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Lok Sabha Election 2019: गुजरात: 30 साल में एक भी मुसलमान लोकसभा से एमपी नहीं, बीजेपी ने टिकट ही नहीं दिया, कांग्रेस ने 14 चुनावों में बनाए 15 उम्मीदवार

1984 में कांग्रेस के नेता अहमद पटेल गुजरात से लोकसभा सांसद बनने वाले आखिरी मुस्लिम उम्मीदवार थे। इसके बाद से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल नहीं हो पाया। राजनीतिक दलों ने भी मुस्लिमों को टिकट में देने में कंजूसी दिखाई है।

Author Updated: April 5, 2019 10:52 AM
गुजरात में मुस्लिम आबादी 9.5 फीसदी है। लेकिन, पिछले 30 सालों से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाया है। (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

लोकसभा चुनावों में मुसलमानों को टिकट देने या विजयी बनाने में गुजरात काफी कंजूसी दिखाता रहा है। यहां से पिछले 30 सालों में एक भी मुसलमान उम्मीदवार लोकसभा के लिए नहीं चुना गया है। गुजरात से आखिरी बार 1984 में कांग्रेस पार्टी के अहमद पटेल गुजरात के भरूच से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। लेकिन, 1989 के लोकसभा चुनाव में अहद पटेल को बीजेपी के चंदू देशमुख ने 1.15 लाख वोटों के अंतर से हरा दिया। इसके बाद गुजरात से किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को लोकसभा में पहुंचने का मौका नहीं मिला। जबकि, यहां मुस्लिम आबादी 9.5 फीसदी है।

गुजरात में मुख्य राजनीतिक दल बीजेपी और कांग्रेस ने मुस्लिम उम्मीदवारों पर कम ही भरोसा दिखाया है। कांग्रेस ने कम से कम 14 चुनावों में 15 मुसलमानों को उम्मीदवार बनाया, जबकि बीजेपी ने एक को भी टिकट नहीं दिया। गुजरात राज्य के अस्तित्व में आने के बाद 1962 में लोकसभा चुनाव हुए। उस दौरान बनासकांठा से सिर्फ एक ही मुस्लिम उम्मीदवार (जोहरा चावड़ा) चुनाव जीतने में सफल रहे। इसके बाद 1977 में लोकसभा के लिए दो मुस्लिम सांसद चुने गए। भरूच से अहमद पटेल और अहमदाबाद से एहसान जाफरी। गौरतलब है कि गुजरात में मुस्लिम प्रतिनिधित्व की यह सबसे अधिक संख्या थी।

गुजरात के भरूच लोकसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है। वर्तमान में यहां पर 15.64 लाख मतदाता हैं, जिनमें से 22.2 फीसदी हिस्सा मुसलमानों का है। लेकिन, इस सीट पर 1962 से लगातार सिर्फ कांग्रेस ने 8 बार मुस्लिम प्रत्याशी उतारे। मगर तमाम मुस्लिम उम्मीदवारों में सिर्फ अहमद पटेल ही चुनाव जीतने में कामयाब रहे। पटेल 1977, 1982 और 1984 तक लगातार तीन बार सांसद रहे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गोधराकांड के बाद 2002 में हुए दंगों के बाद से स्थिति और भी बदल गई। 2014 लोकसभा चुनाव में गुजरात से कुल 334 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से 67 प्रत्याशी मुसलमान थे। लेकिन, इनमें से सिर्फ एक उम्मीदवार को कांग्रेस ने टिकट दिया था। बाकी 66 उम्मीदवार निर्दलीय या फिर समाजवादी पार्टी जैसे क्षेत्रीय दलों के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। ये उम्मीदवार पंचामहल, खेड़ा, आणंद, भरूच, नवसारी, साबरकांठा, जामनगर और जूनागढ़ सीट से मैदान में थे।

गुजरात के अलावा देश में भी मुस्लिम प्रतिनिधियों की काफी कमी है। 2014 लोकसभा चुनाव में पूरे देश से 22 मुस्लिम ही विजयी होकर संसद पहुंचे।आंकड़े बताते हैं कि मुस्लिम प्रत्याशियों को मिलने वाला वोट भी चुनाव दर चुनाव घटता ही गया है। 2009 में जहां मुस्लिम उम्मीदवारों को पूरे देश भर में 2.89 करोड़ (6.9%) वोट हासिल हुए, तो वहीं 2014 में यह आंकड़ा 2.78 करोड़ (5%) हो गया। वहीं राज्यों के क्रम की बात करें तो गुजरात के अलावा अन्य राज्यों में भी मुस्लिम प्रतिनिधित्व काफी घटा है। उदारण के तौर पर गुजरात के पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में ही 2009 के मुकाबले 2014 में मुस्लिम उम्मीदवारों को काफी कम वोट मिले। 2009 लोकसभा चुनाव में जहां 114 मुस्लिम उम्मीदवारों ने 13.1 लाख (करीब 3.53%) वोट हासिल किए, तो वहीं 2014 में 127 मुस्लिम उम्मीदवारों को 6.5 लाख (1.34%) वोट मिले। गौर करने वाली बात असम को लेकर है, यहां पर मुस्लिम आबादी 34 फीसदी है। लेकिन, यहां भी 2009 लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2014 में वोट 24.4 लाख से घटकर 19.6 लाख हो गया।

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