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दिल्ली नगर निगम: लंबित परियोजनाएं चुनाव प्रचार से दूर, विपक्ष नहीं बना पा रही मुद्दा

उत्तरी और पूर्वी निगम में 724 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी रानी झांसी फ्लाईओवर से लेकर शाहदरा झील की योजना अधर में लटकी हुई है।

Author नई दिल्ली | April 6, 2017 11:40 AM
इस साल दिल्ली नगर निगम चुनाव होने हैं। (प्रतीकात्मक चित्र)

दिल्ली नगर निगम के मौजूदा चुनाव में निगम की लंबित परियोजनाएं मुद्दा नहीं बन रही हैं। इन मुद्दों के चुनाव के बीच आने से निगम में सत्ताधारी भाजपा की किरकिरी होना तय है। उत्तरी और पूर्वी निगम में 724 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी रानी झांसी फ्लाईओवर से लेकर शाहदरा झील की योजना अधर में लटकी हुई है। वहीं दक्षिणी निगम में जंगपुरा और सुभाषनगर-राजौरी गार्डन की मल्टीलेवल पार्किंग पर नेता और अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। इसके अलावा ताहिरपुर मनोरंजन केंद्र, बालक राम अस्पताल, पूर्णिमा सेठी अस्पताल, पीतमपुरा शिव मार्केट पार्किंग स्थल का काम भी पांच सालों में अधूरा ही है। निगम अधिकारियों की दलील है कि आर्थिक परेशानी से जूझ रहे निगम इन परियोजनाओं में हुए विलंब को बहुत जल्द पूरा कर लेगा।  इस बीच उत्तरी निगम के रानीखेड़ा में 100 मीट्रिक टन रोज की क्षमता वाला कूड़ा प्रबंधन प्लांट को उपराज्यपाल ने हरी झंडी देते हुए जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश तो दे दिया पर अब चुनाव की गहमागहमी में उसे भी पूरा करना मुश्किल ही लग रहा। निगम की कई ऐसी परियोजनाएं हैं जो सालों से लंबित है। इसमें सबसे ज्यादा मल्टीलेवल पार्किंग हैं। इस समय उत्तरी निगम में 99, दक्षिणी में 45 और पूर्वी निगम में 100 पार्किंग स्थल का निर्माण होना है। अभी आसफ अली रोड, गांधी मेला परिसर, परेड ग्राउंड, कमलानगर, चर्च मिशन रोड, हौजखास और मॉडल टाउन में मल्टीलेवल पार्किंग हैं। हालात यह है कि अब इस प्रकार की परियोजनाओं को पूरा करने का खर्च इसके शुरुआती खर्च और अनुमान से कई गुणा ज्यादा तक पहुंच गया है।

9 सालों से रानी झांसी फ्लाईओवर का काम इस कदर अटका है कि जहां रोज जाम होना आम बात हो गया है। करीब डेढ़ किलोमीटर इस लंबे फ्लाईओवर का निर्माण कार्य साल 2008 में शुरू हुआ था। 117 करोड़ की परियोजना पर 724 करोड़ रुपए खर्च हो गए पर परिणाम अभी भी 65 फीसद पर लटका हुआ है। यही हाल पूर्वी दिल्ली निगम के शाहदरा झील के पुनरुद्धार के काम का भी है। वास्तविक रूप खो चुकी इस झील के लिए निगम ने पर्यटक स्थल की तरह विकसित करने की योजना बनाई थी। झील के पुनरुद्धार का काम साल 2012 मे हुआ था। आर्थिक परेशानी झील की तमाम सुंदरता को खा गई। काम समय पर क्यों नहीं पूरा हुआ जब इस बारे में निगम के सूचना प्रचार निदेशक योगेंद्र सिंह मान से पूछा गया तो उनका कहना था कि शाहदरा झील के काम में कई प्रकार की अड़चनें आई थीं। निजी और सरकारी स्तर पर जमीन के अधिग्रहण में कुछ दिक्कतें रही थीं जिससे परियोजना पूरी होने में विलंब हुआ। इस समय काम पूरे जोर-शोर से चल रहा है।

दक्षिणी निगम के हालात आर्थिक रूप से भले ही सुदृढ़ दिख रहे हों पर वहां की भी परियोजनाएं एक बार अटकी तो अटकी ही चली गईं। अनुमान से कई गुणा ज्यादा लागत लगने के बाद भी 300 गाड़ियों की क्षमता वाली जंगपुरा मल्टीलेवल पार्किंग का काम अटका पड़ा हुआ है। सुभाषनगर राजौरी गार्डन पार्किंग स्थल का भी यही हाल है। दक्षिण निगम के अधिकारी का कहना है कि उनके क्षेत्र में जिन परियोजनाओं में दिक्कतें आई हैं, उनका हल बहुत जल्द निकाल लिया जाएगा। निगम की अन्य परियोजनाओं रानी मार्केट व शिव विहार पीतमपुरा में 600 गाड़ियों की पार्किंग, तिमारपुर में बालक राम अस्पताल के सौ बिस्तर को दो सौ बिस्तर करने, ताहिरपुर मनोरंजन पार्क अधर में ही लटका है। ये परियोजनाएं कब पूरी होंगी इस पर निगम चुप हैै।

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