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Lok Sabha Election 2019: EVM पर ISI का नाम लेकर चुनाव आयोग ने किया सुप्रीम कोर्ट को गुमराह- कपिल सिब्बल का आरोप

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन में छेड़छाड़ को लेकर विपक्ष अकसर सवाल उठाता रहा है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का कहना है कि चुनाव आयोग ने ISI का नाम लेकर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया है।

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Lok Sabha Election 2019: पिछले कुछ सालों से विपक्षी दल ईवीएम में छेड़छाड़ की शिकायत करते रहे हैं। विपक्षी दल वीवीपीएटी स्लिप पर पिछले आदेश को लेकर समीक्षा याचिका डाल चुके हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में 21 राजनीतिक दलों के शीर्ष वकील के रूप में मामले की पैरवी कर रहे हैं।

सिब्बल का मानना है कि इस मामले में अभी तक निर्वाचन आयोग, सुप्रीम कोर्ट और सरकार का रुख निराशाजनक रहा है। पहले तीन चरण के चुनाव में बड़े पैमाने पर ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों के संबंध में टेलीग्राफ से बातचीत में सिब्बल ने कहा कि गलत वोट संबंधी दावे के गलत पाए जाने पर जेल भेजे जाने के क्लॉज के कारण वोटर शिकायत करने में हिचकिचाता है। यहां तक कि पूर्व डीजीपी ने जब कहा कि उन्होंने जिस उम्मीदवार को वोट दिया और पर्ची किसी और उम्मीदवार की निकली लेकिन इस क्लॉज के कारण ही उन्होंने शिकायत नहीं दर्ज कराई।

21 पार्टियों के कोर्ट जाने के कारण पर सिब्बल ने कहा कि हम गंभीर रूप से चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के लिए चुनाव परिणाम की घोषणा के लिए गिनती शुरू होना अधिक महत्वपूर्ण है बजाय कि इस आश्वासन के कि परिणाम में कोई गड़बड़ी नहीं है।

चुनाव आयोग का कहना है कि वीवीपीएटी स्लिप से 50 फीसदी गिनती में पांच से छह दिन लग जाएंगे और कोर्ट ने इस बात को स्वीकार भी कर लिया है। इस संबंध में चुनाव आयोग की तरफ से कोर्ट को गुमराह किए जाने पर सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग ने इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (आईएसआई) (कोलकाता मुख्यालय) की रिपोर्ट पेश की और सुझाया कि 49 मशीनों के रैंडम सैंपल में एक वीवीपीएटी निकालने से यह सुनिश्चित हो जाएगा कि चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं है। जबकि यह लॉजिक ही अजीब है।

इसमें सबसे चकित करने वाली बात है कि आईएसआई खुद इस स्टडी को खारिज कर चुका है। मैं इस मामले में चुनाव आयोग को चुनौती दे सकता हूं कि आयोग यह साबित कर दे कि आईएसआई ने यह स्टडी की है। उन्होंने इस मामले में अदालत को गुमराह किया है। सिब्बल का कहना है कि यदि पर्याप्त संख्या में वीवीपीएटी मशीनों की गिनती नहीं हो सकती है तो क्यों इस सिस्टम में करोड़ों रुपये का निवेश किया गया है।

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