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Lok Sabha Election 2019: राम मंदिर मुद्दे पर हुई ऐसी बहस कि भिड़ गए जेडीयू नेता और भाजपाई, हो गई हाथापाई

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर मुद्दे को लेकर एनडीए के सहयोगी दलों में मतभेद उभर का सामने आ रहा है। बिहार के हाजीपुर में इस मुद्दे को लेकर भाजपा और जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच जमकर हाथापाई हुई।

हाजीपुर से लोजपा ने राम विलास पासवान के भाई को पशुपति कुमार पारस उम्मीदवार बनाया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Lok Sabha Election 2019: बिहार में भाजपा और जदयू के बीच भले ही गठबंधन हो गया हो लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल देखने को नहीं मिल रहा है। इस क्रम में बिहार के हाजीपुर में राम मंदिर के मुद्दे पर शुक्रवार को ऐसी बहस हुई की भाजपा और जदयू के कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए।

भाजपा कार्यकर्ता जदयू नेता के राम मंदिर को लेकर दिए गए बयान के बाद भड़क गए। सभा में जदयू नेता संजय वर्मा ने एक संयुक्त बैठक में कहा कि मंदिर मुद्दा प्रचार की मुख्य रणनीति में शामिल नहीं होना चाहिए। दोनों दल के कार्यकर्ता न सिर्फ मंच पर चढ़ गए बल्कि एक दूसरे पर टेबल व कुर्सियां भी फेंकने लगे। लोजपा उम्मीदवार ने कार्यकर्ताओं को शांत करने की कोशिश की।

हाजीपुर सीट एनडीए के दलों के बीच हुए समझौते के अंतर्गत राम विलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी के खाते में आई है। लोजपा ने इस सीट से पार्टी प्रमुख के छोटे भाई पशुपति कुमार पारस को उम्मीदवार बनाया है। पारस राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री भी है।

मालूम हो कि राज्य में भागलपुर, कटिहार, बेगूसराय जैसी कई ऐसी सीटें हैं जो पहले भाजपा के पास थी लेकिन समझौते के तहत जदयू के खाते में आ गई हैं। ऐसी सीटों पर भाजपा का कार्यकर्ता जदयू उम्मीदवार को समर्थन करने से इनकार कर रहे हैं।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व अपने स्तर पर स्थानीय नेताओं को समझाने की कोशिश में जुटे हुए हैं लेकिन इसमें उन्हें खास सफलता मिलती दिखाई नहीं दे रही है। पार्टी को इन सीटों पर भितरघात का डर सता रहा है। बात अगर कटिहार सीट की करें तो समझौते के अंतर्गत यह सीट जदयू के खाते में आई है। जदयू ने यहां से दुलाल चंद्र गोस्वामी को मैदान में उतारा है।

महागठबंधन बन जाने के बाद से इस सीट से समीकरण बिल्कुल बदल गए हैं। महागठबंधन की तरफ से तारिक अनवर मैदान में है। तारिक इस सीट से पांच बार सांसद रह चुके हैं। पिछली बार उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की तरफ से इस सीट पर जीत दर्ज की थी। इस बार वे पाला बदलकर फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। इस सीट पर मुस्लिम आबादी करीब 39 फीसदी है।

इसके अलावा 35 फीसदी मतदाता पिछड़ा व अति पिछड़ा वर्ग से हैं। दूसरी तरफ भागलपुर में भी एनडीए की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। समझौते के तहत यह सीट भी जदयू के खाते में ही आई है। यहां का व्यापारी वर्ग भाजपा को छोड़कर किसी अन्य दल को समर्थन करने को तैयार नहीं है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे व्यापारियों को मनाने में जुटे हुए हैं।

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