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Lok Sabha Election 2019: पूर्व IAS शाह फैसल ने लॉन्च की नई राजनीतिक पार्टी, जेएनयू की पूर्व नेता शेहला राशिद ने थामा दामन

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): दोपहर को श्रीनगर में आयोजित कार्यक्रम में फैजल ने पार्टी के बारे में लोगों को जानकारी दी और उसे बनाने का मकसद बताया।

श्रीनगर में पूर्व आईएएस अफसर शाह फैजल के साथ मंच पर शहला राशिद। (फोटोः पीटीआई)

Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव से ऐन पहले जम्मू-कश्मीर में नई राजनीतिक पार्टी की एंट्री हो गई। रविवार (17 मार्च, 2019) को राज्य के मूल निवासी और पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अफसर शाह फैसल ने अपनी पार्टी लॉन्च की, जिसका नाम जम्मू एंड कश्मीर पीपल्स मूवमेंट है। दोपहर को श्रीनगर में आयोजित कार्यक्रम में फैसल ने पार्टी के बारे में लोगों को जानकारी दी और उसे बनाने का मकसद बताया। पूर्व आईएएस की पार्टी की स्थापना के साथ ही उसमें दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की पूर्व उपाध्यक्ष शेहला राशिद समेत कई युवा शामिल हुए।

फैसल ने लगभग दो माह पहले आईएएस पद से इस्तीफा दे दिया था। पार्टी की लॉन्चिंग के दौरान उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उनके राजनीतिक संघर्ष के लिए प्रशंसा करते हैं।

रिपोर्ट्स में फैसल के हवाले से कहा गया, “मैं मानता था कि सड़क, बिजली और पेयजल से हम लोगों की जिंदगी बदल सकते हैं, पर मैंने यह भी समझा कि कश्मीर के युवा में खौफ था। हमारी पार्टी पारदर्शी तरीके से काम करेगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ रहेगी और राजनीति से मुक्त रहेगी।”

पार्टी के विजन डॉक्यूमेंट के मुताबिक, इसे कश्मीर की समस्याओं के शांतिपूर्ण तरीके से हल निकालने के मकसद से बनाया गया है। यह कश्मीरियत की बात करेगी। पार्टी के विजन डॉक्यूमेंट के मुताबिक, इसे कश्मीर की समस्याओं के शांतिपूर्ण तरीके से हल निकालने के मकसद से बनाया गया है। यह कश्मीरियत की बात करेगी।

29 बिंदुओं वाले दस्तावेज में आगे कहा गया कि पार्टी राज्य में लोगों के विकास और अमन-चैन बरकरार रखने के लिए काम करेगी। इससे पहले, कयास लगाए जा रहे थे कि फैसल नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) में जा सकते हैं।

फैसल ने क्यों छोड़ दी थी IAS की नौकरी?: घाटी में मुस्लिमों की ‘हत्या’ के विरोध में उन्होंने जनवरी, 2019 में नौकरी छोड़ दी थी। फैसल ने इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) सरीखी एजेंसियों को बर्बाद करने का आरोप लगाया था।

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