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Lok Sabha Election 2019: दो साल पहले ये शख्स बंधुआ मजदूरी से हुआ था आजाद, अब पहली बार करेगा मतदान

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): तमिलनाडु के मरुथाडु गांव में रहने वाले 85 वर्षीय कन्नियप्पन इस बार पहली बार मतदान करेंगे। वे बताते हैं कि जब से उन्हें याद है वे तब से बंधुआ मजदूर के रूप में काम कर रहे थे।

कभी बंधुआ मजदूर रहे 85 वर्षीय कन्नियप्पन पहली बार करेंगे वोट प्रतीकात्मक फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

 Lok Sabha Election 2019: तमिलनाडु के तिरुवनमलाई के मरुथाडु गांव में रहने वाले कन्नियप्पन 18 अप्रैल को तमिलनाडु में होने वाले दूसरे चरण के आम चुनावों में पहली बार मतदान करेंगे। कन्नियप्पन 85 वर्ष के हैं। वे बताते हैं कि जब से उन्हें याद है वे तब से बंधुआ मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। कन्नियप्पन के मुताबिक वे उन 50 लोगों में शामिल थे जिन्हें दो साल पहले वेल्लोर, तिरुवन्नमलाई, कांचीपुरम और तिरुवल्लूर जिलों के तमिलनाडु राजस्व विभाग द्वारा बंधुआ मजदूरी से आजाद कराया गया था। इसके बाद एक एनजीओ ने उन्हें मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में मदद की।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक कन्नियप्पन ने कहा, ‘मैं उस समय किशोरावस्था में था जब मुझे लकड़ी काटने के लिए बंधुआ मजदूर बनाया गया था। इसके बाद कब दिन महीनों में बदल गए, महीने सालों में, साल दशकों में पता ही नहीं चला।’ कन्नियप्पन इरुला समुदाय से ताल्लुख रखते हैं। उन्होंने बताया कि वह और उनका परिवार वीरम्बक्कम नाम के गांव में बनी चारकोल की ईकाईयों में भी काम कर चुका हैं जहां से उन्हें बचाया गया था।

केवल अम्मा, एमजीआर और करुणानिधि ही यादः  जब कन्नियप्पन से पूछा गया कि क्या वह किसी राजनीतिक नेता को जानते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि वे केवल एमजीआर, करुणानिधि और अम्मा के बारें में जानते हैं। इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि अभी तमिलनाडु का मुख्यमंत्री कौन है तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। बता दें कन्नियप्पन का परिवार भी इस बार 14.33 लाख मतदाताओं के साथ अरनी लोकसभा क्षेत्र में मतदान करेंगे। इस क्षेत्र में एआईएडीएमके (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) और कांग्रेस पार्टी एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे हैं।

कौन होते हैं बंधुआ मजदूरः बंधुआ मजदूर वह लोग होते हैं जो कॉन्ट्रेक्ट के तहत काम करते हैं। इसमें ठेकेदार मजदूरों को एक अग्रिम राशि उधार में देते है जिसे न चुका पाने पर मजदूर कर्ज के जाल में फंस जाते हैं और उन्हें ठेकेदार के लिए आजीवन काम करना पड़ता है। कन्नियप्पन बताते हैं कि बंधुआ मजदूर रहते हुए उन्होंने कई जगहों पर जाकर काम किया। वे जंगल, खेतों में रहा करते थे। हालांकि अब हालात बदल चुके हैं अब आजाद कन्नियप्पन लकड़ियां काटकर 150 से 200 रुपये तक कमाकर अपना गुजर- बसर करते हैं।

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