निर्भया के माता-पिता नहीं करना चाहते मतदान, बोले- न्याय के वादों से नेता करते हैं ‘राजनीतिक नौटंकी’

निर्भया के पिता ने कहा, ‘ इस बार मुझे भी अपना वोट डालने जाने का मन नहीं है। व्यवस्था में मेरा विश्वास डगमगा गया है।' बता दें कि 16 दिसंबर 2012 की रात को निर्भया (काल्पनिक नाम) के साथ बर्बरतापूर्ण सामूहिक दुष्कर्म किया गया था।'

Author April 26, 2019 9:37 AM
nirbhaya caseनिर्भया के माता-पिता नहीं करना चाहते मतदान फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

दिल्ली में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार के जोर पकड़ने के साथ ही नेता जहां लोगों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं तो वहीं 16 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई छात्रा निर्भया के माता-पिता का कहना है कि शायद वे इस बार वोट न दें। पूरे देश की संवेदनाओं को बुरी तरह झकझोर देने वाले इस मामले में पीड़िता निर्भया (काल्पनिक नाम) के साथ बर्बरतापूर्ण सामूहिक दुष्कर्म किया गया और बाद में उसकी मौत हो गई थी।

वादों से थक चुके निर्भया के माता-पिताः दंपती का कहना है कि वे पार्टियों द्वारा उनसे किये गए न्याय के वादों से थक चुके हैं और इनके बारे में कुछ नहीं किया जा रहा है। गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2012 की रात को सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई पैरामेडिकल छात्रा की इस घटना के 11 दिनों बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई थी। छात्रा को बाद में ‘निर्भया’ के रूप में जाना जाने लगा।

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‘पार्टियों के वादे सिर्फ राजनीतिक नौटंकी’: निर्भया के माता-पिता ने कहा कि पार्टियों द्वारा जताई गई सहानुभूति और उनके वादे केवल एक ‘राजनीतिक नौटंकी’ है क्योंकि दोषी अभी तक जीवित हैं। दंपती ने आरोप लगाया कि सड़कें शहर की महिलाओं और बच्चों के लिए असुरक्षित बनी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारों ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। उन्होंने कहा, ‘‘सीसीटीवी कैमरे अभी तक नहीं लगाए गए। देश अभी तक असुरक्षित बना हुआ है, माताएं अपनी बेटियों के घर लौटने तक चिंतित रहती हैं।

पीड़िता की मां ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘लोगों का व्यवस्था पर कोई भरोसा नहीं है। मुझे इस बार किसी भी पार्टी के लिए मतदान करने का मन नहीं है।’ उन्होंने कहा कि उनकी बेटी से दुष्कर्म और उसकी हत्या हुए सात वर्ष हो चुके हैं लेकिन मौत की सजा का फैसला लागू होना बाकी है। निर्भया के पिता ने कहा, ‘कुछ भी नहीं बदला। इस बार मुझे भी अपना वोट डालने जाने का मन नहीं है। व्यवस्था में मेरा विश्वास डगमगा गया है।’

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