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Lok Sabha Election 2019: कभी इन सभी आदिवासी सीटों पर किया था क्लीनस्वीप, अबकी बीजेपी की हालत पतली!

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): भाजपा को महाराष्ट्र में आदिवासी सीटों पर कड़ा मुकाबला मिलने की उम्मीद है। राज्य की चार आदिवासी सीटों में से पार्टी पहले ही एक सीट अपनी सहयोगी शिवसेना को दे चुकी है। चार में दो सीटों पर पार्टी के मौजूदा सांसद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।

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Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव में सभी दल प्रचार के साथ ही अलग-अलग सीटों पर जीत-हार का गणित लगाने में जुटे हुए हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने महाराष्ट्र की सभी आदिवासी सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी को इस चुनाव में अपना पिछला प्रदर्शन दोहराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।

इस बार भाजपा पहले से ही मुश्किल में दिखाई दे रही है। पार्टी पालघर लोकसभा सीट पहले ही अपनी सहयोगी शिव सेना को दे चुकी है। राज्य में लोकसभा की 48 सीटें हैं। इनमें से चार सीटों अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। ये चार सीटें नंदूरबार, डिंडोरी, गढ़चिरौली-चीमूर और पालघर हैं।

इन सभी सीटों पर 80 फीसदी से अधिक आदिवासी वोटर हैं। नंदूरबार कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ रहा है। भाजपा की मौजूदा सांसद हीना गावित यहां से कांग्रेस के केसी पडावी के साथ मुकाबला कर रही हैं। नंदूरबार में कांग्रेस को अपने दिग्गज आदिवासी नेता व नौ बार के सांसद माणिक राव गावित के पार्टी से नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ा था।

उत्तर महाराष्ट्र का डिंडोरी संसदीय क्षेत्र पिछले साल आदिवासियों के लंबे मार्च को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा था। यहां इस बार भाजपा के लिए राह आसान नहीं लग रही है।

सत्ता विरोधी लहर को थामने के लिए पार्टी ने अपने तीन बार के सांसद हरीशचंद्र चौहान के स्थान पर एनसीपी की पूर्व उपाध्यक्ष भारती पवार को मैदान में उतारा है। पवार हाल ही में भाजपा में शामिल हुई हैं। पवार पिछली बार भाजपा के ही हरीशचंद्र से एनसीपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव हार गई थीं।

एनसीपी ने यहां से पूर्व शिवसेना सांसद धनराज महाले को उतारा है। सीपीएम का भूमिहीन आदिवासियों में अच्छा प्रभाव माना जाता है। पार्टी ने यहां से विधायक जी. पांडु गावित को टीकट देकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। कांग्रेस और एनसीपी, भाजपा को यहां दलित विरोधी के रूप में पेश कर रही हैं।

गढ़चिरौली- चिमूर माओवाद प्रभावित इलाके रूप में जाना जाता है। भाजपा को यहां नई खनन नीति के साथ ही विकास के दम पर चुनाव जीतने का भरोसा है। यहां भाजपा उम्मीदवार अशोक नेते का मुकाबला कांग्रेस के नामदेव उसांडी से है। वहीं पालघर में भाजपा को शुरुआत में ही झटका लगा। चुनाव पूर्व गठबंधन के कारण पार्टी को यह सीट शिवसेना को देनी पड़ी।

भाजपा के मौजूदा सांसद राजेंद्र गावित यहां शिवसेना में शामिल हो गए। इसके बाद शिवसेना ने उन्हें यहां से उम्मीदवार बना दिया है। कांग्रेस-एनसीपी ने यह सीट अपने सहयोगी बहुजन विकास अगाड़ी को दे दी है। यहां से अगाड़ी की तरफ से बलिराम जाधव मुकाबले में हैं।

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