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बिहार: जेडीयू के लिए लोजपा छोड़ेगी ये सीटें, पर अनंत सिंह ने बढ़ा दी नीतीश की चिंता

एनडीए छोड़कर महागठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा के शामिल होने के बाद बिहार एनडीए ने कोइरी वोटरों को साधने के लिए नए कुशवाहा की तलाश कर ली है। पूर्व विधायक सम्राट चौधरी को बीजेपी तबज्जो देने लगी है।

जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के सीएम नीतीश कुमार

एनडीए छोड़कर महागठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा के शामिल होने के बाद बिहार एनडीए ने कोइरी वोटरों को साधने के लिए नए कुशवाहा की तलाश कर ली है। पूर्व विधायक सम्राट चौधरी को बीजेपी तबज्जो देने लगी है। मगर यह दांव कितना कामयाब होगा, अभी अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। इधर, लोजपा को छह लोकसभा सीट और एक राज्यसभा की सीट देने का वादा कर अमित शाह ने एनडीए के अंदर भूचाल को रोक लिया है। लगे हाथ एक बात साफ हो गई कि रामविलास पासवान हाजीपुर से अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। राज्यसभा में जाने का उन्होंने अपना रास्ता साफ कर लिया। सूत्र बता रहे हैं कि अब हाजीपुर की सीट पर उनके छोटे भाई पशुपति कुमार पारस लड़ेंगे। पारस फिलहाल बिहार लोजपा के अध्यक्ष हैं।

2014 में लोजपा ने वैशाली, हाजीपुर, जमुई, समस्तीपुर, खगड़िया, मुंगेर और नालंदा सीटों से लड़ा था। इनमें से पहले चार सीटों पर तो कोई मतभेद नहीं है, इस बार भी लोजपा ही लड़ेगी मगर मुंगेर सीट पर जदयू दावेदारी ठोक रहा है। वहां से राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का मैदान में उतरना पक्का माना जा रहा है। बीते चुनाव में ये जदयू उम्मीदवार थे पर लोजपा की वीणा सिंह से चुनाव हार गए थे। वीणा सिंह लोजपा के बाहुबली नेता सूरजभान सिंह की पत्नी हैं। लोकसभा चुनाव हारने के बाद ललन सिंह बिहार सरकार में मंत्री बनाए गए थे। इस बार ललन सिंह के लिए बाहुबली सूरजभान नहीं बल्कि अनंत सिंह सिरदर्द बन सकते हैं क्योंकि उन्होंने भी मुंगेर संसदीय सीट से ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। फिलहाल अनंत सिंह मोकामा से विधायक हैं। छोटे सरकार कहलाने वाले अनंत सिंह की इन दिनों नीतीश कुमार से नहीं बन रही है।

सूत्र बता रहे हैं कि लोजपा मुंगेर और नालंदा छोड़ने तैयार हो गई है। नालंदा सीट पर लोजपा चुनाव हार गई थी। इसके बदले उत्तर प्रदेश में लोजपा एक सीट पसंद की लेगी। खगड़िया सीट पर थोड़ा असमंजस बरकरार है। दरअसल, लोजपा से जीते महमूद अली कैसर के एनडीए छोड़ने की चर्चा है। अगर ऐसे हालात बने तो लोजपा अपनी पसंद की दूसरी सीट भी ले सकती है। इधर, मुंगेर के बदले लोजपा को नवादा सीट मिल सकती है। नवादा सीट लोजपा के खाते में जाने से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को दूसरी सीट तलाशनी पड़ेगी। वैसे पिछले चुनाव में भी उनकी पसंद बेगूसराय सीट ही थी। मगर पार्टी ने भोला सिंह को वहां से टिकट दिया था। भाजपा की यह रणनीति सफल रही। नवादा और बेगूसराय दोनों पर जीत मिली। भोला सिंह का हाल में ही निधन हो गया। इसलिए गिरिराज सिंह को बेगूसराय जाने में मुश्किल नहीं है। पटना साहिब से वर्तमान भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट कटना लगभग तय है। उनकी जगह फिल्मी दुनिया से जुड़े भोजपुरी फिल्मों के जाने-माने निर्देशक और प्रोड्यूसर अभय सिन्हा को उतारने की योजना है। ये भी पटना के वाशिंदें है। अभय सिन्हा को उतारकर पार्टी कायस्थ मतों को साधना चाहती है।

उधर, रालोसपा के महागठबंधन में शामिल होने से हालात बदले हैं। महागठबंधन मजबूती महसूस कर रहा है। रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की कोइरी मतदाताओं पर पकड़ है। यह अलग बात है कि उनके दोनों विधायकों ने जदयू में जाने की घोषणा कर दी है। मगर एनडीए सम्राट चौधरी को कुशवाहा की काट समझ बैठा है। सम्राट चौधरी तारापुर असरगंज मुंगेर के रहने वाले हैं और पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी के बेटे हैं। राजद के बाद वे हम पार्टी में चले गए थे। सम्राट चौधरी को राजनीति में लाने वाला राजद कुनबा ही है। परबत्ता सीट से विधायक पहली दफा बने और कम उम्र में ही मंत्री बना देने से विवादों में फंसे लेकिन बिहार की कुशवाहा बिरादरी पर इनकी वैसी पकड़ नहीं है जैसी उपेंद्र कुशवाहा की है। हालांकि, पार्टी ने सम्राट को आगे बढ़ाते हुए उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है मगर यह चाल कितनी कामयाब होगी, उसके लिए अभी इंतजार करना होगा।

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