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Lok Sabha Election 2019: नतीजों से पहले ‘डिनर पॉलिटिक्स’, मेहमानों की लिस्ट से चौंकाएंगे अमित शाह!

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): लोकसभा चुनाव परिणाम की घोषणा से पहले अमित शाह एनडीए के नेताओं को डिनर पर आमंत्रित कर रहे हैं। इस डिनर पॉलिटिक्स में शाह मेहमानों की लिस्ट से 'चौंका' सकते हैं।

अमित शाह ने अपने घर पर एनडीए सदस्यों के लिए डिनर का आयोजन किया है। (फाइल फोटो)

Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव के नतीजों की 23 मई को घोषणा होने से पहले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) अपनी एकजुटता दिखाना चाहता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इसके लिए अपने घर पर मंगलवार को डिनर का आयोजन करने वाले हैं। इसमें एनडीए के सभी नेता शामिल होंगे।

भाजपा की तरफ से एग्जिट पोल के आंकड़े और चुनाव परिणाम में अंतर की सूरत में अपने कुनबे को मजबूत करने की कवायद भी चल रही है। विपक्ष की सक्रियता को देखते हुए भाजपा ने भी एनडीए का कुनबा बढ़ाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। बताया जा रहा है कि इसकी बानगी एनडीए की बैठक में शामिल मेहमानों की लिस्ट में देखने को मिल सकता है।

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह एनडीए की मेहमानों की सूची से सबको चौंका सकते हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि एनडीए में उन दलों को शामिल करने की कोशिशें चल रही हैं जो अब तक न एडीए में हैं और ना ही यूपीए में शामिल हैं।

नवीन पटनायक से की बातः बताया जा रहा कि रविवार को अमित शाह ने रविवार को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बात की। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत करीब 20 मिनट चली। दैनिक भास्कर समाचार पत्र के अनुसार अमित शाह ने पटनायक को पिछली कड़वाहट भुलाकर एनडीए में शामिल होने का प्रस्ताव भी दिया। हालांकि, नवीन पटनायक ने इस बारे में अभी कोई जवाब नहीं दिया है।

ये हो सकती है भाजपा की रणनीतिः पार्टी की रणनीति में अभी तक दोनों खेमों बाहर चल रहे दलों को साधने की हो सकती है। इसमें सबसे पहला नाम तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव हो सकते हैं। राव चुनाव के पहले ही तीसरे फ्रंट का गठन करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। इसके अलावा आंध्र में नायडू को टक्कर देने वाले वाईएस जगनमोहन रेड्डी पर भी भाजपा नजरें जमा सकती हैं।

विपक्ष में जारी है गोलबंदीः कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने एग्जिट पोल के नतीजों को खारिज कर दिया है। यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की कमान संभाल ली है। कांग्रेस किसी भी कीमत पर मोदी को सत्ता में वापस नहीं आने देना चाहती है।

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