ताज़ा खबर
 

Lok Sabha Election 2019: घरवाले नरेंद्र मोदी समर्थक, पर जानती हूं 2002 में उन्‍होंने क्‍या किया- फर्स्‍ट टाइम वोटर की बेबाक राय

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): तृष्णा से उलट उसकी मां का विचार बदलाव को लेकर है। उनका कहना है कि काफी समय से एक ही आदमी सत्ता में रहे यह सही नहीं है। बदलाव होने चाहिए।

तृष्णा सैकिया चुनावी बहस के दौरान भाई के दावों पर सवाल करती हैं।

Lok Sabha Election 2019: चुनाव में पहली बार वोट देने वाली तृष्णा सैकिया से उनका 16 साल का भाई चुनावी बहस कर रहा होता है। उसका दावा है कि मोदी सरकार ने देश विकास के लिए काफी काम किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने काफी संख्या में लोगों रोजगार भी दिए हैं। भाई की इस बात को सुनकर तृष्णा जोर से हंस पड़ती हैं। इस पर भाई अपने दावे को और मजबूत करने के लिए रोजगार संबंधी आंकड़ों का हवाला देता है। तब वह पूछती हैं, “रोजगार के मामले में क्या तुम पिछले हफ्ते आई NSSO की रिपोर्ट के बारे में जानते हो? रोजगार कितने सालों में सबसे कम हुआ है?” बहन के इस सवाल का भाई जवाब देते हुए कहता है, “शायद हो सकता है कि 2014 में हुआ हो।”

द इंडियन एक्सप्रेस की टीम गुवाहाटी में रहकर पढ़ाई करने वाली फर्स्ट टाइम वोटर तृष्णा सैकिया के साथ पूरा दिन बीता रही थी। तृष्णा का घर गुवाहाटी से 261 किलोमीटर दूर तेलग्राम में स्थित है। तेलग्राम वैसे तो एक गांव की तरह है, लेकिन यहां माहौल एक कस्बे की तरह भी है। तृष्णा इसके पीछे की वजह यहां पर स्थित रिफाइनरी को बताती हैं। वैसे तो तेलग्राम कलियाबोर लोकसभा क्षेत्र के तहत आता है और यहां गुरुवार (11 अप्रैल) को ही चुनाव संपन्न हो गया। लेकिन, चुनाव से पहले द इंडिया एक्सप्रेस की टीम ने जिन क्षेत्रों का दौरा किया, वहां पहली बार मतदान करने वाले युवाओं का जोश भी काफी था। असम की कुल 14 लोकसभा सीटों पर तकरीबन 7 लाख नौजवान पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। उन्हीं में से एक थीं तृष्णा सैकिया।

तृष्णा ने पहली बार वोट डालने से पहले अपना अनुभव साझा किया था। उन्होंने बताया था, “मैं वोट करूंगी। शायद मेरी बचपन की एक फैंटसी रही है कि मैं भी मतदान करूं।” लेकिन, इन सबसे अलग तृष्णा की राजनीतिक समझ भी काफी गहरी है। वह एक स्वस्थ लोकतंत्र में विश्वास रखती हैं। उनकी अपेक्षा है कि जो भी सरकार आए वह संप्रदायवाद और जातिवाद से दूर रहने वाली हो। साथ ही साथ महिलाओं की बराबरी और गरीबों की मुश्किलों को हल करने की इच्छाशक्ति हो। वैसे सैकिया व्यक्तिगत रूप से बीजेपी विरोधी हैं। लेकिन, उनके घर के बाकी सदस्य बीजेपी समर्थक हैं। उनके परिवार में उनके पिता, माता और छोटा भाई सभी बीजेपी को सपोर्ट करते हैं। वह कहती हैं, “मेरी मां एक टीचर हैं और मेरे पिता घर पर रहते हैं। छोटा भाई सैनिक स्कूल में पढ़ाई करता है।” वह कहती हैं, ” पहले हमारे विचार एक समान थे। लेकिन, अभी राजनीतिक रूप से हम काफी अलग विचार रखते हैं।”

तृष्णा के पिता बताते हैं कि उनके घर में ही एक राजनीतिक अखाड़ा तैयार रहता है। उनके मुताबिक, “जब मैं और मेरी बेटी राजनीति पर बात करते हैं तो यह चर्चा नहीं, बल्कि युद्ध होता है।” पिता की यह बात सुनकर तृष्णा काफी देर तक हंसती हैं। दरअसल, तृष्णा के माता-पिता को लगता है कि मोदी सरकार के आने के बाद विकास के काफी काम हुए हैं। जबकि, तृष्णा कहती हैं कि वर्तमान सरकार ने सिर्फ चेहरा चमकाने का काम किया है। जमीन पर काम हुए ही नहीं। वह कहती हैं, “मेरा परिवार मोदी को एक अलग और नया नेता के रूप में देखता है। वह उनके लिए बदलाव और विकास को यहां लाने वाले नेता हैं। लेकिन हम जानते हैं कि मोदी क्या हैं और 2002 में उन्होंने क्या किया है।”

तृष्णा से उलट उसकी मां का विचार बदलाव को लेकर है। उनका कहना है कि काफी समय से एक ही आदमी सत्ता में रहे यह सही नहीं है। बदलाव होने चाहिए। उनका कहती है, “क्या यहां सभी बदलाव नहीं चाहते? क्या हम हर दिन एक ही कपड़ा पहने रहना चाहते हैं?”

वहीं, भाई का सरकार के आंकलन का अपना अलग नजरिया है। उसके मुताबिक उसका स्कूल घर से 18 किलोमीटर दूर है और पहले सड़क काफी खराब थी। लेकिन, मोदी सरकार की वजह से सड़क अच्छी हो गई और यात्रा का समय भी बचता है। लेकिन, तृष्णा इससे भी इत्तेफाक नहीं रखतीं, वह अन्य मुद्दों की तरफ ध्यान आकर्षित करती हैं। उनका कहना है, “मोदी सरकार में विकास की जो भी बाते हुई हैं वह सिर्फ हवा-हवाई हैं। सिर्फ लोगों का ध्यान खींचने का काम किया गया है। जैसे कि बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं और ब्रिज का निर्माण है। यह इसलिए किया गया ताकि लोग अगले कार्यकाल के लिए उन्हें ही चुने। मुझे नहीं लगता कि लोगों के जीवन में कोई भारी बदलाव आया है। एजुकेशन और किसानों के लिए क्या किया गया है। किसानों की बदहाली को दूर करने का कोई ठोस काम नहीं किया गया। इस दौरान स्वतंत्र आवाजों को दबाने का काम किया गया। लोगों को एंटी नेशनल बताकर एनएसए लागू किया गया।”

तृष्णा सैकिया के अलावा गुवाहाटी और इसके आसपास के इलाकों में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की टीम ने पहली बार मतदान करने वाले अन्य वोटरों से भी बात की। वैसे तो यहां एनआरसी और नागरिकता संशोधन बिल बड़ा मुद्दा है। लेकिन, काफी लोगों का मानना है कि इसका चुनाव पर कोई असर होने वाला है। हालांकि, कुछ लोग यह जरूर मानते हैं कि नागरिकता संशोधन बिल की वजह से बीजेपी को खामियाजा उठाना पड़ सकता है। तेलग्राम के ही आलोक गोस्वामी (37) कहते हैं, “बीजेपी ने कहा था कि बांग्लादेशियों को अपना बोरिया-बिस्तर बांध लेना होगा। लेकिन, इसकी जगह वे और बांग्लादेशी ला रहे हैं।” इसके अलावा बाकी स्टूडेंट्स भी मिले, जिनका कहना था कि वह ऐसी सरकार का चुनाव करेंगे जो प्रैक्टिकल अप्रोच रखती हो।

Read here the latest Lok Sabha Election 2019 News, Live coverage and full election schedule for India General Election 2019

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App