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Election Result 2019: नवीन पटनायक: स्कूल में सब कहते थे पप्पू, जवानी में न्यूयॉर्क की पार्टियों में ही बीतता था ज्यादा वक्त

Election 2019: नवीन पटनायक पिछले 10 वर्षों से भाजपा और कांग्रेस से बराबर दूरी बनाए हुए हैं लेकिन इस बार 23 मई को चुनावी नतीजे आने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि बीजद की यह समान दूरी आगे भी बरकरार रहती है या नहीं।

ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक। (फोटो- एक्सप्रेस आर्काइव)

Election Result 2019: वो एक ऐसे राजनेता हैं, जिन्हें लोग स्कूल के दिनों से ही प्यार से पप्पू कहकर पुकारते रहे हैं। उनकी शिक्षा प्रतिष्ठित दून स्कूल से हुई थी। वहां भी साथी उन्हें इसी उपनाम से पुकारते थे। बाद में उन्होंने दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से कला में स्नातक की शिक्षा पूरी की। उनका बचपन और युवा अवस्था राजनीति और मातृभाषा उड़िया की छाया से दूर बीता। जवानी न्यूयॉर्क में हाई प्रोफाइल पार्टियों में ही बीता मगर 51 साल की उम्र में उन्हें पिता की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए सियासत में कदम रखना पड़ा। तब उनके राजनैतिक विरोधी समझते थे कि वो राजनीतिक तौर पर भी पप्पू साबित होंगे लेकिन 19 साल से वो ओडिशा जैसे पिछड़े राज्य के मुख्यमंत्री बने हुए हैं। नाम है उनका नवीन पटनायक। नवीन राजनीति में सादगी की मिसाल हैं।

Lok Sabha Election Result 2019 Online LIVE Updates:

नवीन पटनायक चार बार राज्य की बागडोर संभाल चुके हैं और प्रचंड बहुमत के बाद पांचवीं बार राज्य की कमान संभालने जा रहे हैं। अगर वो पांचवीं बार भी ओडिशा के सीएम का कार्यकाल पूरा करते हैं तो देश के इतिहास में एक नई इबारत लिखेंगे। सबसे लंबे समय तक सीएम बनने का गौरव उन्हें हासिल हो सकेगा। पांच साल पहले 2014 के विधान सभा चुनाव में उनकी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) को 43.14 फीसदी मत मिले थे और 147 सदस्यीय विधान सभा में कुल 117 सीटें मिली थीं। उसी के साथ हुए लोकसभा चुनाव में भी बीजद को कुल 21 सीटों में से 20 सीटें मिली थीं। 72 साल की उम्र में सेल्फी क्लिक कर, पहली बार बस से सफर कर और सुबह-सवेरे व्यायाम करने का पहला वीडियो जारी कर नवीन पटनायक ने लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वो अब भी काम कर सकते हैं। बता दें कि नवीन पटनायक पिछले कुछ वर्षों में अपने इलाज को लेकर सुर्खियों में रहे हैं और विपक्षी भाजपा इसको मुद्दा बनाती रही है।

कहां से कौन जीता, देखें- पूरी लिस्ट

2019 के ओडिशा विधान सभा में बीजद ने 108 और लोकसभा में 13 सीटें जीती हैं। यह ग्राफिक्स 2009 और 2014 के विधान सभा चुनावों का है।

नवीन पटनायक पिछले 10 वर्षों से भाजपा और कांग्रेस से बराबर दूरी बनाए हुए हैं लेकिन इस बार उन्होंने इस नीति को छोड़ने के संकेत दिए हैं। वैसे नवीन पटनायक को इस बार चुनावी मैदान में भाजपा से कड़ा मुकाबला मिला, बावजूद उन्होंने जीत दर्ज की। भाजपा ने पिछले कुछ सालों में ओडिशा में युवाओं और खासकर शहरी मतदाताओं के बीच अपनी जमीन मजबूत की है और अपना जनाधार बढ़ाया है। इस बीच नवीन पटनायक के कई पुराने साथियों ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है। हालांकि, इस बीच नवीन पटनायक के लिए जनता का स्नेह कम नहीं हुआ है। बचपन और युवा अवस्था के पप्पू कहलाने वाले नवीन पटनायक को अब लोग ‘नवीन बाबू’ कहकर पुकारते हैं।

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