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‘…जब मायावती ने कहा, आपलोग बैठिए कोलगेट करके आती हूं’, रुचिर शर्मा ने बताई दास्तां

Lok Sabha Election 2019: रुचिर शर्मा पिछले 28 चुनावों (विधान सभा और लोकसभा) से देशभर में सघन दौरे करते रहे हैं और उसके आधार पर राजनीतिक भविष्यवाणियां करते रहे हैं। इस बार के लोकसभा चुनावों में उनकी 28वीं राजनीतिक यात्रा है।

मायावती और अखिलेश यादव (फोटो सोर्स : इंडियन एक्सप्रेस)

Lok Sabha Election 2019: ग्लोबल इनवेस्टर और लेखक रुचिर शर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस के ‘एक्सप्रेस अड्डा’ प्रोग्राम में कहा कि देश में कुंवारे नेताओं की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में एक तिहाई भारतीय नेता अविवाहित हैं और उन पर सामाजिक दबाव है कि वो शादी करें। बतौर शर्मा अविवाहित होने की वजह से ही उनकी निजी जिंदगी में अधूरापन है। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसे नेता अपने बेडरूम में ही लोगों से मिलने-जुलने लगते हैं। उन्होंने बताया, “साल 2002 में बसपा नेता मायावती ने लोगों को सुबह-सुबह अपने बड़े से बेडरूम में ही बुलवा लिया था और जब लोग पहुंचे तो वहां स्टाफ के साथ वो मौजूद थीं। तब उन्होंने कहा था कि आपलोग बैठिए, मैं अभी कोलगेट करके आती हूं।” बतौर रुचिर शर्मा इस वाकये का जिक्र उन्होंने अपनी किताब में भी किया है।

बता दें कि रुचिर शर्मा पिछले 28 चुनावों (विधान सभा और लोकसभा) से देशभर में सघन दौरे करते रहे हैं और उसके आधार पर राजनीतिक भविष्यवाणियां करते रहे हैं। इस बार के लोकसभा चुनावों में उनकी 28वीं राजनीतिक यात्रा है। 2019 के लोकसभा चुनावों पर उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इस चुनाव से पहले कभी भी इस देश में लोग जातीय स्तर, धार्मिक स्तर, क्षेत्रीय स्तर या एक नेता के लिए कभी भी इस कदर एकजुट या लामबंद हुए हों।” उन्होंने कहा, “यात्रा के अंत तक, एक बड़ी निराशा थी, जब हमने मतदाताओं से यह पूछने की कोशिश की कि वे किसे वोट देंगे। तो उनका जवाब बहुत सरल और स्वभाविक सा था और बिल्कुल अनुमान के सटीक। जब आप उसका उपनाम जान जाते हैं तब आपको वास्तव में पता चल जाता कि वे किसे वोट देने जा रहे हैं क्योंकि जातीय ध्रुवीकरण ने इसे बहुत सरल बना दिया है। इस बारे में कोई विवाद भी नहीं है।”

उन्होंने कहा, “यूपी में जब आप एक उच्च जाति या गैर-दलित ओबीसी या गैर-जाटव अनुसूचित जाति के व्यक्ति से पूछते हैं कि वे किसे वोट देंगे, तो उसका जवाब (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) होगा लेकिन जब आप एक यादव, एक मुस्लिम या एक जाटव से पूछेंगे तो शक की कोई गुंजाइश के बिना उसका जवाब महागठबंधन होगा।”

शर्मा ने कहा कि इस चुनाव में एक फीसदी वोट का अंतर बहुत मायने रखने जा रहा है। बतौर रुचिर शर्मा अगर पब्लिक एक फीसदी ज्यादा वोट बीजेपी के पक्ष में करती है तो उसे 250 सीटें तक मिल सकती हैं, जिसका मतलब एनडीए सरकार की वापसी होगा लेकिन अगर एक फीसदी वोट बीजेपी का घटता है तो उसका आंकड़ा 200 सीटों के नीचे जा सकता है। इसका मतलब गैर बीजेपी सरकार हो सकता है। उन्होंने कहा, “भारत का लोकतंत्र मजबूत और संपन्न है, क्योंकि यहां न सिर्फ चुनाव में नतीजों की भविष्यवाणी करना मुश्किल है, बल्कि सरकार बहुत मजबूत स्थिति से लड़ रही है।”

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