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चुनाव के आखिरी दो चरण में पीएम मोदी ने राजीव गांधी को क्यों घसीटा? समझिए- सियासी समीकरण

Lok Sabha Election 2019: जाब में भाजपा की स्थिति बहुत कमजोर है। 2014 के चुनावों में मोदी लहर के बावजूद आप के चार सांसद वहां से जीते थे जबकि अकाली दल और भाजपा गठबंधन के मात्र पांच सांसद ही जीत सके।

Author May 9, 2019 3:31 PM
भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी।

Lok Sabha Election 2019: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के पांच चरण बीत जाने के बाद कांग्रेस पर अचानक अपनी आक्रामकता तेज कर दी है। छठे और सातवें चरण की वोटिंग से पहले चुनावी संग्राम में उन्होंने पूर्व पीएम राजीव गांधी को लाकर कांग्रेस को बैकफुट पर लाने की कोशिश की है। चूंकि कांग्रेस अध्यक्ष लगातार पीएम मोदी पर राफेल खरीद को लेकर आरोप लगाते रहे हैं और अपनी सभाओं में चौकीदार चोर है के नारे लगवाते रहे हैं। इसकी काट में पीएम नरेंद्र मोदी ने पहले तो बोफोर्स का मुद्दा उठाया फिर राजीव गांधी को भ्रष्टाचारी नंबर वन कहा। अब उन्होंने सैन्य युद्धपोत का निजी इस्तेमाल करने के बहाने कांग्रेस और गांधी परिवार को घेरा है।

सिख वोटों का ध्रुवीकरण: पीएम मोदी तीस साल पुराने मामले को उछालकर न सिर्फ कांग्रेस और गांधी परिवार को करप्ट ठहराने की कोशिश कर रहे हैं बल्कि यह जताने की कोशिश भी कर रहे हैं कि उन्हें उनके दरबारियों ने मिस्टर क्लीन बनाया था जबकि असल में राजीव गांधी की छवि साफ-सुथरी नहीं थी। छठे चरण में जब दिल्ली, और हरियाणा समेत सात राज्यों की कुल 59 सीटों पर 12 मई को वोट डाले जाएंगे उससे पहले राजीव गांधी को करप्ट कहकर नरेंद्र मोदी सिख वोटों का ध्रुवीकरण करना चाहते हैं। दरअसल, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर सिख दंगे भड़के थे। चूंकि इंदिरा गांधी की हत्या दो सिख जवानों ने की थी, इसलिए दिल्ली और आसपाल के इलाकों में सिखों के खिलाफ हिंसा हुई थी। कांग्रेस पर सिख दंगाइयों को बचाने और दंगा करवाने के आरोप लगते रहे हैं। जब ये दंगे भड़के थे तब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। लिहाजा, पीएम मोदी राजीव गांधी के बहाने सिखों को कांग्रेस के खिलाफ एकजुट कर उसका सियासी फायदा उठाना चाहते हैं।

पंजाब में बीजेपी की कमजोर स्थिति: वैसे पंजाब में तो आखिरी चरण में चुनाव है लेकिन पीएम अभी से ही कांग्रेस और गांधी परिवार के खिलाफ हवा बनाने की कोशिश में हैं। बता दें कि पंजाब में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को लेकर भी एक बड़े तबके में नाराजगी है क्योंकि उनके शासनकाल में 3 से 6 जून 1984 के बीच ऑपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम दिया गया था। खालिस्तान समर्थकों और जनरैल सिंह भिंडरावाले से अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को सेना ने इस ऑपरेशन के दौरान खाली कराया था। इस ऑपरेशन में भारी खून खराबा हुआ था जिसमें 83 सैनिकों समेत 300 से ज्यादा लोग मारे गए थे। आज भी सिख समुदाय उसे ब्लैक ऑपरेशन कहता है और उस वजह से गांधी परिवार से नाराजगी रखता है।

पीएम मोदी विरोधियों की कमजोर नब्ज को टटोलना बखूबी जानते हैं। शायद यही वजह है कि उन्होंने गांधी परिवार पर हमला तेज कर दिया हैं। वैसे पंजाब में भाजपा की स्थिति बहुत कमजोर है। 2014 के चुनावों में मोदी लहर के बावजूद आप के चार सांसद वहां से जीते थे जबकि अकाली दल और भाजपा गठबंधन के मात्र पांच सांसद ही जीत सके। 2009 में भाजपा को जहां 10.1 फीसदी वोट मिले थे, वह 2014 में घटकर 8.7 फीसदी हो गया। 2017 के पंजाब विधान सभा चुनाव में भी बीजेपी के 23 उम्मीदवारों में से मात्र तीन ही जीत सके और वोट परसेन्टेज भी लुढ़ककर 5.4 पर आ पहुंचा। पंजाब की 13 संसदीय सीटों के लिए 19 मई को वोट डाले जाएंगे । गौर करने वाली बात है कि पंजाब पाकिस्तान से सटा है लेकिन पीएम वहां बालाकोट और पलवामा का जिक्र न कर सिख भावनाओं को भुनाना चाह रहे हैं।

कांग्रेस को भ्रष्ट करार देने की कोशिश: इनके अलावा पीएम मोदी पूरी कांग्रेस और गांधी परिवार को भ्रष्ट करार देने की कोशिशों में जुटे हैं। इसी वजह से उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान में बुधवार (08 मई) की शाम पूर्व पीएम राजीव गांधी पर सनसनीखेज आरोप लगाया और कहा कि पूर्व पीएम ने सैन्य युद्धपोत आईएनएस विराट का इस्तेमाल अपने परिवार और ससुरालवालों की पिकनिक मनाने के लिए किया। उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि उनकी सरकार सैन्य राष्ट्रवाद को बढ़ावा दे रही है जबकि कांग्रेस की सरकार ने सैनिकों का इस्तेमाल निजी काम के लिए किया। पिछले दिनों पीएम मोदी ने राजीव गांधी को नंबर वन भ्रष्टाचारी भी बताया था और उनके उस बयान को निशाने पर लिया था कि केंद्र से चले 100 पैसों में से मात्र 25 पैसे गांव तक पहुंचते हैं। बाजपा का आरोप है कि बीच के 75 पैसे कांग्रेस राज के भ्रष्टाचारी खा जाया करते थे।

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