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Lok Sabha Election 2019: पीएम किसान योजना पर लगेगी रोक? मोदी सरकार ने चुनाव आयोग से मांगी सलाह

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के बाद से पीएम किसान योजना की रफ्तार सुस्त हो गई है। योजना को लागू करने के संबंध में गैर भाजपा राज्यों ने चुनाव आचार संहिता के कारण इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग की राय लेने को कहा है। ऐसे में केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर आयोग से राय मांगी है।

चुनावी तैयारियों के मद्देनजर पीएम किसान योजना से जुड़े आंकड़ों को अपडेट करने का काम धीमा हो गया है। फोटोः इंडियन एक्सप्रेस

Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार ने पीएम किसान योजना को लेकर निर्वाचन आयोग से सलाह मांगी है। केंद्र ने राज्य सरकार की तरफ से इस योजना में नए छोटे और सीमांत किसानों के नामों को शामिल करने को लेकर सलाह मांगी गई है। इस योजना के तहत ये किसान एक साल के दौरान तीन किस्त में 6000 रुपये के पात्र होंगे। भाजपा शासित राज्यों को छोड़कर कई अन्य पार्टी शासित राज्यों ने या तो कुछ ही नाम या योग्य किसानों की सूची ही नहीं भेजी है।

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार ये राज्य चाहते हैं कि चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद इस योजना के संबंध में निर्वाचन आयोग की राय ले ली जाए। यदि इस योजना पर रोक लग जाती है तो गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश के किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए लंबा इंतजार करना होगा। जबकि अन्य राज्यों के किसान जल्द ही अप्रैल में 2000 रुपये की दूसरी किस्त के हकदार हो जाएंगे।

इस योजना के तहत पहली किस्त का लाभ पाने वालों में 65 फीसदी से भी अधिक किसान भाजपा शासित राज्यों में हैं जबकि कुछ किसान पंजाब व अन्य दक्षिण राज्यों से संबंधित हैं । इस घटनाक्रम के जानकार सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग की जवाब का इंतजार कर रही है। कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने इस मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

हालांकि, उन्होंने इस योजना के तहत दी गई राशि का विवरण देने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि हमें 4.76 करोड़ किसानों का डाटा मिला था। इसमें से पहले चरण में चार करोड़ किसानों से जुड़ी जानकारी की पुष्टि हो गई है।
इनमें से 2.76 करोड़ किसानों को 2000 रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है। सूत्रों का कहना है चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद से इस योजना की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। सरकारी मशीनरी की तरफ से चुनाव की तैयारियों में जुटने के कारण राज्य सरकारों की तरफ से किसानों की जानकारी अपडेट करने की रफ्तार में कमी आई है।

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