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Lok Sabha Election: अलीपुरद्वार में मतदाताओं का दर्द: भूख, बेरोजगारी, पलायन और मानव तस्करी

अलीपुरद्वार में 11 अप्रैल को मतदान होने वाले हैं, लेकिन बंद हो चुके चाय बागान, रोजगार की तलाश में पलायन और औरतों की ट्रैफिकिंग यहां की सबसे बड़ी समस्या है। हालांकि, पीएम मोदी और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी दोनों इस मुद्दे को अपने भाषण में उठाया और एक दूसरे को इसका जिम्मेदार ठहराया।

तस्वीर में चाय बागान मजदूर शंकर देहरी उनकी पत्नी सुर्जी और बच्चे हैं। (एक्सप्रेस फोटो/पार्थ पॉल)

उत्तरी बंगाल के अलीपुरद्वार जिला स्थित हथखोला गांव के शंकर देहरी (45) और उनकी पत्नी सुर्जी को सोमवार दोपहर का खाना नसीब नहीं हो पाया। क्योंकि, उनके घर में न तो चावल था और न ही आटा। हालांकि, सुर्जी कहती हैं कि उनके तीन बच्चों को आंगनबाड़ी सेंटर से खाना मिल जाएगा। कुछ वक्त पहले शंकर एक चाय बागान में मजदूरी किया करते थे। यह बागान अलीपुरद्वार कस्बे से 55 किलोमीटर दूर स्थित है। लेकिन, दिसंबर 2018 में यह चाय बागान बंद हो गया और सभी मजदूर बेरोजगार हो गए। शंकर देहरी फिलहाल 100 रुपये में पत्थर तोड़ने का काम करते हैं। उन्हें हफ्ते में दो या तीन दिन ही यह काम मिल पाता है।

इसके अलावा अलीपुरद्वार से 18 किलोमीटर दूर बीरपाड़ा स्थित दालमोर चाय बागान में 50 साल के गोपाल तमांग बतौर विद्युतकर्मी काम करते हैं। उनकी पगार प्रति माह 6,000 रुपये है। मगर आज भी वह अपनी पत्नी का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल, जब 2011 में चाय बागान बंद हो गया तब उनकी पत्नी बीनू को एक व्यक्ति ने सउदी अरब में नौकरी दिलाना का लालच दिया। गोपाल कहते हैं कि शुरुआत में वह अपनी पत्नी से फोन पर बात करते थे। लेकिन, उसके बाद वह संपर्क से ही कट गई। गोपाल का बेटा और उसकी पत्नी केरल में मजदूरी का काम करते हैं।

अब जब अलीपुरद्वार में 11 अप्रैल को मतदान होने वाले हैं, ऐसे में ये दो परिवार क्षेत्र के असलियत को बयान कर रहे हैं। बंद हो चुके चाय बागान, रोजगार की तलाश में पलायन और औरतों की ट्रैफिकिंग यहां की स्याह सच्चाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के अधिकांश युवा देश के अलग-अलग हिस्सों में रोजगार की तलाश में निकलते हैं। यहां से सबसे ज्यादा पलायान केरल और दिल्ली में है। लड़कियां और औरतें दलालों के चंगुल में फंस जाती हैं और उन्हें देश के अलग-अलग शहरों ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भेजा जाता है।

चाय बागानों के बंद होने और नौकरियों के खत्म होने का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दोनों के चुनावी भाषण में हुआ। दोनों ही नेता इसके लिए एक दूसरे को दोषी ठहराते हुए पाए गए। पीएम मोदी ने जहां ममता बनर्जी को ‘स्पीड ब्रेकर’ (गति अवरोधक) करार दिया तो वहीं ममता बनर्जी ने मोदी को सिर्फ बड़े-बड़े वादे करने और जमीन पर काम नहीं करने का आरोप लगाया। बेरोजगारी के मुद्दे पर तृणमूल के सीटिंग सांसद दशरथ तिर्की और बीजेपी नेता जॉन बार्ला काफी जोर दे रहे हैं। इस सीट पर आरएसपी ने मिली ओराव और कांग्रेस ने मोहनलाल बसुमाता को टिकट दिया है।

गौरतलब है कि तिर्की कुमारग्राम विधानसभा से आरएसपी से तीन बार विधायक रह चुके हैं। लेकिन, 2014 में उन्होंने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल जॉइन कर लिया। 2014 में दशरथ तिर्की ने आरएसपी उम्मीदवार मनोहर तिर्की को 21,397 मतों से हरा दिया था और 1977 से लगातार लेफ्ट का किला बन चुके अलीपुरद्वार में सेंध लगा डाली। इस दौरान बीजेपी उम्मीदवार बीरेंद्र बरन को 3,35,857 वोट मतलब कुल 27.30 फीसदी मत हासिल हुए, जबकि दशरथ को 29.46 फीसदी वोट हासिल हुए थे। वहीं, मनोहर के खाते में 27.72 फीसदी वोट आया था।

तृणमूल के नेता वैसे ममता बनर्जी के प्रयासों से क्षेत्र में विकास के तमाम दावे कर रहे हैं। जिनमें 2014 में अलीपुरद्वार को अलग जिला बनाना शामिल है। इसके अलावा जिले में मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज खोले जाने को लेकर भी खूब प्रचार किया जा रहा है। लेकिन, स्थानीय लोगों का कहना है कि ना तो केंद्र सरकार और ना ही राज्य सरकार ने उनके रोजगार के बारे में कुछ सोचा है। उनके मुताबिक दोनों सरकारों ने चाय बागान के बेरोजगार हो चुके मजदूरों की सुध नहीं ली है।

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