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Lok Sabha Election 2019: ‘बीजेपी कर रही बुजुर्ग नेताओं का अपमान’, ट्वीट पर अरविंद केजरीवाल को लोगों ने दिलाई अन्‍ना हजारे की याद

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): केजरीवाल का हालिया ट्वीट बीजेपी के उस फैसले पर आया, जिसमें पार्टी ने अपने दो वरिष्ठ नेताओं को टिकट नहीं दिया। इनमें लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के नाम शामिल हैं।

केजरीवाल के आलोचक उन पर अन्ना हजारे को दरकिनार करने का आरोप लगाते रहे हैं। (फाइल फोटोः एजेंसी)

Lok Sabha Election 2019: दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जुबानी हमला बोल खुद ही लोगों के सवालों के घेरे में आ गए। आम चुनाव में बीजेपी द्वारा बुजुर्गों को टिकट न देने पर उन्होंने ट्वीट किया। कहा कि बीजेपी को जिन लोगों ने बनाया, उसी से बुजुर्गों को बाहर का रास्ता दिखा गया। जो अपने बुजुर्गों का न हुआ, वह क्या हिंदू संस्कृति का सम्मान करेगा।

सीएम की इसी टिप्पणी को लेकर टि्वटर यूजर्स ने उन्हें निशाने पर ले लिया। लोगों ने समाजसेवी अन्ना हजारे का जिक्र छेड़ा और पूछा कि आपने भी तो इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) आंदोलन हाईजैक कर लिया था। आपने भी तो पिता समान अन्ना के पीठ में ‘छुरा’ भोंका और सत्ता की मलाई अकेले खा ली। अपने नाम के आगे चौकीदार लगाने वाले अरविंद सोनी के टि्वटर हैंडल से कहा गया कि सर, बुजुर्गों पर अधिक ज्ञान न दें। अन्ना आज भी आपको गालियां दे रहे हैं।

दरअसल, केजरीवाल का हालिया ट्वीट बीजेपी के उस फैसले पर आया, जिसमें गांधीनगर (गुजरात) से दिग्गज नेता लाल कृष्ण आडवाणी को टिकट के बजाय पार्टी चीफ अमित शाह को टिकट दे दिया। वहीं, दल के एक अन्य दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी मतदाताओं के नाम पत्र लिख स्पष्ट किया कि पार्टी ने उन्हें चुनाव न लड़ने की सलाह दी है।

हुआ यूं कि दिल्ली सीएम ने जोशी के मामले से संबंधित खबर को रीट्वीट करते हुए दो ट्वीट किए। देखें उन्होंने क्या कहा-

अब केजरावाल के इन ट्वीट्स पर लोगों ने उल्टा उन्हीं को निशाने पर ले लिया और जमकर ट्रोल कर दिया। ये हैं लोगों की प्रतिक्रियाएं:

याद दिला दें कि 2011 में देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े स्तर पर आंदोलन और मुहिम चलाई गई थीं। समाजसेवी अन्ना हजारे के अनशन से तब उस आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जिससे बाद में केजरीवाल और अन्य लोग जुड़े थे। बाद में केजरीवाल ने पार्टी बना ली और खुद फ्रंट में आ गए। आप संयोजक के आलोचकों में इसी बात पर एक धड़ा यह आरोप लगाता रहा है कि केजरीवाल ने अन्ना के बहाने अपना स्वार्थ सिद्ध किया और बाद में उन्हें किनारे कर दिया।

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