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Lok Sabha Election 2019: प्रियंका के फैसलों से नाराज मायावती, यूं लगातार देती रहीं कांग्रेस को झटका

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): यूपी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के फैसलों ने मायावती को लगातार नाराज किया। प्रियंका के चाहे भीम आर्मी के प्रमुख से मिलना हो या फिर वाराणसी में निषाद और मल्लाहों से। प्रियंका के इन फैसलों के कारण ही मायावती ने यूपी में कांग्रेस से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया।

मायावती, (फोटो: इंडियन एक्सप्रेस)

Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव के लिए महत्वूर्ण माने जा रहे उत्तर प्रदेश में विपक्षी एकता की कोशिश कामयाब नहीं हो पाई। तमाम प्रयासों के बाद भी कांग्रेस के सपा-बसपा से इतर अकेले मैदान में लड़ने से समीकरण थोड़े भाजपा के पक्ष होना माना जा रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस के कॉलम में कूमी कपूर इसके लिए कांग्रेस के फैसले को जिम्मेदार मानती है। कांग्रेस में भी वह प्रियंका गांधी वाड्रा के फैसलों को मायावती के रुख के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार मानती हैं।

कूमी लिखती हैं कि बसपा प्रमुख मायावती आमतौर पर जब भी पुरुष राजनेताओं से मिलती है तो वे अपनी क्षमताओं से बढ़कर व्यवहार करती हैं। ऐसे में सामने वाला नेता बहनजी की जो प्रतिद्वंद्वी को नुकसान पहुंचाने की क्षमता है, उससे कही न कही भयभीत हो जाता है। लेकिन प्रियंका गांधी ने बिल्कुल सहज रहते हुए इस प्रकार को कोई भाव नहीं दर्शाया।

मायावती ने पूरे प्रचार प्रसार के साथ प्रियंका गांधी को कांग्रेस महासचिव बनाए जाने और उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभार दिए जाने के बाद अपनी तरह से प्रतिक्रिया दी। मायावती ने कांग्रेस के इस कदम के बाद तुरंत मध्यप्रदेश में अकेले सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। इससे पहले कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में यहां जीत दर्ज की थी।

इसके बाद मायावती ने अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से ध्यान हटाने के लिए उत्तर प्रदेश में कांग्रेस से गठबंधन की किसी भी प्रकार की संभावना से इनकार किए जाने इनकार कर दिया। हालांकि, मायावती पर गैर भाजपा दलों की तरफ से ऐसा नहीं करने का दबाव था। प्रियंका गांधी ने भीम आर्मी के दलित नेता चंद्रशेखर से अस्पताल में मुलाकात की।

इस मुलाकात के तुरंत बाद भीम आर्मी ने घोषणा की कि वह वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव में उतरेगी। इससे गुस्साई मायावती रायबरेली और अमेठी से भी सपा-बसपा उम्मीदवार उतारना चाहती थीं। मुश्किल यह थी कि ऐसा नहीं करने के लिए उन पर अखिलेश यादव का दबाव था। इसके तुरंत बाद जनता दल सेक्यूलर के महासचिव दानिश अली बसपा में शामिल हो गए।

प्रियंका गांधी की तरफ से प्रयागराज से वाराणसी की यात्रा के दौरान निषाद और मल्लाहों की तरफ से उनका स्वागत किया गया। मायावती ने इसे अपने वोट बैंक में सेंध लगाने के रूप में देखा। इसके लिए मायावती ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस के साथ वह कोई गठबंधन नहीं करेंगी। साथ ही उन्होंने यूपी की सात सीटों पर कांग्रेस की तरफ से समर्थन का ऑफर में भी रुचि नहीं दिखाई।

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