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Lok Sabha Election 2019: सौ से ज्यादा रिटायर्ड फौजियों ने डाला वाराणसी में डेरा, पीएम के खिलाफ ऐलान-ए-जंग

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 100 से अधिक फौजी डेरा डाल चुके हैं। ये लोग पीएम मोदी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले बीएसएफ से बर्खास्त किए गए तेज बहादुर फौजी का प्रचार कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री बृहस्पतिवार को वाराणसी में रोड शो करते हुए। (फोटोः पीटीआई)

Lok Sabha Election 2019:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 100 से अधिक रिटायर्ड या बर्खास्त सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों ने डेरा डाल दिया है। ये लोग पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव प्रचार करेंगे। इन फौजियों का कहना है कि पीएम मोदी सेना को कमजोर कर रहे हैं और सेना में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।  ये जवान वाराणसी के मडु़आ डीह क्षेत्र में रुके हैं।

ये सभी लोग खराब खाने की शिकायत करने के बाद बर्खास्त किए गए बीएसएफ जवान तेज बहादुर के समर्थन में प्रचार करेंगे। तेज बहादुर फौजी ने वाराणसी से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया है।  टेलीग्राफ की खबर के अनुसार यदि संभव हुआ तो यह लोग पीएम मोदी के नामांकन के दौरान उन्हें काले झंडे भी दिखाएंगे। तेज बहादुर का कहना है कि मैं सच्चा चौकीदार हूं और फर्जी चौकीदार के खिलाफ लड़ रहा हूं।

तेज बहादुर का प्रचार ऐसे समय में हो रहा है जब प्रधानमंत्री मोदी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने सेना के गौरव को बहाल किया है। वे अपने शासनकाल में पाकिस्तान में घुसकर हमला करने की बात कहते हुए वोट मांग रहे हैं। इस बात को लेकर पूर्व सैन्य प्रमुख समेत कई रिटायर्ड सैनिक राष्ट्रपति से शिकायत कर चुके हैं। मोदी के सर्जिकल स्ट्राइक का हवाला देने समेत दो कारण से पूर्व और सस्पेंड किए गए सैनिक उनके खिलाफ हैं।

वे 29 सितंबर 2016 को एलओसी पर आतंकी लॉन्च पैड पर सर्जिकल स्ट्राइक को सार्वजनिक करने के लिए पीएम पर ‘मिलिट्री सिक्रेट का खुलासा’ करने का दोष मढ़ रहे हैं। इसके अलाव साल 2014 के चुनाव में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान के बावजूद वे अभी भी सेना में ‘भ्रष्ट अधिकारियों के साथ खड़े’ हैं।

इन फौजियों की शिकायत है कि वे अपने बड़े अधिकारियों और भ्रष्टाचार के विरोध करने की कीमत अदा कर रहे हैं। इसके पीछे सरकार की तरफ से भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ उनकी शिकायतों को नजरअंदाज करना है। साल 2001 में सेना से रिटायर्ड हवलदार 62 वर्षीय ओम प्रकाश सिंह ने कहा, ‘सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक पहली सर्जिकल स्ट्राइक नहीं थी। मैं खुद पहले भी पाकिस्तान के इलाके में की गई कई सर्जिकल स्ट्राइक का हिस्सा रहा हूं।’

सीआरपीएफ से सस्पेंड किए गए 32 वर्षीय पंकज मिश्रा कहते हैं, ‘सैनिकों की तरफ से कम से कम 4000 शिकायतें दी गई हैं। इनमें अधिकारियों की तरफ से अपने घरों पर छोटे-छोटे काम करने पर मजबूर किया जाता है। ये सभी शिकायतें पिछले तीन साल से पीएमओ में पेंडिंग पड़ी हैं।’

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