Maharashtra: माओवादियों ने की BJP प्रत्याशी को वोट नहीं करने की अपील, बताया बाहरी उम्मीदवार

Lok Sabha Election 2019: महाराष्ट्र में अक्सर चुनावों का बहिष्कार करने वाले माओवादी इस बार चुनाव बहिष्कार की जगह लोगों को बीजेपी के खिलाफ वोट करने की अपील कर रहें हैं।

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लोकसभा चुनाव 2019 महाराष्ट्र की गढ़चिरौली-चिमूर लोकसभा सीट फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव 2019 में पहले चरण के तहत गुरूवार (11 अप्रैल) को मतदान की प्रक्रिया शुरू होगी। लेकिन इस बीच महाराष्ट्र की नक्सल प्रभावित आरक्षित (एसटी) गढ़चिरौली-चिमूर लोकसभा में माओवादियों ने बीजेपी को छोड़कर और किसी भी पार्टी को वोट देने का फरमान जारी किया है। वैसे तो आमतौर पर माओवादी चुनाव बहिष्कार की अपील बयान या पोस्टर के जरिए करते हैं लेकिन इस बार के चुनाव में वो गोपनीय तरीके से बोलकर बीजेपी को वोट ना देने की बात कह रहे हैं। बता दें कि माओवादियों ने चुनाव की तारीखों की घोषणा होने से पहले ही बीजेपी के खिलाफ अभियान चलाना शुरू कर दिया था। हालांकि यहां के मतदाता किसी भी चुनाव बहिष्कार की अपील को नहीं मानते और भारी संख्या में वोट करने घरों से निकलते हैं। ऐसे में पिछले चुनाव की भांति ही क्या इस बार भी माओवादियों की अपील का कोई असर नहीं होगा ये देखने वाली बात होगी? आदिवासी कार्यकर्ता ने बीजेपी उम्मीदवार का विरोध करते हुए बताया कि अशोक एक बाहरी व्यक्ति है जबकि कांग्रेस के उसेंडी मादिया-गोंड जनजाति के हैं।

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गढ़चिरौली-चिमूर का गणित: बता दें कि आदिवासी बहुल गढ़चिरौली-चिमूर सीट में 37 फीसदी आदिवासी मतदाता रहते हैं। इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र की सीमा छत्तीसगढ़ और तेलंगाना से लगती है। इस निर्वाचन क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र गढ़चिरोली, अहेरी, अरमोरी (गढ़चिरोली में), ब्रह्मपुरी और चिमूर (चंद्रपुर में) और आमगांव (गोंदिया) आते हैं। यहां अगर मतदाताओं की कुल संख्या की बात करें तो ये संख्या 15.8 लाख है। यहां की एक विधानसभा क्षेत्र ब्रह्मपुरी पर कांग्रेस के विजय वेट्टियटवार का कब्जा जबकि बाकी सभी बीजेपी के पास हैं।

कांग्रेस के दबदबे वाली सीट: बता दें कि मौजूदा गढ़चिरौली-चिमूर सीट 1967 में चिमूर लोकसभा सीट के रूप में अस्तित्‍व में आई थी। तबसे 2014 तक कांग्रेस यहां से 7 बार चुनाव जीत चुकी है जबकि बीजेपी का इस सीट पर पांच बार कब्‍जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के अशोक नेते को 5.35 लाख वोट मिले थे तो वहीं कांग्रेस के नामदेव उसेंडी को 2.99 लाख वोट मिले थे। इस बार उसेंडी फिर से कांग्रेस उम्मीदवार हैं तो अशोक नेते बीजेपी की तरफ से मैदान में है। इस दौरान चुनाव से पहले गढ़चिरौली में लगभग 1,400 ग्राम सभाओं ने कांग्रेस उम्मीदवार उसेंडी को अपना समर्थन देने की घोषणा की है।

आदिवासी कार्यकर्ता के मुताबिक उसेंडी ने चुनाव जीतने पर उनकी मांगों पर अमल करने की बात कही है। बता दें कि उनकी मांगों मांगों में फसली ऋण माफी, वंचित लोगों को वन अधिकार, बिजली की आपूर्ति, सीआरपीसी की धारा 110 को हटाने, पुलिस अत्याचारों को रोकना और आंतरिक क्षेत्रों में पुलिस थानों की स्थापना पर रोक आदि शामिल है।

बीजेपी नेता का बयान: बता दें कि बीजेपी के माओवादियों के विरोध करने पर पार्टी उम्मीदवार अशोक नेते ने कहा, “माओवादियों ने मेरा विरोध नहीं किया। मुझे उनसे कभी कोई समस्या नहीं हुई। मैं केवल उनसे विकास की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील करूंगा। हम उनके मुद्दों को हल करेंगे।” लेकिन एक आदिवासी कार्यकर्ता ने उनका विरोध करते हुए बताया कि अशोक एक बाहरी व्यक्ति है जबकि कांग्रेस के उसेंडी मादिया-गोंड जनजाति के हैं।

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