

बेटे के चुनाव लड़ने वाली सीट के बारे में सीएम ने कहा , ‘वो कार्यकर्ता है, कार्यकर्ता कहां लड़ेगा वो तो उनसे पूछिए। ये मैं कैसे बता सकता हूं।’ गहलोत के लिए बेटे को चुनाव मैदान में उतारने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता है। वैभव के पास अभी सार्वजनिक रूप से कोई पद नहीं है। गहलोत न सिर्फ मुख्यमंत्री है बल्कि पार्टी के प्रभावशाली नेताओं में से एक भी हैं। सूत्रों का कहना है कि गहलोत चाहते हैं कि विधानसभा के बदले लोकसभा के लिए दावा उनके परिवार के बेहतर हो सकता है क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनाव अभी पांच साल दूर हैं।

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