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Lok Sabha Election 2019: पिछली बार कांग्रेस को जिताने वाली इन सीटों के मुसलमान नहीं बना पाए हैं मन, किसको करें वोट

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): माना जा रहा है कि मुस्लिम समुदाय के लोग आखिरी वक्त तक अपना कैंडिडेट फाइनल करेंगे ताकि मतगणना के वक्त उनका वोट नतीजों को प्रभावित करने की दिशा में मायने रखे।

Author Updated: April 30, 2019 10:45 AM
Lok Sabha Election 2019: लखीमपुर खिरी में कांग्रेस नेता जतिन प्रसाद(फोटो सोर्स- Twitter)

Lok Sabha Election 2019: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज स्थित परतावल बाजार में एक छोटे से आई क्लीनिक पर बैठे कुतुबुद्दीन कहते हैं, ‘यह बेवकूफी है।’ दरअसल, वह उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन से कांग्रेस के बाहर रहने से नाराज हैं। हालांकि, कांग्रेस के इस गठबंधन से अलग रहने को लेकर कुतुबुद्दीन और उनके दोस्त सैयद अली और नसरुल्लाह ही नाराज नहीं हैं। जिन निर्वाचन क्षेत्रों में 2009 में कांग्रेस जीती थी, वहां मुस्लिम समुदाय वोट देने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि मुस्लिम समुदाय के लोग आखिरी वक्त तक अपना कैंडिडेट फाइनल करेंगे ताकि मतगणना के वक्त उनका वोट नतीजों को प्रभावित करने की दिशा में मायने रखे। बता दें कि समाजवादी पार्टी ने महाराजगंज लोकसभा सीट से गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर अखिलेश सिंह को मैदान में उतारा है।

किसे वोट दें, इस माथापच्ची में कई बार फैसला लेने के लिए व्यवहारिक रवैया ही काम आता है। हालांकि, लोगों को यह भी उम्मीद भी है कि 2019 पिछली बार यानी 2014 जैसा तो बिलकुल नहीं होगा, जब यूपी से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं चुना गया। यहां बताना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश की आबादी में करीब 20 फीसदी हिस्सेदारी मुसलमानों की है। मुस्लिम वोटरों के इस उहापोह में कांग्रेस की संभावनाएं मजबूत होती दिखती हैं। समुदाय के लोगों को लगता है कि केंद्र में बीजेपी को टक्कर देने की सबसे ज्यादा गुंजाइश कांग्रेस पार्टी के पास है। कोठी कस्बे के रहने वाले मोहम्मद कज्जन कहते हैं, ‘महागठबंधन क्या कर सकता है? यह केंद्र सरकार का चुनाव है। समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनावों के लिए अच्छी है।’ वह बाराबंकी से चुनावी मैदान में उतरे सीनियर कांग्रेस नेता पीएल पुनिया के बेटे तनुज पुनिया को वोट देंगे। उनके आसपास मौजूद बाकी लोग भी कांग्रेस उम्मीदवार को लेकर हामी भरते नजर आते हैं। हालांकि, वह यह भी कहते हैं कि अगर आखिरी वक्त में महागठबंधन का प्रत्याशी मजबूत लगा तो वह कैंडिडेट बदल भी सकते हैं।

फैजाबाद संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले मुंगीशपुर में 6 मई को वोट पड़ेंगे। करीब 35 साल के अकबर अली कहते हैं कि 2009 के विजेता कांग्रेस के निर्मल खत्री इस बार समुदाय के लोगों की पहली पसंद नहीं हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस इस बार जीतने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस के लिए वोट देना मेरा वोट खराब करने जैसा है। अगर मैं सपा को वोट देता हूं तो वे वैसी भी केंद्र में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस को समर्थन देंगे।’ कुशीनगर संसदीय क्षेत्र के बैरिया में फरजान अली और उनके दोस्त भी प्रत्याशी को लेकर बेहद आश्वस्त नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘महागठबंधन में काफी खींचतान है। कांग्रेस के प्रत्याशी आरपीएन सिंह ज्यादा भरोसेमंद हैं।’ वहीं, डुमरियागंज संसदीय क्षेत्र के कठौतिया आलम गांव में अब्दुल महमूद कहते हैं, ‘सपा और बसपा क्षेत्रीय ताकतें हैं। वह अपनी 20 सीटों के साथ संसद में क्या करेंगे? वह सरकार बनाने में हमारे वोटों के जरिए मोलभाव करने में ही बेहतर हैं। ऐसे में सीधे कांग्रेस को ही क्यों न वोट दिया जाए?’ बता दें कि उन्नाव, अकबरपुर, धौरहरा, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, फैजाबाद, कुशीनगर, हर जगह मुस्लिम समुदाय कांग्रेस और महागठबंधन उम्मीदवार के बीच चुनाव को लेकर बहस में शामिल दिखा।

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