ताज़ा खबर
 

“चुनावी चोंचला है प्रधानमंत्री की पेंशन योजना, हमें तो गरीब ही रहना है”, बोले- दिल्ली के मजदूर

Lok Sabha Election 2019: 40 साल की सुदेश देवी कहती हैं कि वो पिछले पांच साल से एक घर में बिना छुट्टी लिए लगातार मात्र 2000 रुपये की मजदूरी पर ही काम कर रही हैं। सुदेश कहती हैं, "मैं बुढ़ापे में पेंशन लेकर क्या करूंगी, जब मैं आज संतुष्ट नहीं हूं।"

Author April 26, 2019 4:44 PM
दिल्ली के रोहिणी की जेजे स्लम कॉलोनी निवासी चांद लाल। (फोटो- क्रिस्टीना जॉर्ज)

Christina George

Lok Sabha Election 2019: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने चुनावी साल में बजट में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन पेंशन योजना की घोषणा की है मगर स्कीम लागू होने के दो महीने बाद भी मजदूरों के बीच इस योजना को लेकर रवैया उदासीन भरा है। लोग इसे चुनावी चोंचला मानते हैं। दिल्ली के रोहिणी की जेजे स्लम कॉलोनी में रहने वाले 45 साल के चांद लाल कंस्ट्रक्शन मजदूर हैं। वो साल 2000 से काम कर रहे हैं लेकिन उनके पास एक रुपये भी बचत के नाम पर नहीं है। एमपी के छतरपुर निवासी लाल ने मोहल्ले के हैंडपंप पर हाथ-पैर धोते हुए अपनी बीवी को बुलाया और कहा, “आज 300 रुपये की कमाई हुई है बस।” इसी पैसे से उन्हें अपना परिवार चलाना है। सरकार की किसी भी कल्याणकारी योजना में उसका नाम लाभुक के तौर पर रजिस्टर्ड नहीं है। प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन पेंशन योजना के बारे में पूछने पर पता चला कि उसकी इस योजना में कोई दिलचस्पी नहीं है।

देश में चुनावी माहौल है। पीएम मोदी अपने लोक लुभावन योजनाओं के बारे में लोगों को बताते फिर रहे हैं लेकिन लाल जैसे लोगों के लिए यह असरदार नहीं है। 300 से 550 रुपये रोजाना कमाने वाले लाल थके-हारे आवाज में कहते हैं कि जब हमलोगों को वाजिब मजदूरी भी नहीं मिलती है तो हम बचत कहां से करें। लाल ने कहा, “अमूमन एक दिन की मजदूरी 500 रुपये कम से कम है लेकिन काम की कमी होने की वजह से हमें समझौता करना पड़ता है और जो मिल जाता है, उसी से गुजारा कर लेते हैं।”

मोदी सरकार की इस गेमचेंजर योजना को लागू हुए दो महीने हो गए लेकिन श्रमिक इसमें रजिस्ट्रेशन कराने को अनिच्छुक दिखते हैं। मध्य प्रदेश से माइग्रेट कर दिल्ली पहुंची 40 साल की सुदेश देवी कहती हैं कि वो पिछले पांच साल से एक घर में बिना छुट्टी लिए लगातार मात्र 2000 रुपये की मजदूरी पर ही काम कर रही हैं। सुदेश कहती हैं, “मैं बुढ़ापे में पेंशन लेकर क्या करूंगी, जब मैं आज संतुष्ट नहीं हूं।” 40 साल की मीना कुमारी पिछले एक साल से विधवा पेंशन पाने के लिए भटक रही हैं। वो कहती हैं, “मेरे पति का पिछले साल निधन हो गया। विधवा पेंशन के लिए कई बार अप्लाई किया लेकिन हर बार कागजात कम कहकर रिजेक्ट कर दिया गया। सरकार की पेंशन योजना से तो बेहतर होता कि मुझे कोई काम मिल जाता। हम कमाकर अपनी जिंदगी काट लेते।”

बता दें कि सरकार ने  अप्रैल 2019 के अंत तक इस स्कीम में एक करोड़ कामगार मजदूरों को शामिल करने का लक्ष्य रखा है। अगले पांच साल में इस योजना में 10 करोड़ लोगों को जोड़ने की योजना है। योजना के मुताबिक हरेक महीने 15,000 रुपये से कम कमाने वालों को इस पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा। कामगारों को 60 साल की उम्र होने पर 3000 रुपये बतौर पेंशन दिए जाएंगे लेकिन उन्हें अभी कम से कम 55 रुपये हर महीने जमा करने होंगे। इतनी ही राशि सरकार भी उनके लिए जमा करेगी। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के आंकड़े को मुताबिक देश में करीब 42 करोड़ श्रमिक असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं जिन्हें इस योजना का लाभ मिल सकता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App