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Lok Sabha Election 2019: इन 10 कारणों से पहली बार इतने सवालों में घिरा चुनाव आयोग

लोकसभा चुनाव (Election 2019) के दौरान चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के कई ऐसे प्रकरण आए जिसको देखते हुए विपक्ष ने इलेक्शन कमिशन पर पक्षपात करने का आरोप लगाया।

चुनाव आयोग ने अशोक लवासा की मांग खारिज कर दी है। (file pic)

इस बार लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) देश के इतिहास में तमाम चुनावों के मुकाबले सबसे ज्यादा सवालों के घेर में रहा।  विपक्षी दलों ने कई मौकों पर चुनाव आयोग के खिलाफ पक्षपात के आरोप लगाए। आयोग की नीयत और नीति पर इस तरह सवाल उठाने का ही नतीजा रहा है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रभण मुखर्जी को भी बयान देना पड़ गया। मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि चुनाव आयोग की आलोचना ठीक नहीं है। दरअसव, पूर्व राष्ट्रपति ने यह बयान उस वक्त दिया जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाए किचुनाव आयोग ‘नरेंद्र मोदी और उनके गैंग’ के प्रति नरम रवैया अपनाता है। पिछले 38 दिनों तक चले चुनावी मुहिम के दौरान 10 ऐसे वाकये पेश आए, जिनसे चुनाव आयोग ही विवादों के घेरे में आ गया।

नरेंद्र मोदी की बायोपिक: 11 अप्रैल को मतदान से ठीक पहले चुनाव आयोग ने 10 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित फिल्म की रिलीज पर प्रतिबंध लगा दिया। आयोग का कहना था कि फिल्म के कई दृश्य ‘आदर्श आचार संहिता’ के दायरे से बाहर हैं। हालांकि, इसके बाद मूवी के निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने आयोग चुनाव आयोग को फिल्म देखने और इस पर पुनर्विचार करने को कहा। सात सदस्यों वाली एक कमेटी ने फिल्म देखी और इसकी रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय को सौंप दिया। जिसके बाद कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं की अर्जी खार्जि कर दी और कहा कि वह चुनाव आयोग के मामले में दखल नहीं देगा।

नरेंद्र मोदी की रैली में ब्लैक बॉक्स: चुनाव आयोग उस वक्त विवादों के घेरे में आ गया जब 1996 बैच के आईएएस अधिकारी का इसलिए तबादला कर दिया गया। दरअसल, पीएम मोदी की कर्नाटक के चित्रदुर्गा में होने वाली रैली के दौरान उनके हेलिकॉप्टर से एक काले रंग का बॉक्स उतारा गया। अधिकारी ने इस मामले की जांच शुरू कर दी थी।

मोदी को क्लीन चिट: तकरीबन सवा महीने के चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के एक बाद एक कई मामले दर्ज हुए। उन पर चुनाव प्रचार में बालाकोट एयरस्ट्राइक के नाम पर वोट मांगने का आरोप प्रमुख था। लेकिन, आयोग से उन्हें सभी मामलों में क्लीन चिट मिल गई।

अमित शाह को क्लीन चिट: चुनाव आयोग ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को भी क्लीन चिट दे दिया। शाह ने नागपुर की रैली में कहा था कि राहुल गांधी ऐसी जगह से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां का प्रचार देखकर लग रहा है कि यह भारत में हो रहा है या पाकिस्तान में।

प्रज्ञा ठाकुर का बयान: भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार और मालेगांव बम धमाके की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ भी आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज कराया गया। प्रज्ञा ठाकुर ने मुबंई हमले में शहीद हुए हेमंत करकरे के खिलाफ कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया था और साथ ही साथ सांप्रदायिक टिप्पणी भी की थी। उन्होंने दावा किया था कि बाबरी मस्जिद के विध्वंश में उनका हाथ है और उन्हें इस पर गर्व है। प्रज्ञा ने इसके अलावा महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ बताया था। हालांकि, प्रज्ञा के चुनाव प्रचार पर 72 घंटों का प्रतिबंध लगा था। लेकिन, वह मंदिरों में पूजा-अर्चना करती दिखाई दीं।

लावासा प्रकरण: चुनाव आयोग के सदस्यों में शामिल अशोक लवासा एकमात्र सदस्य थे, जिन्होंने अमित शाह और नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के पक्ष में नहीं थे। बाद में उन्होंने आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित कमेटी से खुद को अलग कर लिया।

नमो टीवी: चुनाव प्रचार के दौरान एका-एक लोगों को केबल और डीटीएच पर नमो टीवी दिखनी शुरू हो गई। यह एक ऐसा टीवी चैनल था जिसको लेकर काफी विवाद रहा। यह चैनल कब आया और कब टीवी स्क्रीन से गायब हो गया, लोगों कों अंदाजा ही नहीं लग पाया। इस टीवी चैनल को लेकर काफी सवाल उठाए गए। चुनाव आयोग ने इस टीवी चैनल पर इलेक्शन से जुड़े प्रचार कंटेंट को उस दौरान 48 घंटों तक नहीं दिखाने के निर्देश दिए, जब संबंधित लोकसभा क्षेत्रों में मतदान चल रहे हों।

जब योगी ने कहा,’मोदी की सेना’: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी कई बार आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप लगे। एक चुनावी सभा में उनके द्वारा भारतीय सेना को ‘मोदी की सेना’ कहने पर आयोग ने उनके खिलाफ कार्रवाई की और उन्हें 2 दिन तक प्रचार से बाहर रहना पड़ा। हालांकि, योगी इस दौरान मंदिर-मंदिर माथा टेकते नज़र आए।

मोदी की केदारनाथ यात्रा: आखिरी चरण के चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ चले गए। यहां उन्होंने पूजा-पाठ किया और गुफा में ध्यान लगाने चले गए। इस दौरान उनके साथ मीडिया का भारी हुजूम भी था और इसकी कवरेज लगातार होती रही। ऐसे में साइलेंस पीरियड के दौरान एक प्रत्याशी (मोदी वाराणसी से प्रत्याशी थे और आखिरी चरण में यहां भी मतदान होने वाले थे) की कवरेज को देख विपक्षी दलों ने आयोग से शिकायत भी की।

लवासा का गंभीर आरोप: इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच के मामले में देरी पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए मोदी और शाह की शिकायदों पर पारदर्शी तरीके और समयबद्ध निस्तारण का निर्देश दिया था। लवासा ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के तीन दिन बाद ही मैंने आदर्श आचार संहिता के मामले से निपटने की प्रक्रिया को मजबूत और सुचारू करने के लिए नोट लिखा था। इसके बावजूद इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

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