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10 साल बाद फिर साइकिल थाम सकते हैं संजय दत्त, गाजियाबाद से चुनाव लड़ने की चर्चा

Lok Sabha Election 2019: संजय दत्त ने 2009 के चुनावों में तत्कालीन सीएम मायावती को जादू की झप्पी देने की बात कही थी, जिस पर राजनीतिक बवाल हुआ था।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ संजय दत्त। (एक्सप्रेस आर्काइव)

Lok Sabha Election 2019: बॉलीवुड अभिनेता और समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव संजय दत्त फिर से साइकिल की सवारी कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वो दिल्ली से सटे गाजियाबाद से 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। वो सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार होंगे। बता दें कि इससे पहले साल 2009 में भी संजय दत्त ने लखनऊ से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का एलान किया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई धमाकों में दोषी होने की वजह से उनकी उम्मीदवारी खारिज कर दी थी। उस वक्त अमर सिंह संजय दत्त को लेकर सपा में आए थे। उन्हें सपा का महासचिव बनाया गया था। इस बार चर्चा है कि सपा किसी फिल्मी हस्ती को गाजियाबाद से उतारना चाहती है। लिहाजा, संजय दत्त का नाम आगे आया है। अगर ऐसा होता है तो पिता सुनील दत्त, मां नरगिस और बहन प्रिया दत्त के बाद वो परिवार के चौथे सदस्य होंगे से जिनकी चुनावी रणभूमि में एंट्री होगी।

2014 के चुनावों में गाजियाबाद से बीजेपी के रिटायर्ड जनरल वीके सिंह ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के राजबब्बर को 5,67,260 मतों के भारी अंतर से हराया था। वी के सिंह को कुल 7,58,482 वोट मिले थे, जबकि राजबब्बर को मात्र 191,222 वोट मिले थे। सपा के सुधन रावत ने 1,06,984 और बसपा के मुकुल उपाध्याय ने 1,73,085 वोट हासिल किए थे। चौथे नंबर पर आप की शाजिया इल्मी रही थीं। सपा-बसपा के बीच सीट बंटवारे में गाजियाबाद सपा के खाते में गई है। भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री वी के सिंह उम्मीदवार हो सकते हैं। संजय दत्त के पिता सुनील दत्त लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे। वो मनमोहन सिंह की यूपीए-1 सरकार में युवा एवं खेल मंत्री भी थे। बहन प्रिया दत्त भी दो बार कांग्रेस से सांसद रही हैं।

59 साल के संजय दत्त का गाजियाबाद से वैसे तो कोई राजनीतिक कनेक्शन नहीं है लेकिन साल 2013 में उन्होंने फिल्म ‘जिला गाजियाबाद’ में लीड रोल किया था। इस फिल्म में गाजियाबाद में होनेवाली गुंडागर्दी के बारे में बताया गया था। संजय दत्त ने 2009 के चुनावों में तत्कालीन सीएम मायावती को जादू की झप्पी देने की बात कही थी, जिस पर राजनीतिक बवाल हुआ था मगर इस बार मायावती और अखिलेश यादव के बीच गठबंधन हो चुका है।

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