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Lok Sabha Election 2019: मासूम नातियों के हाथ में लालू प्रसाद यादव पर छपी किताब, फोटो शेयर कर बोलीं बेटी- कहानी उसकी, जो गरीबों-पिछड़ों के लिए लड़ा

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): बेटी ने इस ट्वीट के साथ तीन फोटो भी अपलोड किए। देखिए उनमें क्या-क्या दिखा।

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Lok Sabha Election 2019: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की आत्मकथा आ चुकी है। गुरुवार (11 अप्रैल, 2019) को इससे जुड़ा एक फोटो उनकी बेटी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया। तस्वीर में मासूम नातियों के हाथ में ‘गोपालगंज टू रायसीना’ थी, जिसमें आरजेडी चीफ की राजनीतिक यात्रा का पूरा लेखा-जोखा है। बेटी ने इस तस्वीर के साथ लिखा कि यह कहानी उस व्यक्ति की है, जो हमेशा गरीबों व पिछड़ों के लिए लड़ा और आगे आया।

राजलक्ष्मी यादव के टि्वटर हैंडल से लिखा गया, “गोपालगंज टू रायसीना…कहानी उसकी, जो समाज के ‘अंतिम व्यक्ति’ के लिए लड़ा।” बेटी ने इस ट्वीट के साथ तीन फोटो भी अपलोड किए। पहली में किताब के साथ उनकी सेल्फी थी, जबकि दूसरे फोटो में किताब का पन्ना था और तीसरी तस्वीर में दो नन्हे नाती किताब लिए एक-दूजे को देख रहे थे।

लालू की यह किताब ऐसे समय पर आई है, जब आम चुनाव का माहौल है। बताया जाता है कि उन्होंने इस किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और उनकी कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। यह रहा उनकी बिटिया का हालिया ट्वीट –

क्या है लालू की किताब में?: रूपा पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित गोपालगंज टू रायसीना में कुल 13 अध्याय हैं। इसमें लालू के संघर्ष से लेकर मंडल, मंदिर और मस्जिद की राजनीति तक का जिक्र किया गया है। वहीं, एक चैप्टर को ‘भारतीय रेलवेः दिवाला से दिवाली तक’ नाम दिया गया है। उन्होंने इसके अलावा महागठबंधन का प्रयोग और उसकी मुसीबतों से जुड़ा मसला भी इस किताब में उठाया है।

‘देश में है अघोषित आपात्काल’: ऑटोबायोग्राफी में लालू ने कहा है कि भारत में अघोषित आपातकाल का दौर है। यह 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल से अलग है, क्योंकि उन्होंने कभी भी विपक्षी नेताओं को राष्ट्र विरोधी या फिर गैर राष्ट्रवादी नहीं करार दिया। न ही उन्होंने अल्पसंख्यकों, दलितों और यहां तक कि पत्रकारों की हत्या कराई।

मोदी सरकार को भी घेरा: किताब में आगे उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। बोले हैं कि चूंकि देश में कोई आधिकारिक सेंसरशिप नहीं है, इसलिए कई मीडिया घराने (खासकर कॉरपोरेट घरानों द्वारा संचालित) मोदी सरकार की आलोचना करने वाले कार्यक्रमों और मतों को सामने लाने से झिझकते हैं।

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