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2014 का वादा पूरा नहीं कर पाई नरेंद्र मोदी सरकार, इस बार 10 गुना बढ़ाया ‘नल से जल’ पहुंचाने का लक्ष्य

Lok Sabha Election 2019: राष्ट्रीय पेयजल मिशन की शुरुआत साल 2009 में तत्कालीन मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा की गई थी। 2012 में यूपीए सरकार ने इसे संशोधित करते हुए लक्ष्य रखा कि देश के सभी घरों में पाइप के जरिए पेयजल की आपूर्ति की जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह। (File Photo : Reuters)

Lok Sabha Election 2019: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पिछले पांच साल में देश के सभी घरों में नल के जरिए पीने का पानी पहुंचाने के अपने वादे में नाकाम रही है। इसलिए भाजपा ने 2019 के घोषणा पत्र में फिर से इस मुद्दे को शामिल किया है और वादा किया है कि अगर दोबारा सरकार बनी तो 2024 तक देश के सभी घरों में ‘नल से जल’ पहुंचा दिया जाएगा। बीजेपी के 2019 के चुनावी वादे के मुताबिक सालाना 3.65 करोड़ घरों में ‘नल से जल’ पहुंचाया जाएगा। यह मोदी सरकार के मौजूदा सबसे उच्चतम आंकड़े का 10 गुना है। केंद्र सरकार के आंकड़े बताते हैं कि एनडीए सरकार के पिछले पांच साल के कार्यकाल में किसी एक वर्ष में जब सबसे ज्यादा नल से जल पहुंचाया गया हो, उसका आंकड़ा 36 लाख सालाना ही है। आंकड़े बताते हैं कि देश के कुल 17.854 करोड़ घरों में से मात्र 3.257 करोड़ घरों में ही पाइप्ड वाटर की सप्लाई हो सकी है जो मात्र 18.24 फीसदी है। हालांकि, भाजपा ने 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में भी वादा किया था कि 2019 तक देश के सभी घरों में नल के जरिए सुरक्षित पेयजल पहुंचा दिया जाएगा, मगर यह वादा मोदी सरकार पूरा नहीं कर सकी।

कांग्रेस ने भी 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में इसी तरह का वादा किया था। अब कांग्रेस ने 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में कहा है कि “बीजेपी सरकार के तहत राष्ट्रीय पेयजल मिशन की उपेक्षा की गई है लेकिन उसकी सरकार बनी तो इस मिशन के लिए आवंटन बढ़ाया जाएगा।” बता दें कि राष्ट्रीय पेयजल मिशन की शुरुआत साल 2009 में तत्कालीन मनमोहन सिंह की सरकार द्वारा की गई थी। 2012 में यूपीए सरकार ने इसे संशोधित करते हुए लक्ष्य रखा कि देश के सभी घरों में पाइप के जरिए पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। 2014 में जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आई, तब इस मिशन को जारी रखने का फैसला लिया गया। सरकार ने इसके लिए साल 2015 में योजना में कुछ बदलाव भी किए लेकिन आवंटन 60 फीसदी तक कम कर दिया। साल 2012-13 में जहां इस मद पर कुल 10,489 करोड़ रुपये का आवंटन था, जो 2015-16 में घटकर 4,369 करोड़ रुपये कर दिया।

हालांकि, इसके बाद मोदी सरकार ने इस पर बजट आवंटन बढ़ाया है लेकिन वह यूपीए सरकार से कम ही है। मोदी सरकार ने 2016-17 में पेयजल मिशन के लिए 5,980 करोड़ रुपये आवंटित किए जो अगले साल यानी 2017-18 में बढ़ाकर 7,083 करोड़ रुपये कर दिए गए लेकिन 2018-19 में फिर घटकर 5,500 करोड़ रुपये हो गए। चुनावी साल को देखते हुए सरकार ने फिर से इस मद में आवंटन बढ़ाया है और उसे 2019-20 के लिए 8,201 करोड़ रुपये कर दिया है।

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