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कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाने के बाद भी पीएम नरेंद्र मोदी की रैली में भीड़ नहीं जुटा पाई बीजेपी

Lok Sabha Election 2019: पीएम ने अपने भाषण में स्थानीय मुद्दों को उठाया। बुनकरों, विक्रमशिला सेतु पर समानांतर पुल निर्माण, सिल्क उद्योग को बढ़ावा देने की भी बात की लेकिन उन्होंने अपने पुराने वादे विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय का जिक्र तक नहीं किया।

भागलपुर में चुनावी रैली के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम नीतीश कुमार और एलजेपी अध्यक्ष रामविलास पासवान। फोटो-PTI)

Lok Sabha Election 2019: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (11 अप्रैल) को भागलपुर में हवाई अड्डा मैदान में चुनावी रैली की। वो पौने ग्यारह बजे जैसे ही मंच पर पहुंचे, वैसे ही मोदी के समर्थन में गीत बजने लगे। उत्साहित पीएम ने भी मंच पर आते ही हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन करना शुरू कर दिया। सफेद कुर्ता-पायजामा पहने नरेंद्र मोदी जोश से लबरेज नजर आ रहे थे। उन्होंने मौजूद भीड़ से नारा लगवाया, “गांव-गांव से चौकीदार, शहर-शहर से चौकीदार, दादा-दादी चौकीदार, पीसा-पीसी चौकीदार, चाचा-चाची चौकीदार, मुंशी-वकील चौकीदार, विद्यार्थी सब चौकीदार..।।”

हालांकि, 2015 के मुकाबले इस बार नरेंद्र मोदी को सुनने और देखने वालों की भीड़ काफी कम थी जबकि दो संसदीय क्षेत्र, भागलपुर और बांका की जनता को यहां आना था। इसके लिए बूथ स्तर तक के भाजपा कार्यकर्ताओं को वाहनों के साथ ड्यूटी पर लगाया गया था। बीजेपी एमएलसी और प्रदेश कोषाध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने एक दिन पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी थी। पंडाल के पीछे ड्यूटी पर तैनात अधिकारी पूनम कुमारी ने भी बताया कि पीएम मोदी की पुरानी जनसभा जैसी भीड़ इस बार नहीं दिखी।

पीएम ने अपने भाषण में स्थानीय मुद्दों को उठाया। बुनकरों, विक्रमशिला सेतु पर समानांतर पुल निर्माण, सिल्क उद्योग को बढ़ावा देने की भी बात की लेकिन उन्होंने अपने पुराने वादे विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय का जिक्र तक नहीं किया। इससे कई युवा मायूस नजर आए। कहलगांव से आए पवन कुमार चौधरी और पुष्पांकर गुप्ता का कहना था कि भागलपुर के लिए यह मुद्दा अहम है। खुद प्रधानमंत्री ने 2015 में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए पांच सौ करोड़ रुपए आवंटित करने की भी बात हुई थी लेकिन चार साल बाद भी कुछ नहीं हुआ। मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य नेता भी थे लेकिन किसी ने भी इस मुद्दे की चर्चा नहीं की।

नौगछिया के जयमंगल टोला से आए हरिमोहन शर्मा आठ किलोमीटर पैदल चलकर पीएम को सुनने आए थे लेकिन वो नरेंद्र मोदी का भाषण सुन अचंभे में आ गए। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में कुल आठ लोग हैं और गरीबी रेखा में नाम भी दर्ज है, बावजूद उन्हें न तो पक्का मकान मिला, न शौचालय, न ही गैस। जबकि पीएम इसकी बात कर रहे थे। यही बात रिक्शा चालक किशोर ने भी कही। बतौर किशोर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिस सात निश्चय का जिक्र करत रहे हैं उसमें कई गड़बड़ियां हैं। सुल्तानगंज के बाथ गांव से आए संजीव मंडल कहते हैं कि शौचालय तो बना लेकिन बारह हजार रुपए सब्सिडी देने के लिए अफसर पांच हजार रुपये घूस मांग रहे हैं। कहां से रुपया लाकर दें, जब खुद मजदूरी करके पेट पालते हैं। बतौर संजीव, मोदी जी का चौकीदार नारा कोई मायने नहीं रखता।

इस बार भागलपुर, बांका और बगल की मुंगेर तीनों संसदीय सीट जदयू के खाते में गई है। भागलपुर के नाथनगर से विधायक अजय मंडल हैं। सभा में वे भी भाजपा के भगवा रंग में रंगे नजर आए। भाजपा के कद्दावर नेता शाहनवाज हुसैन का टिकट काट इन्हें उम्मीदवार बनाया गया है। मंच पर बांका प्रत्याशी गिरधारी यादव और मुंगेर प्रत्याशी और बिहार सरकार में मंत्री राजीव रंजन उर्फ लल्लन सिंह भी मौजूद थे। दिलचस्प बात है कि पिछले दस दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिहार में यह तीसरी जनसभा थी। इससे पहले 2 अप्रैल को उन्होंने जमुई और गया में सभा को संबोधित किया था। इन तीनों जगह भाजपा का कोई उम्मीदवार नहीं है। इसलिए वो मतदाताओं को बता रहे हैं कि तीर या कमल या बंगला निशान पर आपका दिया एक-एक वोट मोदी को मजबूत करेगा।

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