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Lok Sabha Election 2019: बिहारः भाजपा ने 19 सीटों पर किया अंदरूनी आंकलन, पाया- एनडीए पर भारी पड़ रहा विरोधी गठबंधन

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): बिहार में भाजपा को अति पिछड़े समुदाय के वोट गंवाने का डर सता रहा है। पाटी के अंदरूनी सर्वे में यह बात सामने आई है राज्य की 19 सीटों पर महागठबंधन एनडीए के मुकाबले मजबूत दिखाई दे रहा है।

बिहार में चुनावी सभा के दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह व गिरिराज सिंह। (फाइल फोटो)

Lok Sabha Election 2019: बिहार लोकसभा चुनाव में भाजपा की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। पार्टी के यह डर सता रहा है विरोधी महागठबंधन उसके अति पिछड़ा वर्ग के वोटों में सेंध लगा सकता है।  पीएम नरेंद्र मोदी ने 30 अप्रैल को मुजफ्फर पुर की रैली में सत्ता में वापसी पर मल्लाह समुदाय अलग से मछलीपालन मंत्रालय का वादा किया है।

पीएम के इस वादे को भाजपा की चिंता से जोड़कर देखा जा रहा है। पीएम ने यह भी जिक्र किया कि सरकार ने स्थानीय सहनी (मल्लाह, निषाद जाति) के नेता भगवान लाल सहनी को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग का अध्यक्ष बनाया है। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि पार्टी के अंदरूनी आंकलन में यह पाया गया है कि राज्य की 19 सीटों पर महागठबंधन के सहयोगी अपनी-अपनी जाति के वोट एक दूसरे पार्टियों को ट्रांसफर करने में कामयाब होते दिख रहे हैं।

ऐसे में महागठबंधन भाजपा पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। महागठबंधन में कांग्रेस और आरजेडी के अलावा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्यूलर) और मुकेश सहनी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल है। ये सभी दल अपनी-अपनी जातियों का समर्थन हासिल कर रहे हैं।

मुस्लिम, यादव वोटों पर राजद की पकड़ मजबूतः गठबंधन का सीपीआई (एमएल) से भी तालमेल है जो आरा सीट से चुनाव मैदान में है। माना जाता है कि राजद की मुस्लिम (17 फीसदी) और यादव (14 फीसदी), कांग्रेस की अगड़ी जातियां (12 फीसदी) और दलित (16 फीसदी), रालोसपा के कुशवाहा (8 फीसदी) और माझी का उनके मुसहर समुदाय (2.5 फीसदी) में पकड़ है।

जबकि सहनी (करीब 8 फीसदी) वोट खींच सकते हैं। इसलिए महागठबंधन जातिगत गणित को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रहा है। इसके अलावा एनडीए के पूर्व सहयोगी जीतन राम मांझी और कुशवाहा भी अपनी रैलियों में भीड़ को खींचने में कामयाब दिखाई दे रहे हैं।

रालोसपा, हम, वीआईपी को नहीं दी थी तव्वज्जोः इससे पहले चुनाव प्रचार की शुरुआत में रालोसपा, हम और वीआईपी को जदयू कोई तव्वज्जो नहीं दे रहे थे। इन दलों के बारे में पूछे जाने पर जदयू के एक नेता ने ‘सड़क पर चलते हुए लोग’ बताया था।हालांकि, भाजपा नेता ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में यह स्वीकार किया, ‘हमने सुना है कि वीआईपी खगड़िया में, अब्दुल बारी सिद्दिकी दरभंगा में समस्तीपुर में कांग्रेस के अशोक राम अच्छा कर रहे हैं। हमें कुशवाहा, सहनी और मांझी वोट के बंटने से थोड़ी चिंता है।’ वहीं जेडीयू नेता ने भी इस बात को स्वीकार किया कि महागठबंधन का  ‘सामाजिक गणित’ एनडीए के ‘विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे’ को कड़ी चुनौती दे रहा है।

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