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Election 2019: जीत के लिए आश्वस्त है NDA, लेकिन विपक्षी दलों ने भी शुरू की गठबंधन की कवायद, जानें कौन-किसके साथ

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): एक ओर जहां एनडीए सत्ता में वापसी के लिए आश्वस्त है तो वहीं दूसरी ओर यूपीए अपनी जीत का दावा कर रही है। लेकिन इन सबके बीच तीसरे मोर्चे की सरकार की सुगबुगाहट भी तेज हो रही है।

lok sabha election, 2019, bjp, congress, एक मंच पर नजर आए तमाम राजनीतिक दलों के नेता फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव में अब सिर्फ आखिरी चरण का मतदान होना शेष रहा गया है। ऐसे में जहां एक ओर सत्ताधारी दल बीजेपी (NDA) एक बार फिर से अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है तो वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (UPA) सत्ता में वापसी का दावा कर रही है। लेकिन इन दोनों के अलावा देश में कई राजनीतिक दल ऐसे भी हैं जो चुनाव परिणाम आने से पहले ही तीसरे मोर्चे की सरकार बनने की बात कह रहे हैं। इनमें से कई नेता अभी से मोर्चेबंदी में लग चुके हैं। हालांकि 23 मई के बाद ही यह साफ पाएगा कि देश में किस पार्टी की सरकार बनेगी लेकिन इससे पहले आइये जानते हैं कि कौन सी वो पार्टियां हैं जो सरकार बनाने में किंगमेकर की भूमिका अदा कर सकती हैं।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)-

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी): देश में इस समय पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए की सरकार चल रही है। एनडीए में सबसे बड़े दल के रूप बीजेपी की प्रमुख भूमिका है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले 282 सीटें जीती थीं।

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ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK): 2014 के चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा सीटें लाने वाली तीसरी सबसे बड़ी पार्टी और दक्षिण भारत में मोदी सरकार का सबसे बड़ा साथी एआईएडीएमके है। दक्षिण भारत शुरू से ही बीजेपी का सबसे कमजोर क्षेत्र रहा है। एआईएडीएमके ने पिछली बार लड़ी गई 40 सीटों में से 37 पर जीत हासिल की थी। हालांकि 2016 में पार्टी की करिश्माई नेता जयललिता की मृत्यु उसके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।

शिवसेना: बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगियों में से एक महाराष्ट्र की शिवसेना से पार्टी के अच्छे संबंध हैं। बीच में दोनों पार्टियों के मध्य आई तल्खी के बाद एक बार से लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन हुआ है। बता दें कि 2014 में शिवसेना ने 18 लोकसभा सीटें जीती थीं, जो देश में छठी सबसे बड़ी पार्टी थी।

लोक जनशक्ति पार्टी: बिहार की लोक जनशक्ति पार्टी ने पिछली बार लड़ी गई सात सीटों में से छह पर जीत हासिल की थी। इस पार्टी का समाज के निचले तबकों (दलितों) में काफी प्रभाव माना जाता है। ऐसे में इस बार के चुनाव में भी लोक जन शक्तिपार्टी के नतीजों का एनडीए पर खासा असर पड़ेगा।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA)-

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: देश में इस समय ​​मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस प्रमुख है। सबसे अधिक समय तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस को 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने करारी शिकस्त दी थी। कांग्रेस 464 सीटों में से केवल 44 सीटें जीतने में सफल हुई थी। इस बार कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है और सरकार बनाने का दावा भी कर रही है।

अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी): ​​1997 में कांग्रेस छोड़ने के बाद पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने खुद की एक पार्टी बनाई थी जिसका नाम अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस रखा। देश में इस समय टीएमसी 34 लोकसभा सीटों के साथ संसद में चौथी सबसे बड़ी पार्टी है। मौजूदा समय में ममता बनर्जीा और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के मुखिया चंद्रबाबू नायडू के साथ पीएम मोदी के सबसे बड़े आलोचकों में से एक हैं। दोनों ही विपक्षी गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। टीडीपी ने 2014 में 16 सीटें जीती थीं।

समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा): सपा और बसपा इन दोनों ही पार्टियों का देश के सबसे बड़े सूबे (लोकसभा सीटों के लिहाज से) उत्तर प्रदेश में दबदबा है। दोनों ने ही बारी-बारी से प्रदेश में सरकारें चलाईं हैं। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा ने पांच सीटें जीती थीं, जबकि बीएसपी का खाता नहीं खुला था। इस बार सपा-बसपा दोनों साथ मिलकर चुनाव लड़ रहें हैं।

कौन हो सकते हैं किंगमेकर-

बीजू जनता दल (बीजेडी): देश के पूर्वी राज्य ओडिशा में बीजेडी 20 लोकसभा सीटों के साथ पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी है। चुनाव के मद्देनजर टीडीपी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू, बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक से बातचीत कर रहे हैं। लेकिन इन सबके के बीच पीएम मोदी ने हाल ही में चक्रवाती तूफान के दौरान राज्य की तैयारियों के लिए नवीन पटनायक की तारीफ की थी। जिसको लेकर राजनीतिक विश्लेषक एनडीए की चुनाव बाद तैयारी देख रहे हैं। हालांकि बीजेडी का कहना है कि वह नतीजों के बाद ही कुछ भी कहने की स्थिति में होगा।

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस): टीआरएस ने पिछले चुनाव में लोकसभा की 11 सीटें जीती थी। फिलहाल वह बीजेपी और कांग्रेस दोनों को बाहर रखते हुए क्षेत्रीय दलों के साथ एक महागठबंधन खड़ा करने की संभावना तलाश रही है। इसको लेकर उसने अभी से कवायद भी शुरू कर दी है।

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